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धनबाद : पैदल चलकर झारखंड पहुंचने वाले मजदूरों ने सुनायी पीड़ा, कहा-  नहीं मिली घर लौटने की सुविधा

Ranjit kumar singh

Dhanbad : यूपी के इटावा में रहकर मजदूरी का काम करते थे. लॉकडाउन के कारण मजदूरी मिलना बंद हो गया. पास में जो बचे – खुचे पैसे थे इस दौरान खत्म हो गये. इसी बीच प्रवासी मजदूरों की घर वापसी शुरू हुई.

मन में उम्मीद की एक किरण जगी. ईटावा के डीएम को फोन किया. उन्होंने आश्वासन भी दिया. लेकिन काफी इंतजार करने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ. जानकारी मांगने पर सिर्फ आश्वासन मिलता था.

आखिरकार हम लोग इटावा से झारखंड के चाइबासा के लिए पैदल ही निकल पड़े.  यह कहना है इटावा से चाइबासा जा रहे प्रवासी मजदूर राजकुमार का. प्रवासी मजदूरों के इस दल में 25 लोग शामिल हैं.

सभी करीब पांच दिनों से लगातार पैदल चल रहे हैं. पांच दिनों के अथक परिश्रम के बाद वे लोग धनबाद पहुंच पाये हैं.

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पैदल चलने के अलावा नहीं बचा था कोई  विकल्प

धनबाद की सड़कों पर प्रतिदिन सैकड़ों मजदूर इस हालत में आसानी से मिल सकते हैं. इन सभी मजदूरों की समस्या एक जैसी है. इन लोगों का साफ कहना है कि जहां से आ रहे हैं, वहां के प्रशासन ने उन्हें कोई मदद नहीं की है. उनके पास रुपये – पैसे खत्म हो गये थे, जिस कारण उन्हें पैदल चलकर अपने घर जाना पड़ रहा है.

कुछ मजदूर यह भी बताते हैं उनके पास श्रमिक स्पेशल ट्रेन का भाड़ा नहीं था. जिस कारण उन्हें पैदल ही सफर करना पड़ रहा है. ऐसे लोगों को घर भेजने की समुचित व्यवस्था धनबाद जिला प्रशासन के पास भी नहीं है.

धनबाद पुलिस अपना पल्ला झाड़ने में लगी रहती है. 10 मई को रांची से बिहार के कटिहार के लिए पैदल निकले मजदूरों को जामाडोबा पुलिस ने अपने थाना क्षेत्र से खदेड़ दिया था. मजदूर जामाडोबा क्षेत्र से भागकर बोर्रागढ़ थाना क्षेत्र पहुंचे. यहां से उन्हें स्वास्थ्य जांच के लिए सदर अस्पताल भेजा गया.

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वहां रहते तो भूख से जरूर मर जाते

यह पूछे जाने पर कि सड़क पर आये दिन होने वाले हादसों के कारण पैदल चलने में डर नहींं लगता है. इसका जवाब देते हुए राजकुमार बताते हैं कि डर तो लगता ही है.

लेकिन हमारे पास पैदल चलने के अलावा और कोई दूसरा रास्ता नहीं है. सड़क पर पैदल चलने के कारण मौत हो या नहीं हो लेकिन वहां भूख से जरूर मौत हो जाती. वहां मजदूरों की बात सुनने वाला कोई नहीं है.

की जा रही है व्यवस्था, संयम रखें मजदूर : एसडीएम

धनबाद के एसडीएम राज महेश्वरम ने बताया कि जो प्रवासी मजदूर ट्रेनों से आ रहे हैं, उन्हें बसों के द्वारा घर भेजने की व्यवस्था की जाती है. सड़क मार्ग से आने वाले लोगों को भी बसों के द्वारा घर भेजने का प्रयास किया जायेगा.

रैन बसेरा में मजदूरों के ठहरने और खाने – पीने की व्यवस्था की गयी. अन्य जिलों और दूसरे राज्य से समन्वय स्थापित कर उन्हें घर भेजने की व्यवस्था की जा रही है. मजदूर संयम बनाये रखें.

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