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पेंशन भुगतान में झारखंड में SC के आदेश की हो रही अवहेलना- भोजन का अधिकार अभियान

Ranchi: कुछ दिनों पहले दुमका के जामा और लातेहार के महुआडांड में हुई दो लोगों की मौत को भोजन का अधिकार अभियान ने भूख से हुई मौत बताया है.

भोजन का अधिकार अभियान की ओर से जारी बयान में कहा है कि इन दोनों ही मामलों में मृतक पेंशनधारी थे. लेकिन उन्हें जनवरी 2019 के बाद से पेंशन नहीं मिला था. अगर दोनों शख्स (मोटका मांझी और रामचंद्र मुंडा) को समय पर पेंशन मिली होती तो शायद वे जीवित होते.

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लातेहार जिले के कल्याण विभाग से जानकारी हुई की राज्य सरकार से वितीय आवंटन नहीं होने की वजह से जनवरी 2019 के बाद पूरे जिले में पेंशन का भुगतान नहीं हुआ है, अन्य जिलों की रिपोर्ट बताती है कि राज्य के कई अन्य जिलों में भी यही स्थिति है.

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8 नवंबर 2001 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि हर महीने के 7 वें दिन तक सामाजिक सुरक्षा पेंशन का भुगतान किया जाए. लगभग 18 साल बाद भी झारखण्ड में कहीं भी इस आदेश का पालन होता नहीं दिख रहा है.

पेंशन भुगतान का रुकना सबसे अधिक चौंकाने वाला है क्योंकि मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस वर्ष की शुरुआत में पेंशन की राशि 600 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 1,000 रुपये प्रति माह करने की घोषणा की थी. छह महीने बाद भी पेंशन की बढ़ी हुए राशि 1000 रूपये का भुगतान शुरू नहीं हुआ है. बल्कि इसके विपरीत राज्य के कुछ जिलों में पेंशन भुगतान को रोक दिया गया.

भोजन का अधिकार अभियान, झारखंड की मांग

  1. पूरे राज्य में 1,000 रुपये प्रति माह की बढ़ी हुई दर से पेंशन भुगतान के बैकलॉग की तत्काल मंजूरी.
  2. उच्चतम न्यायालय के आदेशों के अनुसार, प्रत्येक महीने के 7 वें दिन तक पेंशन भुगतान सुनिश्चित किया जाये.
  3. मोटका मांझी और रामचंद्र मुंडा के परिवारों के लिए 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाये.

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