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मोदी को “राष्ट्र ऋषि” की उपाधि देने पर मतभेद, घोषणा के हफ्ते भर बाद काशी परिषद में फूट

काशी विद्वत परिषद के महासचिव बोले- चाटुकारों ने किया फैसला

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Varanasi: हिंदू विद्वानों के एक प्रमुख संस्थान काशी विद्वत परिषद के कुछ सदस्यों ने पिछले सप्ताह घोषणा की थी कि प्रधानमंत्री को ‘राष्ट्र ऋषि’ की उपाधि से सम्मानित किया जाएगा.

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लेकिन घोषणा के महज एक हफ्ते के बाद इसे लेकर मतभेद उभरने लगे है. नरेंद्र मोदी को राष्ट्र ऋषि की उपाधि देने का अन्य सदस्यों ने विरोध किया है और इसे राजनीति से प्रेरित बताया.

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दरअसल, अध्यक्ष पं. रामयत्न शुक्ल के आवास पर हुई प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में महामंत्री डा. रामनारायण द्विवेदी ने बताया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘राष्‍ट्र ऋषि’ की उपाधि प्रदान की जाएगी.

और इसके लिए परिषद ने दो पन्‍नों का एक प्रोफार्मा भी प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा है. अब इस संस्‍था के ही कई लोग इस ऐलान की ख़िलाफ़त में उतर आए हैं.

‘राष्ट्र ऋषि ‘की उपाधि, चाटुकारों का फैसला- उपाध्याय

टेलिग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, परिषद के महासचिव शिवाजी उपाध्याय सहित कई अन्य सदस्यों ने इस फैसले पर विरोध जताया है. सोमवार को उन्होंने कहा कि यह तथाकथित निर्णय सही मंच पर या अपेक्षित कोरम के साथ नहीं लिया गया था.

उपाध्याय ने कहा, “यह कुछ चाटुकारों की करतूत है. उन्होंने राजनीतिक रूप से तटस्थ सदस्यों और बिना कोरम के परामर्श के बिना प्रधानमंत्री को इस उपाधि से सम्मानित करने का फैसला लिया.”

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काशी विद्वत परिषद के सदस्‍य ऋषि द्विवेदी ने द टेलीग्राफ से बातचीत में कहा,”ऐसा कोई निर्णय महासमिति की बैठक में ही लिया जा सकता है. 24 सदस्‍यीय परिषद के भीतर तीन-चौथाई बहुमत से निर्णय होना चाहिए. ऐसी कोई बैठक नहीं बुलाई गई. दो लोग साथ बैठे और मीडिया में ऐलान कर दिया कि ऐसा करेंगे.”

उन्होंने आगे कहा कि वो उपाध्याय (परिषद के महासचिव) की बातों से पूरी तरह सहमत हैं. यहां तक की किसी तरह की बैठक या फैसले के बारे में उन्हें जानकारी तक नहीं दी गई थी. साथ ही कहा कि “राष्ट्र ऋषि” शीर्षक एक “गलत और अशुद्ध” था, जिसे शास्त्रों में मंजूरी भी नहीं मिली. सही शब्द ‘राजर्षि’ है.”

रामदेव ने मोदी को कहा था ‘राष्‍ट्र ऋषि’

बता दें कि ऋषियों में निपुण लोगों के लिए चार पारंपरिक उपाधियां हैं. इसमें एक राजार्षि, महर्षि, ब्रम्हर्षि और देवर्षि है. जब दो साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरिद्वार में पतंजली योगपीठ में एक शोध संस्थान का उद्घाटन किया था, तब बाबा रामदेव ने नया शब्द गढ़ते हुए पीएम को ‘राष्ट्र ऋषि’ से सम्मानित किया था.

वहीं परिषद ने जनवरी 1990 में तत्काल प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह को ‘ब्रम्हर्षि’ की उपाधि से सम्मानित किया था. हालांकि, अगस्त महीने में उनसे यह उपाधि वापस ले ली गई थी, जब उन्होंने ओबीसी रिजर्वेशन पर मंडल कमीशन की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया था.

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