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#UP में एक और BJP MLA का विवादित बयानः कहा- हॉस्पिटल फैला रहा कोरोना, अस्पताल प्रबंधन ने पीएम को लिखा पत्र

Aligarh:  एक ओर जहां देश कोरोना वायरस की वैश्विक महामारी से जूझ रहा है. वहीं दूसरी ओर नेताओं के विवादित बयान सामने आ रहे हैं. यूपी के देवरिया से बीजेपी विधायक सुरेश तिवारी के विवादित बयान के बाद प्रदेश के एक और भाजपा विधायक का विवादास्पद बयान सामने आया है.

भारतीय जनता पार्टी के विधायक ने अलीगढ़ में कोविड-19 संक्रमण के प्रसार के लिए जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज को जिम्मेदार ठहराकर विवाद पैदा कर दिया है. हालांकि बाद में उन्होंने सफाई दी कि उनका इरादा अस्पताल को बदनाम करने का नहीं था. इधर अस्पताल प्रबंधन ने पूरे मामले को लेकर पीएम को चिट्ठी लिखी है.

मेडिकल कॉलेज हॉस्पीटल बना संक्रमण का ‘हब’-MLA

भाजपा विधायक दलवीर सिंह ने आरोप लगाया है कि यह मेडिकल कालेज अस्पताल कोरोना वायरस का ‘हब’ बन गया है. उन्होंने उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री से यह अनुरोध भी किया है कि वह अस्पताल की कथित चूक की जांच करायें.

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उनका यह आरोप भी था कि अस्पताल ने मरीजों के बारे में जिला प्रशासन को समय से अवगत नहीं कराया है . उनका यह बयान प्रमुख समाचार पत्रों में छपा और सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.

हॉस्पीटल ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

अस्पताल के डाक्टर विधायक के बयान से हैरत में हैं . उनका कहना है कि ऐसे समय में जबकि डाक्टर चौबीसों घंटे अपने जीवन को दांव पर लगाकर काम कर रहे हैं, इस बयान से उन्हें पीड़ा पहुंची है. उनका यह भी कहना है कि विधायक के बयान से यदि किसी डाक्टर को किसी अप्रिय घटना का सामना करना पडता है तो पूरी तरह विधायक और जिला प्रशासन जिम्मेदार होगा.

रेजीडेंट डाक्टर्स एसोसिएशन के डा. हमजा मलिक ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर कहा कि अस्पताल रोजाना लगभग ढाई सौ मरीजों का मुफ्त कोरोना परीक्षण कर रहा है. नोएडा, आगरा, एटा, हाथरस, कासगंज, रामपुर, संभल, मुरादाबाद और बुलंदशहर सहित सात से अधिक जिलों के मरीजों के टेस्ट के लिए यह फ्रंटलाइन विशेष कोरोना अस्पताल है . अकेले अलीगढ जिले की आबादी लगभग 35 लाख है.

इस पत्र की प्रतियां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजी गयी हैं. डा. हमजा ने संवाददाताओं को बताया कि माननीय विधायक को शायद जानकारी नहीं है कि अस्पताल आने वाला संक्रमित व्यक्ति आसानी से वायरस फैला सकता है और इस बारे में किसी को पता भी नहीं लग सकता.

एएमयू ने बयान की आलोचना की

यह अस्पताल अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) से संबद्ध है . एएमयू प्रशासन ने विधायक की टिप्पणी की आलोचना की है. एएमयू प्रवक्ता एस किदवई ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि अस्पताल प्रशासन मरीजों और डाक्टरों की सुरक्षा के लिए हरसंभव कदम उठा रहा है.

उन्होंने कहा, ‘हमने मेडिकल स्टाफ को पीपीई किट प्रदान की है और पिछले सप्ताह से हमने अस्पताल में किसी भी तरह का उपचार कराने आने वाले मरीज के लिए इसे अनिवार्य कर दिया है.’ किदवई ने कहा कि यह आरोप पूरी तरह निराधार है कि अस्पताल समय पर प्रशासन को सूचित नहीं कर रहा है . उनका कहना था कि जांच मशीनें चौबीसों घंटे चल रही हैं और पहले ही दिन से जिला प्रशासन को हर दिन रिपोर्ट दी जा रही है.

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विवाद के बाद विधायक ने दी सफाई

इस संबंध में जब विधायक से संपर्क किया गया तो उन्होंने न्यूज एजेंसी पीटीआइ से कहा कि मेडिकल कॉलेज उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहा है, यह मेडिकल कॉलेज केवल इसी जिले के लिए नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधा है.

उन्होंने कहा, ‘अगर इस अस्पताल का कामकाज प्रभावित होता है तो इससे बडा संकट पैदा हो सकता है. अस्पताल को बदनाम करने का मेरा विचार नहीं था.’

विधायक ने कहा कि मौजूदा संकट इसीलिए पैदा हुआ क्योंकि एक निजी डॉक्टर ने मेडिकल कॉलेज को कोरोना संक्रमित मरीज की वास्तविक हालत बताये बिना उसे रेफर कर दिया.

सिंह ने कहा, ‘‘ मेरी एक अन्य शिकायत है कि सारा काम जूनियर डॉक्टरों पर छोड़ दिया गया है. वरिष्ठ डाक्टर अपनी निर्धारित भूमिका नहीं निभा रहे हैं. इससे स्वास्थ्य रक्षा पर असर पड रहा है. मैं इन खबरों पर भी जांच चाहता हूं कि कुछ सीनियर काउंसलर (डॉक्टर)अवैध रूप से निजी प्रैक्टिस कर रहे हैं.’

इस बीच जिला प्रशासन ने सोमवार की शाम पुष्टि की कि जिले में कोरोना पाजिटिव मामलों की संख्या अब 24 हो गयी है.

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