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राज्य की 65% महिलाओं और 45% कुपोषित बच्चों के लिए चलेगी ‘दीदीबाड़ी’ योजना, JSLPS और मनरेगा के जिम्मे होगा क्रियान्वयन का जिम्मा

Ranchi : राज्य में कुपोषण अब भी एक बड़ा सवाल है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में 65.2 फीसदी महिलाएं कुपोषण की शिकार हैं जबकि 45.3% बच्चे इस कैटेगरी में हैं. ये वैसे बच्चे हैं जिनकी उम्र 5 साल से कम है. कोविड-19 के कारण लोगों को पैसों की तंगी और सेहत संबंधी सवालों से भी जूझना पड़ रहा है. रोजगार के लिहाज से राज्य सरकार ने मनरेगा प्रोग्राम पर जोर दिया था. लोगों के लिए पोषण की जरूरतों को पूरा करने के लिए ग्रामीण विकास विभाग ने ‘दीदीबाड़ी’ योजना शुरू करने की योजना बनायी है.

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6 माह में 5 लाख परिवारों तक पहुंचने का लक्ष्य

कुपोषण से मुक्ति को मनरेगा से दीदीबाड़ी योजना के तहत 5 लाख परिवारों को 6 माह में जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है. जेएसएसपीएस (राज्य आजीविका मिशन) और मनरेगा के जरिये इसका क्रियान्वयन किया जायेगा. योजना के संचालन के लिए सभी डीसी औऱ डीडीसी को विभाग की ओर से लेटर भेजा गया है. शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हुई बैठक में भी उन्हें विभागीय सचिव आराधना पटनायक ने जरूरी निर्देश दिये हैं.

मनरेगा से डेढ़ करोड़ मानव दिवस सृजित करने का प्लान

ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम ने मनरेगा योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने को कहा है. उनके मुताबिक अभी राज्य में कुल 5,59,305 योजनाओं पर काम शुरू किया गया है. इन योजनाओं को विशेष कार्य योजना बना कर पूरा किया जाये. साथ ही 22 अक्टूबर तक डेढ़ करोड़ मानव दिवस सृजित किये जाने का टारगेट पूरा करने को कहा है.

आंगनबाड़ी सेंटर और स्कूलों में लगे हैं ताले

कोरोना संकट के कारण राज्यभर में सभी आंगनबाड़ी सेंटर और स्कूल बंद हैं. इसके जरिये बच्चों को भोजन और शिक्षा, दोनों मिल रही थी. आंगनबाड़ी सेंटर और स्कूल कब तक खुलेंगे, इसे लेकर अनिश्चितता का दौर जारी है. कोरोना के खतरे को कम करने को जरूरी है कि लोगों की इम्युनिटी अच्छी रहे, उन्हें भरपूर पोषण मिले. इसे देखते हुए दीदीबाड़ी योजना को लागू करने पर ग्रामीण विकास विभाग का जोर है.

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क्या है दीदीबाड़ी योजना

लोग अपने घरों के आसपास की जमीन पर (बाड़ी यानी घर के आसपास की जमीन) परिवार की जरूरतों के मुताबिक सब्जी, पपीता, केला औऱ दूसरे पौधे लगायेंगे. जिनके पास जमीन नहीं होगी, वैसे 2 से 5 लोगों का समूह ग्राम सभा की सहमति से सार्वजनिक जमीन पर इसे लगा सकेगा.

किन परिवारों को मिलेगी प्राथमिकता

मनरेगा योजना के लाभुक इस योजना का लाभ उठा सकते हैं. उसके अलावा एससी, एसटी, पीवीटीजी, बीपीएल, ऐसा परिवार जिसका प्रमुख दिव्यांग हो औऱ अन्य लोग. लाभुकों के चयन में एसएचजी की प्रमुख भूमिका होगी. लाभुकों की 30 डिसमिल योजना के लिए दो दीदीबाड़ी सखी की मदद ली जायेगी. इनसे सालभर में 100 दिनों का काम (मानव दिवस) लिया जायेगा. इसका काम ग्रामीणों और मेट को पोषण के महत्व पर ट्रेंड करना होगा. साथ ही पौधे लगाने और उसकी देखभाल संबंधी कामों में मदद करने का होगा.

जेएसएलपीएस देगा ट्रेनिंग

सब्जी बीज, पपीता औऱ दूसरे पौधों पर होने वाला खर्च जेएसलपीएस वहन करेगा. साथ ही वह इसके लिए दीदीबाड़ी सखियों को ट्रेनिंग देगा. इसका खर्चा भी उसी के जिम्मे होगा.

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