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सरकारी स्कूलों में डिजिटल एजुकेशन: 5 महीनों की ऑनलाइन क्लास हुई बेकार, अब शिक्षकों को ऑनलाइन क्लासेस की दी जायेगी ट्रेनिंग

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Rahul Guru

Ranchi: झारखंड में सरकारी स्कूल के बच्चों के लिए चल रही ऑनलाइन क्लासेस की प्रक्रिया पूरी तरह फेल हो चुकी है. जिस उद्देश्य के साथ लॉकडाउन में ऑनलाइन क्लासेस की शुरुआत की गयी, उसमें बुरी तरह से विफल होने के बाद अब झारखंड शिक्षा परियोजना सरकारी स्कूल के शिक्षकों को प्रशिक्षित करायेगी. यह ट्रेनिंग प्रोग्राम सरकारी स्कूल के शिक्षकों को डिस्टेंस एजुकेशन और डिजिटल तकनीक से एजुकेशन देने में माहिर बनायेगी.

शिक्षा परियोजना को पांच महीने बाद इस बात का एहसास हुआ कि शिक्षकों का प्रशिक्षण आवश्यक है. इसकी तैयारी शिक्षा परियोजना की ओर से की जा रही है.

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पीरामल फाउंडेशन शिक्षकों को बनायेगा माहिर

राज्य के सभी सरकारी स्कूल के शिक्षकों को डिस्टेंस एजुकेशन और डिजिटल तकनीक से एजुकेशन देने में माहिर बनाने की जिम्मेदारी पीरामल फाउंडेशन को दी गयी है. शिक्षा परियोजना का मानना है कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए ऑनलाइन एजुकेशन ही छात्रों की शिक्षा का एकमात्र सहारा है.

पिछले पांच महीने से विद्यार्थी ऑनलाइन एजुकेशन ले रहे हैं, लेकिन सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को डिस्टेंस एजुकेशन और डिजिटल तकनीक की जानकारी के अभाव में परेशानी हो रही है. इस कारण अब जिले समेत राज्य के सभी सरकारी शिक्षकों को डिस्टेंस एजुकेशन और डिजिटल टेक्निक से परिपूर्ण किया जायेगा. पीरामल फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से शिक्षकों को कई लाभ होंगे.

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ऐसे मिलेगी शिक्षकों को ट्रेनिंग

इस ट्रेनिंग में फाउंडेशन के तकनीक विशेषज्ञ शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे. शिक्षकों को इस ट्रेनिंग प्रोग्राम के माध्यम से कंटेंट और वीडियो तैयार करने में मदद मिलेगी. सभी शिक्षकों को अल्टरनेट डे पर दो घंटे की ऑनलाइन क्लास करायी जायेगी. सप्ताह में छह घंटे प्रत्येक शिक्षकों का प्रशिक्षण लेना जरूरी होगा.

26 फीसदी बच्चे ही ले पाये ऑनलाइन एजुकेशन

शिक्षा परियोजना की ओर से उपलब्ध कराये गये ऑनलाइन एजुकेशन का लाभ केवल 26 फीसदी बच्चे ही ले पाये हैं. आंकड़ों के मुताबिक, रांची में 25 फीसदी, खूंटी में 21 फीसदी, रामगढ़ में 30 फीसदी, बोकारो में 30 फीसदी, धनबाद में 31 फीसदी, पूर्वी सिंहभूम में 34 फीसदी, चतरा में 27 फीसदी, देवघर में 25 फीसदी, दुमका में 21 फीसदी, गढ़वा में 27 फीसदी, गिरिडीह में 27 फीसदी, गोड्डा में 20 फीसदी, गुमला में 17 फीसदी, हजारीबाग में 37 फीसदी, जामताड़ा में 25 फीसदी, कोडरमा में 33 फीसदी, लातेहार में 25 फीसदी, लोहरदगा में 33 फीसदी, पाकुड़ में 21 फीसदी, पलामू में 24 फीसदी, पश्चिमी सिंहभूम में 28 फीसदी, रामगढ़ में 30 फीसदी, साहेबगंज में 18 फीसदी, सरायकेला में 18 फीसदी और सिमडेगा में 16 फीसदी बच्चे डिजिटल कंटेंट का लाभ ले पाये हैं.

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