Opinion

क्या आप जानते हैं सैलरी पाने  वाले 1.89 करोड़ मिडिल क्लास बेरोजगार हो गये हैं

Surjit Singh

जीडीपी का आंकड़ा आपने देख लिया. आजादी के बाद देश सबसे खराब स्थिति में पहुंच चुका है. हमारी आर्थिक स्थिति बदतर होती जा रही है. पर क्या आप यह भी जानते हैं पिछले पांच माह में 1.89 करोड़ लोग बेरोजगार हो गये हैं. ये वो लोग हैं, जिन्हें हर माह सैलरी मिलती थी. जिनकी नौकरी को सबसे सुरक्षित कहा जाता है. यह वही वर्ग हैं, जिन्हें अपर या लोअर मिडिल क्लास कहा जाता है. अब बेरोजगार हैं. क्यों? सरकार कहती है कोरोना के कारण. तो सरकार ने इस मिडिल क्लास के लिए क्या किया? जवाब हैः कुछ भी नहीं.

सेंटर फॉम मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) की रिपोर्ट से सैलरी क्लास बेरोजगारों की संख्या का पता चलता है. वर्ष 2019-20 यानी कि 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2020 तक देश में औसतन 8.61 करोड़ लोग हर माह सैलरी वाली नौकरी करते थे. इसमें सरकारी, प्राइवेट से लेकर छोटी कंपनियों और फैक्टरियों में सैलरी पर काम करने वाले लोग शामिल हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल अप्रैल माह में सैलरी पर काम करने वाले लोगों की संख्या 6.84 करोड़ रह गयी थी. इस वक्त देश में करोना के कम मरीज थे और कठोर लॉकडाउन लागू था. मतलब कठोर लॉकडाउन के पहले माह में 1.77 करोड़ लोग बेरोजगार हो गये. जिन्हें मार्च तक हर माह सैलरी मिलती थी.

सीएमआइई की रिपोर्ट के मुताबिक, जून में देश में 7.22 करोड़ लोग सैलरी वाली नौकरी कर रहे थे. यह वह महीना है, जब लॉकडाउन में कुछ छूट दिये गये थे. मतलब यह कि मार्च के मुकाबले जून में 1.39 करोड़ कम लोग सैलरी वाली नौकरी कर रहे थे. अप्रैल माह से इस आंकड़े का तुलना करें तो तकरीबन 38 लाख नौकरी बढ़ी थी.

जून के आंकड़े उत्साहित करने वाले थे. लगा था कि जुलाई माह में सैलरी क्लास लोगों की संख्या पहले जितनी हो जायेगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. जुलाई में सैलरी क्लास रोजगार की संख्या अप्रैल से भी 12 लाख कम हो गये. सीएमआइई की रिपोर्ट बताती है कि जुलाई माह में देश में 6.72 करोड़ लोग ही मासिक सैलरी वाली नौकरी कर रहे थे. जून के मुकाबले यह आंकड़ा 50 लाख कम है.

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