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26 सालों में भारत में दोगुनी रफ्तार से बढ़ रहा कैंसर का खतरा

2040 तक दुनिया के 1.5 करोड़ से ज्यादा लोगों को सालाना कीमोथैरेपी की पड़ेगी जरूरत: स्टडी

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News Wing Desk: भारत समेत पूरी दुनिया में कैंसर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. पिछले 26 वर्षो में भारत में कैंसर का खतरा दोगुना से अधिक हो गया है. स्तन, गर्भाशय ग्रीवा, मुंह और फेफड़े के कैंसर एक साथ देश में बीमारी के बोझ का 41 प्रतिशत हैं.

साल 2040 तक हर साल दुनिया भर में 1.5 करोड़ से ज्यादा लोगों को कीमोथैरेपी की जरूरत पड़ेगी. साथ ही निम्न और मध्यम आमदनी वाले देशों में कैंसर के मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इलाज करने वाले करीब एक लाख कैंसर डॉक्टरों की भी आवश्यकता होगी. एक नए अध्ययन में इस बात का दावा किया गया है.

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22 सालों में कैंसर पेसेंट की संख्या 53 फीसदी बढ़ेगी

प्रतिष्ठित पत्रिका ‘‘लांसेट ऑन्कोलॉजी’’ में हाल में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि 2018 से 2040 तक दुनिया भर में हर साल कीमोथैरेपी कराने वाले मरीजों की संख्या 53 प्रतिशत के इजाफे के साथ 98 लाख से 1.5 करोड़ हो जाएगी.

राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर कीमोथैरपी के लिए पहली बार अध्ययन में इस तरह का आकलन किया गया है.

सिडनी में यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स, ऑस्ट्रेलिया के इंगहैम इन्स्टीट्यूट फॉर अप्लाइड मेडिकल रिसर्च, किंगहार्न कैंसर सेंटर, लीवरपूल कैंसर थैरेपी सेंटर और इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर, लिओन के अध्ययनकर्मियों ने यह अध्ययन किया है.

यूएनएसडब्ल्यू की अध्ययनकर्मी ब्रुक विल्सन के मुताबिक, दुनिया भर में कैंसर का बढ़ रहा खतरा निस्संदेह आज के समय में स्वास्थ्य के क्षेत्र में सबसे बड़ा संकट है.

उन्होंने कहा कि मौजूदा और भविष्य के मरीजों के सुरक्षित उपचार के लिए वैश्विक स्वास्थ्य कार्यबल को तैयार करने के लिए तुरंत रणनीति बनाने की जरूरत है.

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भारत में कैंसर की व्यापकता एक जैसी नहीं- HCFI अध्यक्ष

हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई) के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ.केके. अग्रवाल का कहना है, “भारत में कैंसर की व्यापकता एक समान नहीं है.

कैंसर के प्रकारों में अंतर है, जो लोगों को ग्रामीण और शहरी परिवेश के आधार पर प्रभावित करता है. ग्रामीण महिलाओं में, गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर सबसे व्यापक है, जबकि शहरी महिलाओं में स्तन कैंसर सबसे उग्र है.”

उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुष माउथ कैविटी कैंसर से प्रमुख रूप से प्रभावित होते हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में फेफड़े के कैंसर से प्रभावित होते हैं. हालांकि कैंसर में तेजी से वृद्धि हुई है और एक महामारी बन गई है.

वहीं परेशानी की बात ये है कि कैंसर की दवाएं बहुत महंगी हैं. जो एक आम आदमी की पहुंच से परे है. इस प्रकार, सस्ती कैंसर दवाओं के साथ लोगों को राहत प्रदान करने के लिए मूल्य नियंत्रण बहुत आवश्यक है.

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