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क्या आप जानते हैं, बर्बाद होने वाला है रिटेल विक्रेताओं का कारोबार

Girish Malviya

बहुत से लोगों को यह लगता है कि ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियां के आने के बाद सभी रिटेल विक्रेताओं लिए समान अवसर उपलब्ध हुए हैं. वे आसानी से अपने सामान किसी भी यूजर को बेच सकते है! लेकिन ऐसा नहीं है!

वर्ष 2015 में 20 से भी अधिक छोटी-छोटी ऑनलाइन सेलर्स अपना सामान बेच रहे थे. लेकिन अब सिर्फ अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियां ही बची हुई है. बाकी सब निपट गए हैं.

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कुछ दिनों पहले 2000 से अधिक ऑनलाइन विक्रेताओं के एक समूह ने भारत में अमेज़न के खिलाफ एक एंटी ट्रस्ट मामला दायर किया है. इसमें अमेरिकी कंपनी अमेजन पर आरोप लगाया गया है कि वह कुछ रिटेल विक्रेताओं के पक्ष में है.

होता यह है कि अमेजन इंडिया की थोक शाखा निर्माताओं से थोक में सामान का सौदा करती है और उन्हें क्लाउडटेल जैसे विक्रेताओं को नुकसान में बेचती है. इसके बाद ऐसे सेलर्स बड़ी छूट पर अमेज़न पर सामान ऑफर करते हैं.

इस शिकायत में 700 से अधिक स्क्रीनशॉट अमेज़न की वेबसाइट, किराने का सामान और डिटर्जेंट सहित कुछ उत्पादों और लिस्टिंग के जोड़े गए हैं. इसमें वेबसाइट पर दिखाई कीमतों की तुलना में ई-कॉमर्स पर 8 प्रतिशत से 45 प्रतिशत तक की छूट दिखाई गई है. विक्रेता समूह का यह भी आरोप है कि अमेजन कुछ विक्रेताओं से कम शुल्क लेता है. इससे स्वतंत्र ऑनलाइन खुदरा विक्रेताओं के लिए अपनी वेबसाइट पर प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाता है.

भारत में अमेजन के सबसे बड़े विक्रेताओं में से एक क्लाउडटेल, इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के लिए 6.3 प्रतिशत का शुल्क अमेज़न को देता है. जबकि स्वतंत्र विक्रेता लगभग 28.1 प्रतिशत का भुगतान करते हैं. क्लाउडटेल में अमेजन की तक़रीबन 51.50 प्रतिशत की हिस्सेदारी है.

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यानी अपनी कंपनी के जरिए अपने ही प्लेटफार्म पर डिस्काउंट ऑफर करते हैं. ताकि और कोई विक्रेता उस रेट में कॉम्पीट ही नहीं कर पाए और एक तरह से बिजनेस पर पूरा एकाधिकार स्थापित हो जाता है.

अब अमेजन कंपनी जियोमार्ट के साथ आ रहा है. इसका मतलब यह है कि सिर्फ भारत में ऑनलाइन का बाजार का हाल भी टेलीकॉम की तरह होने जा रहा है.

डिसक्लेमरः ये लेखक के निजी विचार है.

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