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जैक बोर्ड की परीक्षाओं में दिव्यांगों को मिलेगा अतिरिक्त समय, राइटर की भी होगी व्यवस्था

दिव्यांग विद्यार्थियों को परीक्षा समुचित सुविधा मुहैया कराने का निर्देश

Ranchi: झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) की ओर से चार मई से बोर्ड परीक्षा आयोजित करने की तैयारी अंतिम चरण में है. जिलों में प्रशिक्षण आदि पर काम हो रहा है. जैक ने इस बार स्पष्ट किया है कि परीक्षा में दिव्यांगों को कई तरह की सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएगी. उन्हें आवश्यकतानुसार परीक्षा में लिखने के लिए राइटर की व्यवस्था दी जाएगी. अतिरिक्त समय भी दिया जाएगा. अब तक नेत्रहीन और हाथों से दिव्यांग छात्र-छात्राओं के लिए राइटर की व्यवस्था होती थी, लेकिन इस बार अन्य दिव्यांगों को भी इसमें शामिल किया जाएगा. स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने इसके लिए जैक को आवश्यक निर्देश दिए हैं.

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प्राथमिक व मध्य विद्यालयों की अपेक्षा हाई व प्लस टू स्कूलों में दिव्यांग छात्र-छात्राओं की संख्या कम हो जाती है. ऐसे में दिव्यांग छात्र-छात्राओं को घर पर भी पढ़ने की व्यवस्था कराई जा रही है. वैसे दिव्यांग जो साधन के अभाव में स्कूल नहीं आ पा रहे हैं, उनके लिए अलग से साधन की व्यवस्था की जाएगी, ताकि अन्य बच्चों के साथ वह भी स्कूल में पढ़ाई कर सकें.

झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक डॉ शैलेश कुमार चौरसिया ने जैक सचिव को इस बाबत पत्र लिखा है. उन्होंने लिखा कि राज्य सरकार पांच से 18 वर्ष की आयु वर्ग के सभी बच्चों को उच्च माध्यमिक स्तर तक की शिक्षा पूरी कराने के लिए प्रयासरत हैं. ऐसा देखा गया है कि प्रारंभिक स्तर की तुलना में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर में दिव्यांग छात्रों की संख्या में लगातार कमी आ रही है. ऐसे में दिव्यांग छात्रों की आवश्यकताओं के प्रति हमें संवेदनशील होना होगा.

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चौरसिया ने बताया है कि देशभर में एक्ट 2016 लागू है. इसमें कई नई दिव्यांग कैटोगरी को शामिल किया गया है. इससे वर्तमान समय में कई दिव्यांग छात्र जैक की परीक्षा नियमावली 2002 के दायरे में नहीं आते हैं और उन्हें छूट रियायतें नहीं मिल पा रही हैं. इसलिए जैक दिव्यांगों के लिए 2016 के कानून के आधार पर नियमावली में प्रावधान करें और दिव्यांग छात्र-छात्राओं को आवश्यक रियायतें प्रदान करें. शैलेश कुमार चौरसिया ने जैक को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से अप्रैल 2019 में जारी की गई अधिसूचना की भी जानकारी दी है और उसे भी आधार बनाने को कहा है.

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