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इलाज को तरस रही ह्यूमन ट्रैफिकिंग की शिकार दिलबसिया, लगायी मदद की गुहार

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Latehar :  लातेहार के बरवाडीह  प्रखंड के छीपादोहर पंचायत के परहिया आदिम जनजाति बहुल गांव है  गम्हारिया. यहां की रहने वाली दिलबसिया बिस्तर पर पड़े-पड़े मदद के लिए टकटकी लगाये हुए है. वह कभी रोती है तो कभी हंसती है और उस पल को कोसती है, जब वह दुर्घटना की शिकार हुई. जिसमें उसकी रीढ़ की हड्डी टूट गई और उसने बिस्तर पकड़ लिया. वह करवट भी नहीं ले पाती है.  अब इलाज के लिए आर्थिक मदद की भी अपील दिलबसिया कर रही है. उसकी जिंदगी में तकलीफ कम नहीं है. दुर्घटना के पहले वह मानव तस्करी की शिकार भी हो चुकी है. किसी तरह से खुद को बचाकर दलालों के चंगुल से भागी थी.

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कैसे हुआ हादसा

दरअसल दिलबसिया 30 मई 2019 को अपने निर्माणाधीन बिरसा आवास के नीचे मसाला पीस रही थी, उसी दौरान घर का छज्जा उसपर गिरा गया. साथ ही उसके पास ही छज्जे की नीचे  12 सा ल का बच्चा खेल रहा था. वह भी इस दुर्घटना का शिकार हो गया. हालांकि छीपादोहर अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी.

वहीं दिलबसिया की भी हालत इस घटना के बाद खराब हो गयी थी. दिलबसिया चिकित्सकों ने डालटनगंज सदर अस्पताल रेफर कर दिया था. वहां एक्स-रे के बाद उसे रिम्स रेफर कर दिया गया था. लेकिन दिलबसिया की रीढ़ की हड्डी टूट गयी थी को इलाज में ज्यादा खर्च की बात सुनकर बूढ़ी मां उसे लेकर घर लौट गयी.

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसमें पहल की और 17 जून को प्रशासन को इसकी सूचना दी..18 जून की शाम एम्बुलेंस से दिलबसिया को बरवाडीह सामुदायिक स्वास्थ लातेहार सदर अस्पताल लाया गया. जहां उसे तीन दिन रखा गया. उसकी मां चरकी परहीन का कहना है कि सदर अस्पताल में इलाज के नाम पर सिर्फ दो बोतल पानी चढ़ाने के बाद रिम्स रेफर कर दिया गया. रिम्स में दिलबसिया को 20 जून को भर्ती कराया गया. लेकिन दो हफ्ते बाद ही उसे 4 जुलाई को गांव ले आया गया.

रिम्स में भी नहीं हो सका इलाज

रिम्स में भर्ती कराये जाने के बाद भी दिलबसिया की हालत वैसी ही बनी हुई थी. एक तो उसकी रीढ़ की हड्डी टूट गई थी और दूसरा उसकी कमर के नीचे जख्म था, जो बढ़ती ही जा रहा है.  उसकी भाभी जख्म को साफ करती रहती है. ठीक से खाना खाने में भी वह असमर्थ है. क्योंकि उसे भूख भी जल्दी नहीं लगती. इलाज के नाम पर खानापूर्ति ही हो रही है क्योंकि परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रही है.दिलबसिया के पास आयुष्मान कार्ड है, लेकिन इसके बावजूद वह इलाज के लिए तरस रही है. जिला प्रशासन के ने 10,000 रुपये का सहयोग तो दिया था, लेकिन वह भी नाकाफी ही रहा.

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आर्थिक तंगी इलाज में बना रोड़

दिलबसिया की मां चरकी परहीन का कहना है कि रिम्स में इलाज के दौरान करीब 14- 15 हजार रूपये खर्च हो गये. विधवा पेंशन की कुछ रकम भी आने-जाने के क्रम में खर्च हो गये. चरकी का कहना है कि बेटी के इलाज के दौरान वह भी बीमार हो गई और इलाज में पैसे खर्च हुए. साथ ही कहा कि अगर सरकार की ओर से इलाज के साथ रहने-खाने का पूरा इंतजाम रिम्स में रहेगा, तभी वे बेटी को लेकल जायेंगी.

मानव व्यापार का शिकार हो चुकी दिलबसिया

SMILE

दिलबसिया की जिंदगी में दुख कम नहीं है. खेलने-खाने की उम्र 10 साल में ही बहन तेतरी एवं अन्य दो लड़कियों के साथ एक दलाल बहलाकर उन्हें दिल्ली ले गया. वहां 8 साल काम करने का बाद 2017 में दिलबसिया भागकर अपने घर लौटी. लेकिन दिलबसिया की बहन तेतरी एवं एक अन्य लड़की पूनम अब तक नहीं लौटी हैं और उसने किसी का कोई संपर्क भी नहीं हो पाया है.

दिलबसिया एवं उनके परिवार वालों ने बताया कि इन सभी बच्चियों को दिल्ली ले जाने वाला दलाल रमेश गुमला के घाघरा के बनारी का रहने वाला है. वहीं दिलबसिया की कहना है कि दिल्ली में वह घरेलू काम काम करती थी. साथ ही बताया कि शुरू में वह चंडीगढ़ में थी, फिर दिल्ली के रोहिणी आ गयी. पहले उसे 1000 रूपये मिलते थे दो बाद में बढ़कर 2,500 हो गया.

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दलाल रख लेता था पैसा

दिलबसिया ने बताया कि उसके सारे पैसे दलाल रमेश रख लेता था. उसका घर आने का मन करता था, लेकिन रमेश उसे झूठ बोलकर डराता था. दिलबसिया ने आगे बताया कि अगर वह काम पर जाने रसे मना करती थी, तो रमेश एक कमरे में कैद कर देता था और बहुत मारता भी था.

दिलबसिया ने रमेश से तंग आकर अपने मालिक पैसा देने से मना कर दिया था. जब वह उसके चंगुल से भागकर घर लौटी तो उसके पास 20,000 रुपये थे. जिसे उसने बचाकर रखा था, मगर वो भी इलाज के दौरान खर्च हो गए. उसने बताया कि, दिल्ली में उसका नाम रीता था और उसके जैसी कई लड़कियों से दलाल रमेश काम करवाता है. साथ ही उनका शोषण भी करता है.

परिवार की हालत दयनीय

दिलबसिया के परिवार की हालत दयनीय है. मां भी बूढ़ी है और एक कच्चे मकान में बेटी को लेकर रहती है. दिलबसिया की मां चरकी बताती है कि वो सरकारी योजना से मिलने वाले राशन एवं पेंशन पर निर्भर है.

दिलबसिया ने रोते हुए लोगों से अपील की है कि उसे आर्थिक मदद मिले, वह अपना इलाज करवा सके. उसका कहना है कि मेरा अगर सही इलाज हो जाता तो मैं भी कमाकर अपना पेट भर सकती हूं. साथ ही कहा है कि उसे मदद करने वालों का वह जीवन भर शुक्रगुजार रहेगी. वहीं दिलबसिया की मां ने भी लोगों से आरेथिक मदद की अपील की है, ताकि उसकी फिर से चल-फिर सके.

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