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#DhulluMahto : क्या सिस्टम और पुलिस-प्रशासन इस आरोप से मुक्त हो पायेगा कि वह गुलाम नहीं है

Surjit Singh

धनबाद, कोयलांचल की राजधानी. कतरास, बाघमारा और ढुल्लू महतो. पिछले पांच-सात सालों से यह नाम हमेशा सुर्खियों में रहा. कभी पुलिस पर हमला कर गिरफ्तार आरोपी को छुड़ाने के लिये. कभी जेल में रहते हुए इलाज के बहाने दिल्ली जाकर घूमने-फिरने के लिये.

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कभी कोयला ट्रांसपोर्ट कंपनी से रंगदारी मांगने के लिये. कभी यह बयान देने के लिये कि सीएम और पुलिस- प्रशासन हमारी जेब में है. वह पुलिस फोर्स की एस्कॉर्ट पार्टी के साथ घूमता था. ट्रांसपोर्टरों को धमकाता था औऱ वसूली करता था.

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यह सब हो रहा था धनबाद में. पुलिस चुप, डीसी मौन और सरकार खामोश. ना किसी एजेंसी की कोई रिपोर्ट, ना जिम्मेदार अफसरों की कोई टिप्पणी औऱ ना ही पुलिस-प्रशासन की कोई कार्रवाई. ऐसे, जैसे कि सबने ढुल्लू को गुंडागर्डी करने की मौन सहमति दे दी है.

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आखिर क्यों ढुल्लू महतो को सबकुछ करने की छूट मिली हुई थी. सत्ता औऱ सिस्टम में पावरफुल पद पर बैठे वो कौन लोग हैं, जो ढुल्लू महतो के हर गुनाह पर खामोश रहते रहे. कौन लोग हैं जो संरक्षक की भूमिका में थे. इन सवालों का जवाब जानते सब हैं, पर शायद ही कभी सरकार या पुलिस अधिकारिक रुप से कहने की हिम्मत जुटा पायेंगे.

राज्य में सत्ता बदलने के बाद 19 फरवरी को धनबाद पुलिस ने पहली बार ढुल्लू के घर पर छापामारी की. वह नहीं मिला. क्यों नहीं मिला. कैसे भाग गया. क्या उसे पुलिसिया कार्रवाई की सूचना पहले मिल गई थी. किसने दी थी.

क्या कार्रवाई करने वाली पुलिस को इस बात का अंदेशा नहीं था. अगर था तो पहले से जरुरी इंतजाम क्यों नहीं किये गये. धनबाद के लोग ये सवाल उठा रहे हैं.
यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या राज्य व जिला का पुलिस-प्रशासन इस आरोप से मुक्त हो पायेगा कि वह परिस्थितिवश मजबूर तो हो सकती है, पर गुलाम नहीं.

ऐसे वक्त में धनबाद पुलिस के लिये सबसे बड़ी चुनौती अपनी छवि को सुरक्षित रखने की है. पुलिस का इकबाल कायम करने की है. ढुल्लू को उसके सही जगह पर पहुंचा कर धनबाद पुलिस यह साबित कर सकती है. अगर पुलिस चाह जाये तो ढ़ुल्लू को पताल तक से ढूंढ कर उसे उसकी असली जगह पर पहुंचा सकती है. वह भी तय समय में.

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यह मौका सरकार और राज्य पुलिस के आला अफसरों के लिये भी है. पिछले पांच-छह सालों में जिस तरह लोगों का विश्वास कम हुआ है. उसे कायम करने का है. ट्रांसपोर्टरों, उद्योगपतियों का विश्वास वापस लाने का. अगर पुलिस यह नहीं कर पाती है, तो यही माना जायेगा कि ढुल्लू के आगे नतमस्तक रहने वाला सिस्टम औऱ पुलिस-प्रशासन आगे भी गुलामी करने को तैयार है.

सत्ता, सरकार, सिस्टम, अफसर सबके लिये यह जरुरी है कि वह जनता का विश्वास कायम करे. ढुल्लू महतो और उसके संरक्षकों को एक-एक कर खोज निकाले. याद रखिये ऐसा करके आप धनबाद और राज्य के लोगों के सामने हीरो बन जायेंगे. पर, इसके लिये अपने भीतर नैतिक साहस लाना होगा. पुलिस मुख्यालय, सीआइडी, स्पेशल ब्रांच में पदस्थापित अधिकांश अफसरों में इसकी कमी साफ दिखती है.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी अपने फैसलों से यह बताना होगा कि ढुल्लू महतो जैसे अपराधी के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने वाले अफसरों की जगह कहां है. हेमंत सोरेन से उम्मीद की जा रही है कि वह वैसे अफसरों को कार्रवाई की छूट देंगे, जो गलत को गलत औऱ सही को सही कहने का साहस रखते हैं.
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