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धनबाद : टोटल फेल्योर एसएसपी चोथे पर मेहरबानी…क्या वजह हो सकती है

अपराधियों की इनके नाम से ही घिग्घी बंध जाती थी. इनका नुकीला जूता था खौफ का कारण.

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Ranjan jha

Dhanbad: अशोक चक्र रणधीर प्रसाद वर्मा  ने हीरापुर के बैंक ऑफ इंडिया में पंजाब के डकैतों से लड़ते हुए अपनी शहादत दे दी. लालकृष्ण आडवाणी के रामरथ को मुस्लिम बहुल वासेपुर से निकालना चुनौती थी. इस काम को आराम से कर दिखाया. अपराधियों को खुद रिवॉल्वर और अन्य हथियार के साथ ऐसे पकड़ते थे जैसे मुर्गी का चूजा हो.

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टीपी सिन्हा : हाईवे पर आतंक मचा रखे दस्युओं से खुद अपने ड्राइवर के साथ मुठभेड़ किया. सरगना को मार गिराया. एक दस्यु सुंदरी को  भी गिरफ्तार किया. अपराधियों की इनके नाम से ही घिग्घी बंध जाती थी. इनका नुकीला जूता था खौफ का कारण. बड़े-बड़े दादा इनके जूते की नोंक पर रहते थे.

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मैकू राम : इनका खौफ भी कम नहीं था. अपराधियों से खुद बेहतर ढंग से निपटने में माहिर थे. इनसे खास मुलाकात का दर्द पुरबा पछिया बहने पर अपराधियों को सताता था.

ऋत्विक रुद्रा : सबसे छोटा कार्यकाल था, इनका धनबाद एसपी के तौर पर. आते ही धनबाद के बड़े अपराधियों के खिलाफ अभियान छेड़ दिया था. धनबाद के तत्कालीन डीसी डॉ प्रदीप कुमार से भी उनका पंगा हुआ था.

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राजेश चंद्रा : कोयले की चोरी पर ऐसी रोक पहले किसी ने नहीं लगाई थी. इनकी सख्ती का खौफ ऐसा था कि मोटी रकम देकर जीटी रोड के थानों में पोस्टिंग करानेवाले पैरवी करके ट्रांसफर करवाने लगे थे. ताकि कहीं लेने के देने ना पड़ जाएं.

धनबाद में एसपी के पद पर ऐसे-ऐसे आईपीएस अफसरों के पदस्थापन की फेहरिस्त लंबी है. अनिल पाल्टा (वर्तमान में एडीजी), अब्दुल गनी मीर (वर्तमान में जम्मू कश्मीर में पदस्थापित हैं), सुमन गुप्ता (अभी रेल आईजी हैं) धनबाद में जो भी आये, वे सभी अपनी प्रशासनिक क्षमता और सख्ती के लिए जाने गये.

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कानून-व्यवस्था क्या चीज होती है, इन अफसरों ने धनबाद के लोगों को कड़ाई से समझाया था. और आलम उस दौर में यह था कि कोई चूं तक बोले. सिंह मेंशन और गैंग्स ऑफ वासेपुर के लोगों की भी हेकड़ी गुम हो गयी थी. ट्रैफिक जाम का तो सवाल ही नहीं था. दुर्गापूजा में भी ट्रैफिक कंट्रोल ऐसा कि लोगों को सहज यकीन नहीं हो रहा था. कोयला चोरी-किसकी मजाल. कहा भी जाता है अगर एक एसपी इमानदार हो जाये, तो उस जिला में एक छंटाक कोयले की चोरी नहीं हो सकती.

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अभी क्या है स्थिति

झरिया के विधायक संजीव सिंह के करीबी रंजय सिंह की सरेशाम बिग बाजार के पास हत्या कर दी गयी थी. धनबाद के पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह की हत्या स्टीलगेट के पास मुख्य सड़क पर सरेआम कर दी गयी.

अब सिंह मेंशन के करीबी झारखंड विकास मोर्चा के नेता रंजीत सिंह को गैंग्स ऑफ वासेपुर के गुर्गों ने रंगदारी नहीं देने पर मार डाला. वह भी तब, जब उसने अपनी हत्या की आशंका जताते हुए एसएसपी मनोज रतन चोथे को पत्र लिखा था. रंजीत सिंह को सुरक्षा उपलब्ध कराने में धनबाद के एसएसपी असफल रहे. कोयला ट्रांसपोर्टिंग पर माफिया हावी है. कंपनियां पनाह मांग रही हैं. पुलिस का इकबाल समाप्त हो चुका है. कोयला चोरी खुलेआम हो रहा है. हालात यह है कि पिछले दिनों डीजीपी तक को एसएसपी से कहना पड़ा कि “तुम्हें (मनोज रतन चोथे) ऐसा क्यों लगता है कि तुम्हारी पोस्टिंग किसी राजनेता ने करायी है.”

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चौथे पर इतनी मेहरबानी क्यों

धनबाद में अपराध बेलगाम है. कोल ट्रांसपोर्टिंग में माफियागिरी सार्वजनिक है. सबको पता है कि कौन माफिया है. कौन कंपनियों को मजबूर करके रंगदारी वसूल रहा है. शिकायत मिलने पर भी पुलिस कार्रवाई नहीं करती. धमकी मिलने पर सुरक्षा नहीं कर पाती. ऐसे में लोगों को समझ में नहीं आ रहा है कि सरकार एसएसपी चोथे पर सरकार और पुलिस मुख्यालय इतनी मेहरबान क्यों है. निरसा के मासस विधायक अरुप चटर्जी ने विधानसभा में धनबाद में बड़े पैमाने पर चल रही कोयलाचोरी का मुद्दा उठाया था. यह भी आरोप लगाया गया कि सत्तारूढ़ दल के समर्थक काले कारोबार को संरक्षण दे रहे हैं. इसपर सदन में जोरदार हंगामा मचा तो कुछ दिनों के लिए सांकेतिक तौर पर साइकिल से कोयला चोरी करनेवाले सड़क से गायब हो गये. इसके दो-चार दिन बाद ही स्थिति पहले जैसी ही हो गयी. कोयलांचल में कोयला चोरी का मामला इस बीच केंद्र में भी गूंजा पर बात आयी गयी हो गयी. हाल में जब रंजीत सिंह की हत्या हुई तो झाविमो के सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी ने एसएसपी चोथे को हटाने की मांग की. वजह भी वाजिब थी. रंजीत सिंह ने एसएसपी को हत्या की आशंका की लिखित जानकारी दी, इसके बाद भी उसे बचा नहीं सके. इसे ही तो कहते हैं. टोटल फेल्योर.

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