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दस साल से आवास की आस में जिंदगी काट रहा दिव्यांग

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Gomiya : कभी-कभी व्यवस्था की अनदेखी इंसान को इतना मजबूर कर देती है कि जिंदगी बोझ लगने लगती है और एक-एक पल काटना मुश्किल हो जाता है. गोमिया प्रखण्ड अंतर्गत पलिहारी गरुडीह पंचायत के ठाकुर टोला निवासी 29 वर्षीय भरत ठाकुर की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. भरत ठाकुर अपने 80 वर्षीय बीमार पिता, 28 वर्षीय पत्नी और अपने तीन बच्चों के साथ बीपीएल कार्ड से मिलनेवाले चावल और दिव्यांग पेंशन से गुजर बसर करते हैं. यहां बता दें कि भाग्य भी भरत के साथ सौतेला ब्यवहार कर रही है.

भरत अपने दोनों पैरों से दिव्यांग है, उसे चलने फिरने में काफी परेशानी रहती है. गरीबी का आलम कुछ ऐसा है कि गुजर-बसर करने के लिए आवास भी नहीं. एक टूटे-फूटे मिट्टी का खपरैल मकान में पूरा परिवार गुजर-बसर करता है. वह मकान भी बारिश के मौसम में रहने लायक नहीं रहता. किसी तरह से तिरपाल और प्लास्टिक के सहारे खुद को बचाने की कोशिश करता है भरत का पूरा परिवार.

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10 साल से घर की आस लगाये बैठा है भरत और उसका पूरा परिवार

भरत ठाकुर का कहना है लगभग 10 वर्ष पूर्व गांव में पंचायत चुनाव हुआ था. इस दौरान घर बनने की एक उम्मीद जगी थी. गांव के मुखिया ने भी यह सपना दिखाया था कि चुनाव जीतने के बाद सब का अपना मकान बनवाने का प्रयास किया जायेगा. लेकिन चुनाव के बाद कई बार फरियाद के बावजूद परिणाम ढाक के तीन पात रहे. देखते ही देखते दूसरा चुनाव भी खत्म हो गया.  इसमें यही उम्मीद दिलाई गई कि इस बार मकान अवश्य बनवा दिया जायेगा. लेकिन यह कार्यकाल भी पूरा हो गया और परिणाम शून्य ही रहा. भरत बताते हैं कि पिछले दस वर्षों से इस हालत यहां से वहां दौड़ रहा हूं,  जिसने जो कहा मैं वैसा करता गया. लेकिन इनसब के बावजूद मकान का सपना अबतक पूरा नहीं हो पाया.

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प्रधानमंत्री आवास योजना से मन में जगले हलई आस, लेकिन उहो नई पुरा होलई : भरत के पिता

भरत के पिता का कहना है प्रधानमंत्री आवास योजना से मन में एगो आस जगले हलई, लेकिन उहो नई पूरा होलई. पता नई कब तक हमीन के झेले के पड़ी. वहीं भरत का कहना है कि आवास सूची में उसका नाम कब का आ चुका है. लेकिन आवास नही दिया गया, इसका क्या कारण है, मुझे नहीं मालूम. मुखिया से पूछे जाने पर वह कहती हैं कि आप परेशान न हों आपका आवास जरूर बनेगा.

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पंचायत सचिव ने हटवा दिया नाम : मुखिया

इस संबंध में मुखिया ललिता देवी ने कहा कि सूची में इनका नाम आया था, लेकिन मुझे बिना जानकारी दिये पंचायत सचिव ने नाम हटवा दिया. 80 लोगों की सूची में इनका भी नाम था, जिनमे तीस लोगों के नाम हटा दिये गये. जिस वजह से भरत समेत अन्य कई लोगों का आवास योजना का काम रुक गया है.

वहीं जिला बीस सूत्री के उपाध्यक्ष लक्ष्मन नायक ने कहा की अगर सूची से नाम हटा है तो गलत है,  इसकी जांच होगी.

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