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विधानसभा चुनाव के दौरान क्या चुनाव आयोग ने अपनी भूमिका पूरी तरह निभायी ?

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Akshay Kumar Jha

Ranchi: झारखंड में चुनाव प्रचार का शोर थम चुका है. 20 को आखिरी और पांचवे चरण के मतदान के बाद 23 तारीख को मतगणना होना है. लगातार करीब दो महीने के आचार संहिता के दौरान चुनाव आयोग की भूमिका कैसी रही?

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आयोग की टीम ने क्या तय कायदे कानून के तहत अपनी जवाबदेही निभायी? इन बातों को बल कुछ बयानों और कुछ कार्यवाही के बाद मिल रहा है. ऐसे कुछ मामले सामने आये हैं, जिसके बाद सवाल उठने शुरू हो गये हैं. जानते हैं कौन से हैं वो मामले.

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पढ़ें किसने क्या दिया बयान

छह दिसंबर को रघुवर दास अपने विधानसभा क्षेत्र में मतदान के एक दिन पहले एक बाइक रैली निकालते हैं. जो कि आचार संहिता का सीधे तौर पर उल्लंघन है. चुनाव आयोग इसपर संज्ञान लेते हुए रघुवर दास को शो कॉज करते हैं.

शो कॉज के जवाब में रघुवर दास कहते हैं कि उनकी तरफ से किसी तरह की कोई रैली नहीं निकाली गयी थी. बल्कि वो डोर टू डोर कैंपेन कर रहे थे और उनके साथ लोग जुटते गए, जो बाइक पर थे.

लेकिन वीडियो में साफ तौर से देखा जा सकता है कि रघुवर दास कभी स्कूटी तो कभी बुलेट पर कई बाइक वालों के साथ रैली में शामिल थे. कार्रवाई के नाम आयोग की तरफ से जांच की बात कही जा रही है.

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15 दिसंबर को पीएम मोदी संथाल में दुमका में चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सीएए को लेकर कौन दंगा फैला रहा है, यह उनके कपड़ों से पहचाना जा सकता है. साफ तौर पर यह बयान धर्म विशेष को लेकर था. जिसकी इजाजत आचार संहिता के दौरान नहीं दी गयी है.

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17 दिसंबर को संथाल के जामताड़ा में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि अगर कोई इरफान अंसारी जीतेगा, तो फिर राम मंदिर कैसे बनेगा. राम मंदिर बनाने के लिए किसी बिरेंद्र मंडल को जीताना होगा.

जाहिर तौर पर यह बयान धर्म विशेष से जुड़ा हुआ है. योगी आदित्यनाथ का यह बयान मीडिया की सुर्खियां भी बना. क्या ऐसे बयान पर चुनाव आयोग को संज्ञान नहीं लेना चाहिए था.

18 दिसंबर को जामताड़ा में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मंच से ही हेमंत सोरेन को गाली दी. कहा कि ये कांग्रेस पूरे देश को अपना जागीर समझती है और इसी तरह हेमंत सोरेन सा.. पूरे झारखंड को… सॉरी… अपने बाप की जागीर समझता है.

ऐसा शायद पहली बार झारखंड के चुनाव में हुआ, जब कोई मुख्यमंत्री खुले मंच से विपक्षी दल के नेता को गाली दे रहा हो. ऐसे में चुनाव आयोग को इस बात पर संज्ञान नहीं लेना चाहिए.

18 दिसंबर को ही पाकुड़ में सभा को संबोधित करते हुए हेमंत सोरेन ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के सामने कहा कि ये वो लोग हैं, बीजेपी के लोग.. जो शादी कम करते हैं, लेकिन गेरुआ वस्त्र पहनकर बहु बेटियों का इज्जत लूटने का काम करते हैं.

हालांकि इसकी शिकायत बीजेपी ने चुनाव आयोग से की है. लेकिन खबर लिखे जाने तक आयोग की तरफ से किसी तरह की कार्रवाई की खबर नहीं थी.

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