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ढुल्लू महतो और रवींद्र पांडेय भाजपा के विधायक-सांसद नहीं होते, तो जाते जेल!

एफआईआर के सवाल पर बच रहे पुलिस अधिकारी

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Dhanbad: अगर ढुल्लू महतो सत्तारूढ़ दल के विधायक नहीं होते और रवींद्र पांडेय सत्तारूढ़ दल के सांसद नहीं होते तो महिलाओं द्वारा लगाये गये शारीरिक शोषण के मामले में क्या होता? कानून के जानकारों का कहना है कि इनको पुलिस बिना देर किये गिरफ्तार कर जेल भेज देती. ऐसा एक भी मामला नहीं है कि इस तरह के संज्ञेय मामले में पुलिस ने किसी को राहत दी हो. बता दें कि 23 नवंबर को विधायक ढुल्लू महतो के खिलाफ एक महिला ने ऑनलाइन शिकायत कर शारीरिक शोषण का आरोप लगाया था. इसके दूसरे दिन ही एक अन्य महिला ने गिरिडीह के सांसद रवींद्र पांडेय के खिलाफ शारीरिक शोषण करने की ऑनलाइन शिकायत दर्ज करायी. इन मामलों में अब तक एफआईआर भी दर्ज नहीं की गयी है. पूछने पर कतरास के थाना प्रभारी ने कहा कि इस मामले में कार्रवाई संबंधी कोई भी जानकारी के लिए वरीय अधिकारी से संपर्क करें. मामले पर संपर्क करने पर ग्रामीण एसपी अमन कुमार ने कहा कि दोनों मामले की जांच चल रही है. अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं की गयी है.

अधिवक्‍ता को ग्रिल काटकर गिरफ्तार किया

धनबाद के अधिवक्ता अश्विनी कुमार पर पुराना बाजार की एक युवती ने अश्लील हरकत करने का आरोप लगाया था. इस मामले में अधिवक्ता को गिरफ्तारी से बचाने के लिए अधिवक्ताओं ने हड़ताल की और राज्यव्यापी आंदोलन किया गया. अधिवक्ताओं की मांग थी कि मामले की ऊच्चस्तरीय जांच के बाद ही कोई कार्रवाई की जाये. पर पुलिस ने अधिवक्ताओं की एक न सुनी. आधी रात को गैस कटर से घर का ग्रिल काटकर अधिवक्ता को गिरफ्तार किया गया.

दो युवकों को दोबारा गिरफ्तार किया

इधर, एक भाजपा नेता दिलीप सिंह के बेटे और भतीजा को ऐसे ही एक संज्ञेय मामले में थाने से छोड़कर दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया. इसलिए कि मामला एक एएसआई से संबंधित था. ऐसा कोई भी उदाहरण नहीं मिलता जब पुलिस ने शारीरिक शोषण जैसे गंभीर आरोप में किसी आम आदमी पर रहम की हो. पुलिस सबसे पहले आरोपी को गिरफ्तार करती है तब आगे की कार्रवाई करती है.

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