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तो क्या रघुवर दास और राजबाला वर्मा ने 35 लाख लोगों को तीन साल तक भूखे रखने का पाप किया

Surjit Singh

वर्ष 2014 के दिसंबर से लेकर दिसंबर 2019 तक झारखंड में रघुवर की सरकार थी. उसके मुखिया कहते थेः बहुमत की सरकार, जीरो टॉलरेंस की सरकार, गरीबों की सरकार, मजदूरों की सरकार. यह एक तथ्य है. पर, क्या यह सच है ? बहुत कम लोग इससे सहमत होंगे.

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27 मार्च 2017- तत्कालीन मुख्य सचिव राजबाला वर्मा एक बैठक करती हैं. जिलों के डीसी को निर्देश देती हैं- जिन बीपीएल कार्डधारियों का राशन कार्ड आधार नंबर से लिंक नहीं है, उनका राशन कार्ड रद्द कर दिया जाये. यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करता था.

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जे पॉल नामक संस्था की एक रिपोर्ट आयी है. इसमें कहा गया है वर्ष 2017 में झारखंड सरकार ने जो राशन कार्ड रद्द किये, उनमें से 90 प्रतिशत राशन कार्ड वैध थे.

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इस पर रघुवर सरकार में मंत्री रहे सरयू राय ने ट्वीट कर कहा है- 11.30 लाख कार्ड रद्द करने को शासन के 1000 दिन की उपलब्धि बताने, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विरुद्ध आधारविहीन कार्ड रद्द करने का आदेश देने और मंत्री के आदेश को अनसुना करने वाले पूर्व मुख्य व अन्य पर हेमंत सोरेन सरकार कार्रवाई करें. इन पर आपराधिक मुकदमा बनता है, इससे सरकार की साख बढ़ेगी.

जिस वक्त इतनी बड़ी संख्या में राशन कार्ड रद्द किये गये, उस वक्त झारखंड में राशन कार्डधारियों की संख्या करीब 64 लाख थी. एक झटके में 6.96 लाख राशन कार्ड रद्द कर दिये गये. बिना किसी जांच पड़ताल के. शुरु में सरकार ने अपनी 1000 दिन की उपलब्धि में रद्द राशन कार्ड की संख्या 11.64 लाख बतायी थी. बाद में इसे दुरुस्त कर 6.96 लाख बताया गया.

वर्तमान में राशन कार्डधारियों की संख्या 57.17 लाख है. सरकारी आंकड़े के मुताबिक, 2.63 करोड़ लोगों को राशन दिया जाता है. मतलब एक राशन कार्ड में औसतन एक परिवार के पांच सदस्यों को भोजन मिलता है. इस तरह जिन 6.96 परिवारों का राशन कार्ड रद्द किया गया था, उनमें करीब 35 लाख सदस्य थे.

इस तरह तत्कालीन सीएम रघुवर दास औऱ तत्कालीन मुख्य सचिव की जिद ने 6.96 लाख परिवार के 35 लाख लोगों को भोजन के अधिकार से वंचित कर दिया. कहा जा सकता है, इन दोनों ने 35 लाख लोगों को भूखे रखने का पाप किया. लोक कल्याणकारी सरकार में एक व्यक्ति का भूखा रह जाना भी पाप है. यहां तो 35 लाख लोगों को भूख से जूझना पड़ा.

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इसी तीन साल के दौरान झारखंड में 19 लोगों की मौत कथित रुप से भूख जनित बीमारी की वजह से हो गई. क्या रघुवर दास औऱ राजबाला वर्मा उन मौतों के लिये कभी जिम्मेदारी लेंगे. क्या उन्हें रातों में चैन की नींद आती होगी. और क्या उन मौतों के लिये जिम्मेदार नेताओं व अफसरों के खिलाफ कभी कोई सरकार कार्रवाई करने की हिम्मत जुटा पायेगी.

गलती किसी भी इंसान से हो सकती है. पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास औऱ पूर्व मुख्य सचिव राजबाला वर्मा भी इंसान ही हैं. पर, गलती और जानबूझ कर की गई गलती में फर्क होता है. गलती के लिये माफी दी जा सकती है, पर जानबूझ कर की गई गलती के लिये सजा से कम किसी को स्वीकार्य नहीं होता.

रघुवर दास औऱ राजबाला वर्मा के निर्देश पर 6.96 लाख राशन कार्ड रद्द किये गये थे. यह एक गलती हो सकती है. पर, यहां ऐसा नहीं है. राशन कार्ड रद्द करने से पहले तत्कालीन मंत्री सरयू राय ने आपत्ति दर्ज की थी. मुख्य सचिव के आदेश को निरस्त कर दिया. पर, तत्कालीन मुख्यमंत्री ने मंत्री के आदेश को पलट दिया और कार्ड रद्द कर दिये गये.

इससे साफ है कि कार्ड रद्द करने की कार्रवाई जानबूझ कर औऱ नियमों के खिलाफ की गयी. क्योंकि रघुवर सरकार को उपलब्धि दिखानी थी. मतलब रघुवर दास और राजबाला वर्मा ने जानबूझ कर यह काम किया.

जिसका परिणाम यह निकला कि 6.96 लाख परिवारों के 35 लाख लोगों को भूख से जूझना पड़ा और उनमें से 19 लोगों की मौत कथित रुप से भूख जनित बीमारी से हो गई. तो क्या यह सोचा-समझा अपराध नहीं है. अगर है, तो क्या हेमंत सरकार इसके जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करेगी. जैसा कि सरयू राय ने अपने ट्वीट में कहा है, इससे सरकार की साख बढ़ेगी.

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