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धनबाद : जिला परिषद राजनीति का अखाड़ा बन गयी है,  विकास कार्यों से कोई लेना-देना नहीं 

धनबाद जिला परिषद की राजनीति सिर्फ हंगामे तक सिमट कर रह गयी है.  अध्यक्ष और उपाध्यक्ष से लेकर इसके तमाम सदस्यों को विकास कार्यों से कुछ लेना-देना नहीं रह गया है.

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Dhanbad : धनबाद जिला परिषद की राजनीति सिर्फ हंगामे तक सिमट कर रह गयी है.  अध्यक्ष और उपाध्यक्ष से लेकर इसके तमाम सदस्यों को विकास कार्यों से कुछ लेना-देना नहीं रह गया है.  जब भी जिला परिषद बोर्ड की बैठक होती है, हंगामा होता है. हंगामा और शोर-शराबे के साथ ही बैठक समाप्त कर दी जाती है. पांच माह बाद शनिवार को हुई बैठक का हश्र भी पहले जैसा ही रहा.  हंगामे के बाद बैठक समाप्त कर दी गयी.बोर्ड बैठक की शुरुआत में पिछली बैठक की कार्रवाही पढ़ी गयी. इस दौरान ऐसी छह योजनाएं सामने आयी जिसमें सदस्यों को पहल करनी थी, लेकिन बीते पांच माह में किसी सदस्य ने सूची तक उपलब्ध नहीं करायी.

इन छह योजनाओं में शामिल प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना दो के तहत 38 ग्रामीण सड़कों को अपग्रेडेशन किया जाना था. इसके लिए सदस्यों से सूची मांगी गयी थी. इस क्रम में जिला स्तरीय जैव विविधता प्रबंधन समिति का गठन करने के लिए इच्छुक सदस्यों से आवेदन मांगा गया था. जिला परिषद सदस्यों को अपने क्षेत्र में स्थित जीर्ण सीएचसी व पीएचसी का निरीक्षण कर मरम्मती की अनुशंसा करनी थी. सदस्यों से उनके क्षेत्र के मरम्मती करने योग्य स्कूल भवनों की सूची की मांग की गयी थी.

पंचायत भवन की मरम्मती के लिए छह लाख रूपये आवंटित किये गये थे. जिला परिषद सदस्यों से ऐसे पंचायत भवनों की सूची मांगी गयी थी.   जिस क्षेत्र में जर्जर विद्युत तार, पोल आदि बदलने हैं, वहां की सूची सदस्यों से मांगी गयी थी. इन छह योजनाओं की जिला परिषद सदस्यों से सूची अप्राप्त है. जिसके कारण विकास कार्य थमा हुआ है.

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जिला परिषद के कर्मचारी और सदस्य नाराज

जिला परिषद की बैठक में कर्मचारियों का बकाया मानदेय समेत अन्य का प्रस्ताव भी पारित किया जाना था, लेकिन बैठक बार-बार रद्द होने के कारण यह सब नहीं हो सका. इस कारण शनिवार की बैठक रद्द होने से जिला परिषद के कर्मचारी भी नाराज हैं. इधर, बोर्ड की बैठक रद्द होने से जिला परिषद के कई सदस्यों ने जिप सदस्य दुर्गा दास को लेकर नाराजगी जतायी है. जिला परिषद सदस्य प्रियंका पाल ने कहा कि जनवरी में हुई बैठक भी दुर्गा दास के कारण रद्द हुई थी और अब पांच माह बाद बैठक हो रही थी, वह भी रद्द हो गयी. ग्रामीण इलाकों में सदस्य मुंह दिखाने के काबिल नहीं हैं.

इधर, दिल मोहम्मद ने कहा कि यदि किसी मामले को लेकर विरोध है तो उसे सदन में उठाना चाहिए था, ना कि इस तरह से हंगामा खड़ा करना चाहिए था. सदन में उपस्थित नहीं होकर सदस्य ग्रामीणों को धोखा दे रहे हैं. संतोष कुमार महतो ने कहा कि उपविकास आयुक्त से भेंट कर जल्द ही बोर्ड बैठक फिर से कराने का आग्रह किया जाएगा. इसके अलावा सुनील मुर्मू, सुभाष राय, हीरामन नायक आदि ने भी दुर्गा दास के इस कदम को गलत बताया.  बताते चलें कि 15 जनवरी 2019 को जिला परिषद बोर्ड की अंतिम बैठक हुई थी. इस बीच लोकसभा चुनाव पड़ जाने के कारण एक भी बैठक नहीं हो पायी थी. चुनाव खत्म होने के बाद शनिवार को बोर्ड बैठक निर्धारित थी. लेकिन दुर्गा दास के हंगामे से रद्द करनी पड़ी.

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अध्यक्ष पर प्रलोभन देने का आरोप

बैठक बार-बार रद्द होने के मामले में जिप सदस्य दुर्गा दास ने कहा कि 50 लाख का प्रलोभन सदस्यों को दिया जाता है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों का काम नहीं हो रहा है. सदस्य पहुंचे ही नहीं थे तो बैठक चालू कैसे हो गयी. वे लोग अभी आये हैं. अध्यक्ष बार-बार सदन छोड़ कर चले जाते है. उन्हें नियम-कानून की जानकारी नहीं है. इधर अध्यक्ष रोबिन गोराई ने कहा कि सदन शुरू होने के बाद धीरे-धीरे लोग आते हैं. सदन की कार्यवाही चलती रहती है. दुर्गा दास भी जिला परिषद आयी थीं, लेकिन वे बोर्ड बैठक में शामिल नहीं हुईं. केवल हंगामा करने के लिए आयी. दो-दो बार दुर्गा दास के हंगामा के कारण बैठक नहीं हो सकी. उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों के विकास से कोई मतलब नहीं है.

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