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धनबाद: 120वीं पुण्यतिथि पर याद किए गए युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद

Dhanbad: मनुष्य अपने विचारों से, अपने शब्दों से जीता है. शरीर नश्वर है. यह रोग से संक्रमित होकर नष्ट हो जाएगा. ठीक इसी तरह स्वामी विवेकानंद आज भी हमारे बीच जीवित हैं. जिन्होंने बिना धर्म को जज किए सिर्फ लोगों की सेवा की बात कही है. आज के धार्मिक हिंसा और असहिष्णुता के दौर में उनके संदेश को ज्यादा से ज्यादा याद किया जाना चाहिए. उक्त बातें युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद की 120वीं पुण्यतिथि पर भाजपा प्रबुद्ध प्रकोष्ठ जिला संयोजक व पूर्व पार्षद दिनेश सिंह ने कही.

आज भाजपा प्रबुद्ध प्रकोष्ठ सिंदरी कार्यालय में स्वामी विवेकानंद जी की तैलीय चित्र पर माल्यार्पण व पुष्प अर्पित करउन्हें श्रद्धांजलि दी गई. कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे संयोजक दिनेश सिंह ने कहा कि देश उनके आदर्शों को भूला नहीं सकता है. युवाओं को उनके द्वारा दिखाए गए रास्तों पर चलने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद का ‘उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक आप अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच जाते’ यह कथन आपके लक्ष्य की ओर निरंतर प्रयास करने की शक्ति के बारे में बात करता है.

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वहीं ‘एक विचार लो, अपने आप को समर्पित करो, धैर्य से संघर्ष करो, और सूर्य उदय होगा’कहावत उन सभी तत्वों को अस्वीकार करने के विचार के बारे में बात करती है जो आपको नीचे लाते हैं, नकारात्मकता फैलाते हैं और आपको चोट पहुंचाते हैं.

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अधिवक्ता दिनेश सिंह ने स्वामी विवेकानंद की जीवनी बताते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को हुआ था और 4 जुलाई 1902 को उनका निधन हो गया.

रामकृष्ण परमहंस देव उनकी आध्यात्मिकता के गुरु थे. उनसे ही विवेकानंद ने सीखा कि ईश्वर सभी जीवों में रहता है, इसलिए जीव की सेवा करना ईश्वर की सेवा करना है. 1893 में, उन्होंने विश्व धर्म संसद में भारत और हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व किया, और स्वामीजी ने शिकागो, यूएसए में अपना प्रसिद्ध भाषण दिया. उनके शानदार भाषण से उपस्थित दर्शक प्रभावित हुए.

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अमेरिका में बहुत से लोग इस महान हिंदू साधु के प्रबल प्रशंसक बन गए. स्वामी विवेकानंद का 39 वर्ष की आयु में निधन हो गया.

श्रद्धांजलि कार्यक्रम में मुख्य रूप से भाजपा नेता ब्रजेश सिंह, अधिवक्ता दिनेश सिंह, सुरेश सिंह, नकुल प्रसाद, जगदीश्वर सिंह, सुनील प्रसाद सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे.

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