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ढुल्लू ने जमा लिया कतरास की छठ पूजा की राजनीति पर कब्जा !

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Dhanbad : बाघमारा के विधायक ढुल्लू महतो पर कब्जा का आरोप नया नहीं है. इनके कब्जे से संबंधित मामला बीते कई सालों से न्यायालय और थाने तक पहुंचता रहा है. मीडिया पर भी ढुल्लू के कब्जे को लेकर खबरें और बहस चलती रही है. ऐसे मामलों के बाद भी ढुल्लू का प्रभाव और राजनीति की कोई तोड़ नहीं मिल रही है. विरोधी एकजुट होकर भी ढुल्लू की राजनीति का मुकाबला करने में असफल रहे हैं. अब महापर्व छठ की धूम है तो पूरे कतरास और आसपास के इलाके में ढुल्लू ही छा गये हैं. कतरास शहर में प्रवेश के साथ ही कतरी नदी है और इसके मुहाने पर बना भव्य सूर्य मंदिर है.

इस मंदिर में छठ के पहले से ढुल्लू का मंच बन जाता है. हर तरफ ढुल्लू व्रतियों का स्वागत करते बैनर, पोस्टरों में नजर आते हैं. वहीं ध्वनि विस्तारक से बार बार उन्हीं का नाम गूंजता है. इस बार भी छठ पर इसी तरह ढुल्लू के नाम की गूंज होगी, इसकी पूरी व्यवस्था कर ली गयी है. मौके पर हर बार की तरह बार बार यानी हर 10-5 मिनट में बताया जाएगा कि ढुल्लू ने यहां छठ व्रतियों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए क्या किया है. कौन सा घाट कितना खर्च से विधायक ढुल्लू महतो ने बनाया है. इनके लोगों के सामने क्या मजाल कोई कहे कि अमुक घाट पूर्व विधायक और मंत्री जलेश्वर महतो ने बनाया है या पूर्व विधायक ओपी लाल ने.

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कतरी किनारे के सूर्य मंदिर में पाॅलिटिक्स

पहले ऐसा नहीं था. कोई नेता सूर्य मंदिर के अंदर जाकर पाॅलिटिक्स नहीं करता था. अब तो ढुल्लू का मंच ही सूर्य मंदिर के अंदर बनता है. यह अलग बात है कि सूर्य मंदिर में भगवान भास्कर की संगमरमर की प्रतिमा पूर्व बियाडा अध्यक्ष विजय कुमार झा ने अपने खर्च से स्थापित करायी. इनके समधी प्राण प्रतिष्ठा यग्य के मुख्य यजमान बने. कहते हैं कि ढुल्लू के इशारे पर इन दोनों के नाम शिला पट्ट से हटा दिए गये. यग्य के लिए विजय झा ने 40 लाख रुपया चंदा उगाही की थी. उसमें से बची 7 लाख की राशि कमेटी के नाम पर जमा करवा दी गयी. अब इस मंदिर में भी ढुल्लू का हुक्म चल रहा है. यह उनकी राजनीति का केंद्र बन गया है. यह धर्म है कि राजनीति, इस पर बहस हो सकती है.

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