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छापकर किताबें न बांटें, स्कूलों में बनायें बुक बैंक या डीबीटी से दें नकद रकम : महेश पोद्दार

सांसद ने शिक्षा मंत्री को पत्र लिख कर दिया सुझाव

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Ranchi: राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने सरकारी विद्यालयों में छात्र– छात्राओं को हर साल मुफ्त किताबें उपलब्ध कराने के स्थान पर स्कूलों में बुक बैंक स्थापित करने अथवा किताबों की कीमत बच्चों के बैंक अकाउंट में डीबीटी के माध्यम से उपलब्ध कराने का सुझाव दिया है. श्री पोद्दार ने झारखण्ड की शिक्षा मंत्री डॉ. नीरा यादव को पत्र लिख कर यह सुझाव दिया है.

बैंक खाते में राशि भेजना सराहनीय रहा है

श्री पोद्दार ने अपने पत्र में कहा है कि राज्य सरकार ने पुस्तकों का मूल्य सीधे बच्चों के बैंक खाते में अंतरित करने के स्थान पर इस बार पुस्तकें छपवा कर वितरित करने की योजना बनायी है और इससे सम्बंधित निविदा का प्रकाशन भी किया गया है. झारखण्ड में छात्र– छात्राओं को निःशुल्क पोशाक, साइकिल आदि के लिए नकद राशि सीधे उनके बैंक खातों में देने की परिपाटी शुरू हुई, वह काफी सफल रही और इस प्रयोग को काफी सराहना भी मिली.

बुक बैंक बनाने से विद्यार्थी ज्यादा जिम्मेवार बनेंगे

श्री पोद्दार ने सुझाव दिया है कि हर वर्ष नयी पुस्तकें छपवा कर वितरित करने और इस प्रक्रिया में प्रतिवर्ष लोकवित्त के करोड़ों रुपये व्यय करने के स्थान पर राज्य के प्रत्येक सरकारी विद्यालय में एक बुक बैंक स्थापित किया जा सकता है. इस बुक बैंक से चालू सत्र के सभी विद्यार्थी पुस्तकें प्राप्त करें और सत्र की समाप्ति पर वापस कर दें जो अगले सत्र के विद्यार्थियों के काम आये. इससे न सिर्फ प्रतिवर्ष होनेवाला करोड़ों रुपये के लोकवित्त का अपव्यय रुकेगा बल्कि पर्यावरण की रक्षा भी होगी. विद्यार्थी ज्यादा जिम्मेवार बनेंगे.

प्रकाशकों को पाठ्यक्रम उपलब्ध कराया जाये

उन्होंने कहा कि यदि सरकार छात्र– छात्राओं को छपी हुई पुस्तकें उपलब्ध कराना ही बेहतर समझती है तो पुस्तकों की कीमत विद्यार्थियों के खाते में अंतरित करनेवाली व्यवस्था ही कायम रखें. प्रकाशकों को केवल प्रकाशन योग्य पाठ्यक्रम उपलब्ध करा कर उन्हें इसे खुले बाज़ार में उपलब्ध कराने का निर्देश दिया जा सकता है.

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