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रांची नगर निगम के ड्रीम प्रोजेक्ट से डिस्टिलरी तालाब हुआ खत्म, करम नदी का अस्तित्व मिटा, बह रहा नाला

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  • 2004 तक मैप में दिखता था डिस्टिलरी तालाब, 2019 में हुआ गायब
  • विवेकानंद पार्क और निर्माणाधीन अंडरग्राउंड सब्जी मार्केट के कारण आसपास के क्षेत्रों में गहराया जल संकट

Nitesh Ojha

Ranchi :  राजधानी में लालपुर से कोकर जाने के दौरान एक डिस्टिलर पुल है, जहां साल 2004 तक डिस्टिलरी तालाब हुआ करता था. शहर की सबसे घनी आबादीवाले क्षेत्र से बहनेवाली करम नदी पर यहां एक छोटा सा चेक डैमनुमा संरचना हुआ करती थी. यहां एक बड़ा तालाब भी था जिसे डिस्टिलरी तालाब कहा जाता था. आज यही नदी इस पुल के पास एक संकुचित नाले का रूप ले चुकी है. रांची नगर निगम के हो रहे सौंदर्यीकरण के काम के पहले तालाब पर बने चेक डैम के कारण नजारा वाटर फॉल की तरह होता था.

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तालाब में जमे पानी और फॉल से झरझर नीचे गिरते पानी का नजारा देखने लायक होता था. इस नदी-तालाब से शहर के बड़े क्षेत्र का भूगर्भ जल रिचार्ज होता था. धीरे-धीरे अतिक्रमण के कारण नदी सिमट गयी. नदी के किनारे अंधाधुंध घऱों के निर्माण ने तो नदी को छोटा कर दिया, लेकिन रांची नगर निगम ने इस तालाब को सौंदर्यीकरण के नाम पूरी तरह से खत्म कर दिया. निगम ने कुछ वर्ष पहले यहां विवेकानंद स्मृति पार्क का निर्माण कराया था. बताया गया कि यहां के लोगों को स्वच्छ वातावरण मिलेगा. हुआ उलट. तालाब तो सूखा ही, सैकड़ों घरों के वाटर ड्रेनेज में परेशानी और जलसंकट की स्थिति बन गयी. अब निगम यहां कंक्रीट से अंडरग्राउंड सब्जी मार्केट भी बना रहा है.

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निगम के विकास की भेंट चढ़ा तालाब

2004 के पहले निगम की नजर शायद इस तालाब पर नहीं पड़ी थी. अचानक क्या हुआ कि निगम ने यहां सौंदर्यीकरण और विकास के काम का निर्णय लिया, जिसकी भेंट कोई और नहीं बल्कि यही डिस्टिलरी तालाब चढ़ा. पहले निर्णय हुआ कि करोड़ों रुपये खर्च कर तालाब पर विवेकानंद पार्क का निर्माण किया जाये. पार्क निर्माण को लेकर मेयर और डिप्टी मेयर के बीच कई ही अनबन भी देखी गयी, यह बात अलग है कि आज दोनों एक ही पार्टी के नेता हैं. पार्क बनानेवाले जनप्रतिनिधि ने इसे अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बताते हुए कहा था कि पार्क के बनने से आसपास के लोगों को स्वच्छ वातावरण मिलेगा, साथ ही भूगर्भ जलस्रोत में कोई असर नहीं पड़े, इसलिए पार्क के बीच-बीचों एक तालाब बनेगा. पार्क भी बना और तालाब भी, लेकिन यह तालाब भी उपेक्षा का शिकार हुआ और तेज बारिश में ही उसका हिस्सा ध्वस्त हो गया. उसकी सीढ़ी व दीवार ढह गयी. फिर लालपुर-कोकर मार्ग को अतिक्रमण करने के नाम पर बड़े-बड़े कंक्रीट से अंडरग्राउंड सब्जी मार्केट की बात हुई. काम शुरू हो चुका है. लेकिन जिस तरह यहां मजबूत कंक्रीट से सब्जी मार्केट का काम हो रहा है, उससे तय यह है कि यहां बहनेवाला संकुचित नाला आज नहीं, तो कल और छोटा हो जायेगा.

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आसपास के क्षेत्रों में जल संकट

डिस्टिलरी तालाब समाप्त होने से शहर के पॉश इलाके कहे जानेवाले लालपुर, व‌र्द्धमान कंपाउंड, पीस रोड, कोकर चूना भट्टा, भावानगर, हनुमान नगर, आदि क्षेत्रों और मोहल्लों में गंभीर जल संकट उत्पन्न हो गया है. स्थानीय लोगों से बातचीत में पता चला कि तालाब होने से यहां के अधिकांश घरों में स्थित कुआं पानी से लबालब भरा रहता था. पानी के लिए बोरिंग कराने की जरूरत भी लोगों को नहीं थी. लेकिन जैसे ही तालाब सूखा, डिस्टिलरी से सटे कई घरों के कुओं का पानी सूख गया. इससे जलसंकट की स्थिति उत्पन्न हो गयी. इसी तरह इन घरों से निकलनेवाले पानी या सीवरेज-ड्रेनेज में भी परेशानी उत्पन्न होने लगी. पहले जहां करम नदी में गिरने से सीवरेज-ड्रेनेज का बहाव काफी तेज था, वहीं संकुचित नाले में जाने से यह बहाव काफी कम हो गया.

काफी हुआ विरोध प्रदर्शन, निगम और प्रशासन रहा खामोश

डिस्टिलरी तालाब को जिस समय जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण के नाम पर सुखाया जा रहा था, उस वक्त भी शहर के कई बुद्दिजीवी लोगों और संगठनों ने विरोध किया था. इसमें इम्पावर झारखंड, झारखंड नव निर्माण मंच-कोकर सहित अन्य सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोग शामिल थे. तालाब की दुर्दशा को जान इन लोगों ने मेयर से लेकर मंत्री तक अपनी फरियाद पहुंचायी. लेकिन न प्रशासन ने पहल की, न निगम ने. तालाब को देखते-देखते सुखा दिया गया. ऐसे में बड़े भू-भाग के भू-गर्भीय जलस्तर को बनाये रखने में मददगार साबित होनेवाले इस तालाब के सूखने से लोग जलस्तर की समस्या से जूझने को मजबूर हो गये.

स्मार्ट घरों की बात करनेवाले निगम ने सुखाये कई तालाब : नीतीश प्रियदर्शी

डिस्टिलरी तालाब सूखने और उत्पन्न जलसंकट पर चिंता जाहिर करते हुए पर्यावरणविद् और भूगर्भशास्त्री नीतीश प्रियदर्शी ने बताया कि निगम आज स्मार्ट घरों की बात कर लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक कर रहा है. इसके लिए वह होल्डिंग टैक्स में रिबेट देने की बात करता है. लेकिन वही निगम आज शहर के कई तालाबों को सौंदर्यीकरण के नाम पर सुखा चुका है. कई तालाबों के चारों ओर कंक्रीट की घेराबंदी कर इसके जल स्रोतों को पहले ही रोक चुका है. स्मार्ट घरों की जगह निगम को चाहिए था कि पहले लुप्त हुए या हो रहे तालाबों की एक सूची बनाये, फिर उसकी सफाई कर तालाब की आयु (एक तालाब की आयु कम से कम 40 से 50 साल होती है.) को बढ़ाये. करम नदी को नाला बनाये जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए नीतीश प्रियदर्शी ने कहा कि पहले नदी होने से यहां छठ पूजा होती थी. लेकिन नदी के नाला बन जाने से यह बंद हो गया. यहां तक कि जलसंकट की स्थिति भी आसपास के क्षेत्रों में काफी हो गयी.

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