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व्यापारियों के सहयोग से चल रहे दीदी किचन, फिर भी अनदेखी, फंड नहीं है तो हम देने को तैयार: चेंबर

  • एक बार में क्या नहीं करना है ये दिशा निर्देश जारी करे राज्य सरकार
  • ई कॉमर्स का विरोधी नहीं चेंबर, वर्तमान समय में छोटे व्यापारियों के हित के लिए ईकॉमर्स का बंद होना जरूरी

Ranchi: राज्य में चल रहे दीदी किचन तक व्यापारियों के सहयोग से चल रहे हैं. सरकार टाल-मटोल कर काम कर रही है. पूर्व चेंबर अध्यक्ष दीपक कुमार मारू ने ये बातें शुक्रवार को प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहीं.

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार असंवेदनशील हो गयी है. राज्य के आला अधिकारी समझते हैं कि उन्हें ही सारी बातों की समझ है. जबकि ऐसे समय में हर वर्ग के साथ वार्ता कर निर्देश जारी किये जाने चाहिए.

व्यवसाय जगत की समस्या या फिलहाल कपड़ा व्यवसायियों की समस्या के लिए ही जिला से लेकर सीएस तक के चक्कर लगाये गये. कोई भी पार्टी को नहीं छोड़ा गया. मंत्री रामेश्वर उरांव ने कई आश्वासन दिये. इसके बाद अब जाकर ये व्यवसाय खोले गये. जबकि पहले ही इनके ईद, गर्मी का स्टॉक खत्म हो चुका है.

जहां भी चेंबर जाती है, कहा जाता है फंड नहीं है. जब व्यवसायी फंड देने को तैयार हैं तब तो सरकार को लेना चाहिए. जब लॉकडाउन के दौरान राज्य सरकार को पास कोई योजना नहीं थी, तब व्यापारियो ने ही कमान संभाली.

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क्या नहीं करना है ये निर्देश दें राज्य सरकार

चेंबर अध्यक्ष कुणाल आजमानी ने कहा कि राज्य सरकार एक बार में दिशा-निर्देश जारी करे कि कौन-कौन से सेक्टर नहीं खुलेंगे. एक-एक कर निर्देश देने से व्यापारियों और आम जनता में काफी असंतोष है.

केंद्र के आठ जून के बाद से जारी गाइडलाइन को देखें तो जानकारी होगी कि सरकार क्या नहीं करना है ये बता रही है. इस दिशा में अब राज्य सरकार को भी आगे बढ़ना चाहिए.

उन्होंने कहा कि काफी समय के बाद सरकार ने कपड़ा और जूता दुकानें खोलने की अनुमति दी जिसका स्वागत किया जाता है. लेकिन अभी भी कई ऐसे सेक्टर हैं जो नहीं खुले हैं. ऐसे में सरकार को नहीं करने वाली चीजों की सूची जारी करनी चाहिए.

कुणाल ने कहा कि लगातार बातें सामने आ रही है कि चेंबर की ओर से ई कॉमर्स का विरोध किया जा रहा है. जबकि विरोध जैसी कोई बात नहीं. लॉकडाउन के शुरूआती दिन से ही बड़े-छोटे सभी व्यापारी जनहित कार्यों में जुड़े हैं. ऐसे में अब जब चीजें सामान्य हो रही हैं तो इन्हें लाभ मिलना चाहिए.

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होटल व्यवसाय में 150 करोड़ तक का करोबार प्रभावित

होटल व्यवसाय से जुड़े चिरंजीवी ने बताया कि तीन महीने में होटल व्यवसाय में 150 करोड़ तक का नुकसान हुआ. अभी भी होटल व्यवसाय बंद है. सिर्फ रांची जिला में लगभग 250 होटल-रेस्तरां हैं.

उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि जितने भी बुकिंग थे, पहले ही कैंसल हो चुके हैं. सरकार अब भी नहीं मानी तो इन व्यवसायियों की स्थिति खराब हो जायेगी. जो बचेंगे उन्हें वापस अपनी स्थिति में आने में छह महीने लगेंगे. ऐसे में कम से कम कमरों को चालू किया जाये. व्यवसायी खुद सुरक्षा का ध्यान रखेंगे.

बस व्यवसायियों का छह महीने का कर्ज माफ करें सरकार

अरूण बुधिया ने कहा कि राज्य सरकार को मजदूरों को लाने में बस एसोसिएशन ने काफी मदद की. अन्य राज्यों की तुलना में कम दर में एसोसिएशन ने मजदूरों को लाने का काम किया. इसके बाद भी सरकार इन पहलूओं पर ध्यान नहीं दे रही.

राज्य में दस हजार बसे हैं जो एसोसिएशन से जुड़ी हैं. इसमें से 3500 बसें स्कूलों में चलती हैं जिनकी स्थिति पहले से ही खराब है. देवघर में आयोजित होने वाले श्रावण मेले से कोई उम्मीद तो नहीं है. कम से कम सरकार बस व्यवसायियों के छह महीने का कर्ज माफ करे. साथ ही जल्द से जल्द बस चलाने की अनुमति दे.

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