Opinion

विधानसभा भवन का उद्घाटन करा क्या पीएम मोदी को रघुवर दास ने धोखा दिया?

Faisal Anurag

वायदा निभाने की जल्दबाजी में रघुवर दास ने नरेंद्र मोदी को भी धोखा दे दिया. मामला झारखंड विधान सभा के नए भवन का है. इस भवन को लेकर रघुवर दास सरकार यह बताने का प्रयास करती रही कि उसने किस तरह तय समय के भीतर लक्ष्य हासिल कर लिया.

हुआ यह कि विधानसभा चुनाव के निकट आते ही योजनाओं को पूरा दिखाने की ताबड़तोड़ कोशिश ने तमाम प्रक्रियाओं को नजरअंदाज कर दिया. 12 सितंबर को पीएम मोदी, झारखंड में 465 करोड़ की लागत से बनने वाले नए विधानसभा भवन का उद्घाटन करते हैं. भव्य आयोजन होता है.

इसे भी पढ़ेंःजम्मू-कश्मीर: लश्कर का आतंकवादी गिरफ्तार, आठ मामलों में था वांटेड

चार दिसंबर को विधानसभा भवन के एक हिस्से में आग लग जाती है. भवन को बनाने वाली कंपनी रामकृपाल कंस्ट्रक्शन दावा करती है कि 15 दिनों को अंदर आग लगने से हुई क्षति पूर्ति कर ली जाएगी.

उम्मीद जतायी जा रही थी कि नई सरकार का पहला विधानसभा सत्र नए भवन में होगा. लेकिन अफसोस ऐसा नहीं हो पा रहा है. न्यूज विंग जब इन सभी बातों की पड़ताल करता है तो पता चलता है कि उद्घाटन के 104 दिनों के बाद भी आरके कंस्ट्रक्शन ने नए विधानसभा भवन को भवन निर्माण विभाग को नहीं सौंपा है. अब जब विधानसभा के नये भवन को भवन निर्माण विभाग को सौंपा ही नहीं गया है तो कैसे भवन निर्माण विभाग भवन को विधानसभा सचिवालय को सौंपे.

ऐसे में अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या आचार संहिता लगने से पहले पीएम मोदी से एक ऐसे भवन का उद्घाटन करवा देना जो अभी तक पूरा भी नहीं था एक धोखा नहीं है. सवाल यह भी कि क्या एक विधानसभा भवन जिसपर अधिकारिक तौर पर विधानसभा सचिवालय का अधिकार ही नहीं है, वहां रघुवर सरकार की तरफ से एक दिन का सत्र बुलाना संवैधानिक और कानूनी तौर पर गलत नहीं है.

इसे भी पढ़ेंःPAK में ननकाना साहिब गुरुद्वारे पर हमला, पाकिस्तान सरकार जिम्मेदार: कांग्रेस

झारखंड में विधानसभा की नयी भव्य इमारत होने के बाद भी पांचवें विधानसभा का पहला सत्र पुराने विधानसभा भवन में ही बुलाया गया है. इसके पीछे की वजह यह है कि नये विधानसभा भवन में काम पूरा नहीं हुआ है और ना ही भवन को सरकार को सौंपा गया है.

भवन निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता राजीव कुमार ने बताया कि विधानसभा के नये भवन की टेस्टिंग और कमीशनिंग की प्रक्रिया चल रही है, जिसके बाद ही भवन को सरकार को सौंपा जा सकेगा.

मतलब साफ है कि भवन अभी तक कंस्ट्रक्शन कंपनी के पास ही है और सौंपा जाना बाकी है. वहीं विधानसभा के सचिव महेंद्र प्रसाद ने बताया कि विधानसभा का भवन अब तक विधानसभा को सौंपा नहीं गया है इसलिए सत्र पुराने भवन में ही चलेगा.

रघुवर दास की सरकार ने विधानसभा का स्पेशल सत्र नये परिसर में बुलाया था जिसके बाद यह लग रहा था कि अब नयी सरकार की सभी कार्यवाही नये विधानसभा परिसर में ही पूरी की जायेगी.

जब विशेष सत्र बुलाया गया था, उस वक्त भी तत्कालीन सरकार में विपक्ष की भूमिका में रहे झामुमो के विधायकों ने सत्र में भाग नहीं लिया था. नयी सरकार की पहली कैबिनेट में 6 से 8 जनवरी तक सत्र बुलाने का निर्णय लिया गया है. उस वक्त भी किसी को यह नहीं लगा कि पुराने विधानसभा में यह सत्र चलेगा.

इस तरह की हड़बड़ी दिखा कर भी रघुवर सरकार न तो सत्ता में वापसी कर सकी और न ही तथ्यों को प्रकाश में आने से रोक सकी. अब चर्चा हो रही है कि चुनाव से पहले जिन योजनाओं का उद्घाटन किया गया, क्या वे सचमुच पूरे हुए थे या नहीं.

इस तरह की चर्चा का होना अस्वाभाविक भी नहीं है. जब कोई सरकार केवल क्षणिक राजनीतिक लाभ के लिए कोई जल्दबाजी दिखाती है उसका पर्दाफाश देर सवेर होना लाजिम ही है.

इसे भी पढ़ेंः#KotaTragedy: 105 नवजात की मौत पर राजस्थान सरकार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का नोटिस

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button