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#DIGI SATH एक दीर्घकालिक योजना, लॉकडाउन के बाद भी बच्चों को मिलती रहेगी डिजिटल माध्यम से शिक्षा

Ranchi : जेइपीसी (राज्य शिक्षा परियोजना) मुख्यालय से परियोजना निदेशक उमाशंकर सिंह ने वेबिनार आयोजित किया. इसमें राज्य के 4500 शिक्षकों ने हिस्सा लिया. वेबिनार जूम एप पर लिया गया. वेबिनार में ऑनलाइन एजुकेशन पर चर्चा हुई. परियोजना निदेशक उमाशंकर सिंह ने डीजी को दीर्घकालिक योजना बताया.

उन्होंने इसे लॉकडाउन के बाद भी जारी रखने को कहा. उन्होंने कहा कि DIGI SATH से 10-12 लाख बच्चे जुड़े हैं. बच्चे टेलीविजन के माध्यम से भी जुड़े हैं. DIGI SATH के संबंध में कहा कि इससे शैक्षिक सामग्री के अलावा, जीवन कौशल सामग्री भी बच्चों के साथ साझा की जा रही है. इसका मकसद बच्चों को जीवन में मूल्यों और उपयोग बताना है.

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उन्होंने शिक्षकों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि DIGI SATH पर बेहतर प्रदर्शन के लिए 10-12 शिक्षकों के लिए प्रशंसा का प्रमाण पत्र जारी किया गया है. उन्होंने DIGI SATH को पूरे एकेडमिक इयर में लागू रखने को कहा. इसके लिए 30 एसआरजी (राज्य संसाधन समूह) का एक पैनल गठित किया गया है. भविष्य में बच्चों का मूल्यांकन वाट्सएप आधारित किया जायेगा.

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इस कार्यक्रम में बीसीजी, यूनिसेफ और पीरामल फाउंडेशन जैसे संगठन के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया.

12 लाख बच्चों तक पहुंच रही सामग्री

जेइपीसी के डॉ अभिनव कुमार ने DIGI SATH के पहले से अवगत कराया. उन्होंने बताया कि विभागीय बैठक, बीसीजी और पीरामल फाउंडेशन जैसी साझेदार एजेंसियों के साथ विमर्श किया. इसके बाद डीजी साथ लांच किया गया. इसमें एंड्रॉइड मोबाइल से बच्चों को डिजिटल सामग्री भेजी जा रही है. इससे 12 लाख बच्चों तक शैक्षिक सामग्री पहुंच रही है. दूरदर्शन पर भी प्रसारण हो रहा है. इसका सीधा लाभ बच्चों को मिल रहा है.

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बच्चों को केंद्रित कर बन रही शैक्षिक सामग्री

जेसीइआरटी के प्रमुख कीर्तिवास ने कहा कि ग्रेड और क्लास वाइस स्टडी मैटेरियल तैयार किया जा रहा है. हमारा प्रयास है कि यह बाल केंद्रित और दिलचस्प हो. जेसीइआरटी ने दीर्घकालिक आधार पर सामग्री भेजने के लिए एसआरजी सूची तैर की गयी है. इसके साथ ही बीसीजी निदेशक सीमा बंसल ने बताया कि हर दिन डिजिटल कंटेंट से हर दिन 3.25 लाख बच्चों को लाभ मिल रहा है.  सोमवार से शुक्रवार तक पढ़ाई करायी जा रही है. साप्ताहिक क्विज कराया जा रहा है. पिछले सप्ताह 40 हजार बच्चे क्वीज में शामिल हुए. उन्होंने आनेवाले दिनों में दीक्षा और शिक्षक एप डेवलप करने की बात कही.

यूनिसेफ की पारुल शर्मा ने करियर पोर्टल पर चर्चा की. उन्होंने सरकारी स्कूल के बच्चों को मिलने वाले अवसरों और परामर्श बेहतरीन बताया. साथ ही शिक्षकों से करियर के अवसरों की खोज में बच्चों की मदद करने का आग्रह किया.

पीरामल फाउंडेशन के पल्लव ने DIGI SATH के सकारात्मक प्रभाव के बारे बताया. उन्होंने स्पष्ट कहा कि DIGI SATH  बच्चों को पढ़ाने के साथ माता-पिता के बीच जागरूकता की भावना विकसित कर रहा है.कार्यक्रम के अंत में शिक्षकों के सवालों के जवाब दिये गये.

शिक्षकों के सवाल और परियोजना निदेशक के जवाब

सवाल : संस्कृत के लिए सामग्री DIGI SATH के माध्यम से प्रदान नहीं की जा रही है?

जवाब: जेसीईआरटी को इस पर ध्यान देने को कहा गया है. संस्कृत के लिए भी सामग्री प्रदान जल्द की जायेगी.

सवाल : सभी स्थानीय केबल नेटवर्क टेलीविजन पर सामग्री उपलब्ध नहीं है?

जवाब : यह मामला सभी डीसी को लिखा गया है. वे इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे.  डीसी के साथ इस पर निगरानी रखेंगे.

सवाल : स्कूलों को कोरेनटाइन सेंटर बनाया गया है.  तालाबंदी के बाद स्कूल कैसे काम करेंगे?

जवाब : बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत स्कूल रीओपनिंग गाइडलाइन जारी किया गया है.

सवाल : क्या करियर पोर्टल का लिंक दैनिक रूप से साझा की गई सामग्री में शामिल किया जायेगा?

जवाब : हां, इस विकल्प का पता लगाया जा सकता है.

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