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#Dhullu तेरे कारण : रघुवर राज में बाघमारा में बढ़ी विधायक ढुल्लू महतो की मनमानी, एफआइआर करने से भी परहेज करती रही पुलिस

Kumar Kamesh

Dhanbad : लंबे समय से फरार चल रहे बाघमारा के भाजपा विधायक ढुल्लू महतो ने सोमवार को कोर्ट में सरेंडर कर दिया है. रंगदारी और गोली चलाने के मामले में विधायक ढुल्लू महतो ने न्यायालय में समर्पण किया. ऐसे में लोगों के बीच यह सवाल भी उठने लगा है कि आखिर अन्य मामलों में विधायक ढुल्लू महतो के खिलाफ कार्रवाई कब की जायेगी.

विधायक कई मामलों में आरोपी हैं. उन पर कई संगीन आरोप भी हैं. ये सभी मामले रघुवर राज और उससे पहले के हैं. हमने विधायक ढुल्लू पर लगे आरोपों की सूची जुटायी तो यह बात भी सामने आयी कि रघुवर राज में उनकी मनमानी न सिर्फ जारी रही, बल्कि सरकार की उदासीनता के कारण विधायक को मनमर्जी करने का सुनहरा अवसर भी मिलता रहा. नीचे दिये गये केस स्टडी के जरिये हमने यह समझने की कोशिश की है कि कैसे रघुवर राज में ढुल्लू महतो कानून के फंदे से बचते रहे.

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केस स्टडी - 1

पूर्व भाजपा नेत्री सह वर्तमान में कांग्रेस नेत्री ढुल्लू महतो के खिलाफ कतरास थाना में यौन शोषण का मामला दर्ज करने के लिए कई बार चक्कर काटती रहीं. उन्होंने इसके लिए ऑनलाइन आवेदन भी किया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. इसके बाद उन्होंने कतरास थाने में आत्मदाह करने का प्रयास किया. पुलिसवालों ने उन्हें आत्मदाह करने से रोक तो लिया लेकिन उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गयी. आखिरकार इस मामले में झारखंड हाइकोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा. हाइकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ढुल्लू महतो के खिलाफ कतरास थाने में प्राथमिकी दर्ज की गयी.

केस स्टडी - 2

बरोरा थाना के पूर्व प्रभारी आरएन चौधरी ने बरोरा थाना क्षेत्र के राजेश गुप्ता पर अदालत से जारी हुए  वारंट पर उनके घर पर छापेमारी की. पुलिस राजेश गुप्ता को गिरफ्तार कर थाना लौट रही थी, तभी विधायक ढुल्लू अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंच गये. उन्होंने इस दौरान पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की और राजेश को पुलिस की गिरफ्त से छुड़ा कर अपने साथ ले गये. इस दौरान उन्होंने बरोरा के पूर्व थाना प्रभारी आरएन चौधरी की वर्दी भी फाड़ दी. इस मामले में 12 मई 2013 को मामला दर्ज किया गया था. न्यायालय ने इस मामले में हालांकि 18 माह की सजा सुनायी है. फिलहाल वे इस मामले में 11 माह की सजा काट चुके हैं. इस मामले में भी तत्कालीन रघुवर सरकार ने ढुल्लू महतो को बचाने की पूरी कोशिश की. सरकार ने इस मामले में केस वापस लेने का आदेश भी दे दिया था.

केस स्टडी - 3

वर्ष 2016 में श्रेया फाइनेंस, कोलकाता द्वारा धनबाद में काम कर रही कंपनी एयर डेक्कन को 42 पोकलेन एवं ड्रिल मशीन के लिए फाइनेंस किया था. इस कंपनी द्वारा फाइनेंस की किस्त भुगतान नहीं किये जाने के कारण फाइनेंस कंपनी ने सभी मशीनों की नीलामी कर दी थी. मुज्जफरपुर के इरशाद ने 33 लाख रुपये का भुगतान कर सभी गाड़ियां खरीदीं. इरशाद को गाड़ी मुराईडीह एरीया-1 से ले जाने का आदेश प्राप्त हुआ. मार्च 2016 में जब इरशाद अपने चार कर्मचारियों के साथ गाड़ियों को प्राप्त करने के लिए मुराईडीह एरिया नंबर 1 बरोरा आया और गाड़ियों को मुरारी से ले जाने का प्रयास किया तो बाघमारा विधायक ढुल्लू महतो, कपिल राणा और उनके बॉडीगार्ड केदार यादव, सिकंदर चौहान, धर्मेंद्र गुप्ता एवं 8-10 लोग हरवे हथियार से लैस होकर आये और धमकी देते हुए रंगदारी की मांग की. जान से मारने की धमकी देते हुए विधायक ने 40 लाख रुपये अपने लड़कों के लिए और अपने लिए 15 लाख रुपये रंगदारी की मांग की. रंगदारी की रकम का भुगतान करने से इंकार करने पर विधायक ढुल्लू महतो व अन्य लोगों ने गाली-गलौज और मारपीट भी की. इस मामले में इरशाद बरोरा थाने मामला दर्ज कराने गये लेकिन उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गयी. तब रघुवर राज था और थाना प्रभारी जानते थे कि रघुवर राज में विधायक ढुल्लू से पंगा लेना उन्हें महंगा पड़ सकता है. आखिरकार मार्च 2020 में इस मामले की प्राथमिकी दर्ज की गयी. इस मामले में विधायक ढुल्लू के खिलाफ कोर्ट ने अरेस्ट वारंट जारी किया. सोमवार को इसी मामले में विधायक ढुल्लू महतो ने न्यायालय में समर्पण किया है.

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केस स्टडी - 4

ओरिएंटल स्ट्रक्चरल इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजर मुकेश चंदानी को धनबाद परिसदन बुला कर धमकी देने के मामले में धनबाद थाने में बाघमारा के विधायक ढुल्लू महतो के खिलाफ धमकी तथा रंगदारी मांगने का मुकदमा दर्ज किया गया था. पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर बाघमारा डीएसपी की जांच रिपोर्ट पर प्राथमिकी दर्ज हुई थी. यह मामला काफी दिनों से लंबित था. कंपनी प्रबंधन ने जिला पुलिस प्रशासन के साथ-साथ घटना की शिकायत राज्य तथा केंद्र सरकार से भी की थी. लेकिन रघुवर सरकार के कार्यकाल के दौरान कोई कार्रवाई विधायक के खिलाफ नहीं हुई. इस मामले में भी सरकार बदलने के बाद ही मामला दर्ज किया गया.

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केस स्टडी - 5

अगर गलती से भी कोई ढुल्लू महतो के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया या फिर उनके किसी समर्थक को गिरफ्तार कर लिया तो विधायक उस पुलिस अधिकारी पर दबाव बनाने लगते थे. वे पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की करने और वर्दी फाड़ने को लेकर भी चर्चा में रहे हैं. 15 सितंबर 2010 को उन्होंने कतरास थाना के एएसआइ अरुण शर्मा के साथ धक्का-मुक्की की थी. जिसके बाद सैमुएल लिंडा के द्वारा ढुल्लू के खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया था. इस मामले में भी सैमुएल लिंडा पर केस हल्का करने का दबाव बाघमारा विधायक ने बनाया था. बाद में इस मामले में भी लगभग एक साल तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. 2011 में इस मामले में चार्जशीट सौंपा गया लेकिन सरकार के दबाव और अनुसंधानकर्ता के तबादले के बाद यह मामला कमजोर पड़ता गया.

केस स्टडी - 6

2017 से 2019 के दौरान कोयला कारोबारी  शेर बहादुर ने कोयले के उठाव के लिए चार बार डीओ भरा था लेकिन एक छटांक कोयला नहीं उठ सका था. 2018 में 36 दिनों तक डंप में लदाई स्थल पर उनका एक ट्रक खड़ा रह गया था. लगातार पुलिस के वरीय अधिकारी के साथ-साथ राज्य के मुख्यमंत्री तक से गुहार लगाने के बाद भी कोई करवाई नहीं हुई. हालांकि  वैधता समाप्त होने के बाद ट्रक निकला लेकिन इंजन में चीनी मिला हुआ था.

केस स्टडी - 7

2017 में विनायक भंडार नामक फर्म ने डीओ भरा था. लेकिन ढुल्लू द्वारा रंगदारी मांगी गयी, जिस कारण वे ट्रक लोड नहीं करा सके. इस फर्म के मैनेजर ने इसकी शिकायत स्थानीय पुलिस से की लेकिन विधायक के खिलाफ प्राथमिकी नहीं हुई.

केस स्टडी - 8

बरोरा थाना क्षेत्र की दरदा पंचायत में आदिवासियों की जमीन पर जबरन बाउंड्री खडा़ कर कब्जा कर लेने के बाद आदिवासियों नें कई बार सूबे के तत्कालीन  मुख्यमंत्री रघुवर दास से गुहार लगायी थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई थी. हेमंत सरकार द्वारा न सिर्फ इस मामले को गंभीरता से लिया गया, बल्कि आदिवासियों को उनकी जमीन पर पुनः कब्जा भी दिला दिया गया.

केस स्टडी - 9

रांची  हाइकोर्ट में साल 2011 में एक जनहित याचिका दायर की गयी थी. जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि विधायक ढुल्लू महतो ने अपने और अपने करीबियों के नाम पर करोड़ों की संपत्ति खरीदी है. उसके बाद 2016 में हाइकोर्ट ने ईडी और आयकर विभाग को विधायक की संपत्ति व ब्योरे की प्रति देने का निर्देश दिया था. इस मामले में भी रघुवर सरकार द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जिस कारण अब भी यह मामला ठंडे बस्ते में है. इस मामले में ईडी द्वारा धनबाद पुलिस से जवाब मांगा गया था लेकिन कोई जवाब नहीं दिया गया. ईडी ने लगातार पत्र के माध्यम से विधायक के आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी मांगी थी लेकिन धनबाद पुलिस की ओर से कोई सहयोग नहीं मिला.

केस स्टडी - 10

रघुवर सरकार के कार्यकाल में विधायक ढुल्लू की दबंगई अपने चरम पर थी. कारण बाघमारा में बीसीसीएल के कई कोयला लोडिंग पॉइंट पर बिना  रंगदारी दिये कोयला ट्रकों की लोडिंग नहीं होती थी. एक अनुमान के अनुसार प्रति टन 1250 रुपये की वसूली की जाती थी. इसके साथ ही रघुवर के कार्यकाल में ढुल्लू सिंडिकेट की अनुमति के बगैर ई ऑक्शन में भाग लेनेवाले व्यापारियों के कोयले का उठाव नहीं होता था. यहां तक कि उसे पुलिस केस का सामना करना पड़ता था.

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