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क्लब फुट देखकर डरे नहीं, हो सकता है सफल इलाज

Ranchi : क्लबफुट न्यू बॉर्न बच्चों में होनेवाली एक गंभीर बीमारी है. इसमें जन्म से ही बच्चे का पैर अंदर की तरफ मुड़ा होता है. ऐसे में अगर छह महीने तक के अंदर बच्चे का इलाज करा लिया जाये, तो उसे लाइफटाइम होने वाली डिजेबिलिटी से बचाया जा सकता है. ये बातें रिम्स में क्लबफुट पर आयोजित 3 दिन के अवेयरनेस कैंप के दौरान कोऑर्डिनेटर रोजलीन ने कहीं. उन्होंने बताया कि एक हजार में एक बच्चे को क्लबफुट की प्रॉब्लम होती है. लोग बचपन में ध्यान नहीं देते और यह बीमारी बढ़ जाती है. बच्चा जब बड़ा होता है, तो वह डिजेबल हो जाता है. लेकिन इसका सफल इलाज हो सकता है. मौके पर ऑर्थो के डॉ एलबी मांझी, डॉ शोभित दास, सोफिया कुजूर, सरफराज, ट्रिबल कुजूर समेत अन्य मौजूद थे.

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रांची में 700 बच्चों का इलाज

क्योर इंटरनेशनल इंडिया एनजीओ झारखंड सरकार के साथ मिल कर क्लब फुट को दूर करने में सहयोग कर रही है. इसके डायरेक्टर डॉक्टर संतोष जॉर्ज के नेतृत्व में गवर्नमेंट हास्पिटल्स में क्लबफुट का फ्री ट्रीटमेंट किया जा रहा है, जहां ट्रीटमेंट के बाद बच्चों को स्पेशल जूते भी उपलब्ध कराये जाते हैं. केवल रांची की बात करें तो अबतक 700 बच्चों का इलाज किया जा चुका है. वहीं कुछ का इलाज अंतिम चरण में है. जबकि पूरे झारखंड में 1500 अधिक मरीज एनरोल्ड हैं.

पोनसेटी टेक्निक से हो रहा ट्रीटमेंट

क्लबफुट से ग्रसित बच्चों का पोनसेटी टेक्निक से ट्रीटमेंट किया जाता है. इसके तहत हर हफ्ते बच्चे के पैर का प्लास्टर किया जाता है. इसके बाद जरूरत पड़ने पर एक छोटा सा आपरेशन कर बच्चे के पैर को एडजस्ट कर प्लास्टर को तीन हफ्ते तक छोड़ दिया जाता है. को-आर्डिनेटर रोजलीन ने बताया कि रांची के अलावा, हजारीबाग, चाईबासा, बोकारो और धनबाद के गवर्नमेंट हास्पिटल्स में भी क्लब फुट का ट्रीटमेंट किया जा रहा है. वहीं रांची में रिम्स और सदर में काफी बच्चों का इलाज किया गया.

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Nayika

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