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धनबाद : प्रचार शुल्क का 41 लाख से ज्यादा गबन कर गयी Selvel एडवरटाइजिंग एजेंसी, नगर निगम ने दर्ज करायी प्राथमिकी

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Dhanbad : भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार शुरु हो गया है. धनबाद नगर निगम ने भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाना शुरू कर दिया है. एक सप्ताह पहले ही नगर निगम के कार्यपालक पदाधिकारी मो.अनिश ने थाने में लिखित शिकायत देकर नगर निगम में लेबर घोटाला करनेवाले तीन कर्मियों पर प्राथमिकी दर्ज करायी है. इसमें वार्ड सुपरवाइजर दीपक कुमार साव, कंप्यूटर ऑपरेटर विक्की कुमार साव और प्रीतम कुमार शामिल हैं.

वहीं, अब नगर निगम ने विज्ञापन शुल्क जमा न करने और सरकारी राशि गबन करने के मामले में सेलवेल एडवरटाइजिंग प्राइवेट लिमिटेड पर धनबाद थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी है.

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शिकायत में धनबाद नगर निगम ने कहा है कि सेलवेल को 41 लाख 77 हजार 180 रुपये का डिमांड जारी  किया. यह डिमांड 22 जुलाई 2019 को पारित किया गया. इसके तीन दिन के अंदर बकाया राशि जमा करनी थी लेकिन नहीं की गई.

मामले में पहले बकाया राशि जमा करने को लेकर निगम की ओर से नोटिस जारी किया गया था. नोटिस का जवाब न देते हुए सेलवेल ने हाइकोर्ट में केस दर्ज करा दिया. हालांकि कोर्ट ने निगम स्तर से मामले की जांच कर स्वच्छ आदेश पारित करने की बात कही. जिसके आधार पर मंगलवार की शाम उप नगर आयुक्त राजेश कुमार सिंह ने थाने में सेलवेल पर 41 लाख 77 हजार 180 रुपये सरकारी राशि गबन करने की प्राथमिकी दर्ज कराई.

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क्या है पूरा मामला

थाने में की लिखित शिकायत में निगम ने कहा है कि एक अप्रैल 2016 में एग्रीमेंट की शर्तों के आधार पर अलग-अलग स्थानों पर होर्डिंग लगाने का निर्णय लिया गया. 24 अप्रैल 2016 और 23 मई 2016 को सेलवेल एडवरटाइजिंग प्राइवेट लिमिटेड को एड डिस्प्ले करने के लिए निर्धारित दर पर अनुमति दी गई.

शर्तों के आधार पर संबंधित एजेंसी को अग्रिम छह माह का भुगतान करना अनिवार्य था. लेकिन सेलवेल ने भुगतान नहीं किया. नगर निगम ने सेलवेल एडवरटाइजिंग को 26 नवंबर 2018 को बकाया राशि 48 लाख 13 हजार 655 का डिमांड नोटिस भेजा. इसपर सेलवेल ने कोर्ट का रुख कर लिया.

कोर्ट के निर्देश के आलोक में नगर आयुक्त के समक्ष सुनवाई के बाद सेलवेल को 41 लाख 77 हजार 180 रुपये का डिमांड जारी किया गया. यह डिमांड 22 जुलाई 2019 को पारित किया गया. इसके तीन दिन के अंदर बकाया राशि जमा करनी थी, लेकिन आज तक सेलवेल ने राशि जमा नहीं की.

नगर निगम को धोखे में रखते हुए सेलवेल ने सरकारी राशि का गबन किया. सेलवेल का निबंधन भी रद्द किया जा चुका है. इसके बाद भी सेलवेल द्वारा अवैध रूप से विज्ञापन प्रदर्शित किया जा रहा है. इससे सरकारी राशि की हानि हो रही है.

सेलवेल का पक्ष

इस मामले में कंपनी के एरिया मैनेजर अजय प्रियदर्शी का कहना है कि 2016 में निगम के साथ एकरारनामा हुआ किन्तु इसके पश्चात के वर्षो में सिर्फ निबन्धन का नवीकरण हुआ एकरारनामे का नहीं. 2016-19 के बीच 16 होर्डिंग हटाये गये और इसकी सूचना समय-समय पर निगम को दी गयी, जिस पर निगम ने कभी भी आपत्ति नहीं की. निगम ने जब किराये का मांग पत्र दिया तो सारे होर्डिंग का दिया. हमने निगम से कई बार पत्र देकर आग्रह किया कि अपने मांग पत्र में हटाये गये होर्डिंग का किराया नहीं जोड़ें. हमने अनुरोध किया कि जो होर्डिंग आपके जगह पर लगे हुए हैं केवल उसके लिए ही मांग पत्र दें, लेकिन हमें कभी भी वाजिब मांग पत्र नहीं मिला. इसके फलस्वरूप हमलोग समय पर निगम को भुगतान नहीं कर सके. इस कारण निगम ने हमारा निबंधन रद्द कर दिया. तत्पश्चात, बाध्य होकर हम लोग माननीय उच्च न्यायालय के शरण में गये. न्यायालय ने निगमायुक्त के आदेश को रद्द करते हुए नेचुरल जस्टिस करने को कहा. इसके बाद हमलोग दो बार निगमायुक्त से मिले और अपने पक्ष को रखा. लेकिन स्थिति पूर्ववत ही रही. इस दर्म्यान हमारे 11 होर्डिंग को दूसरी एजेन्सी के द्वारा बाधित कर दिया गया. अब निगम के द्वारा हमारे हटाये गये और बाधित किये गये सभी होर्डिंग का बिल दिया गया जो कि सर्वथा अनुचित है.

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भ्रष्टाचारियों पर निगम की लगातार कार्रवाई जारी

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पिछले छह महीने से धनबाद नगर निगम ने भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाना लगातार जारी रखा है. पिछले तीन महीने में निगम प्रशासन ने निगम अधिकारियों-कर्मचारियों से लेकर ठेकेदार और योजना लाभुकों को भी नहीं बख्शा है. वहीं लगातार कार्रवाई से हडकंप है. जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं.

पहला मामला: 30 जुलाई 19 को वार्ड नंबर-24 में फर्जी लेबर दिखाकर निगम से 13 लाख 68 हजार रुपए का भुगतान लेनेवाले निगम के तीन कर्मियों पर एफआइआर दर्ज की गयी. निगम के कार्यपालक पदाधिकारी मो अनीस ने तीनों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करायी.

वार्ड नंबर-24 के स्वच्छता पर्यवेक्षक दीपक कुमार साव, कंप्यूटर ऑपरेटर विक्की कुमार और प्रीतम को इसमें आरोपी बनाया गया है. स्टीलगेट निवासी सह निगम के पूर्व जेई विकास कुमार सिंह के आवेदन पर यह कार्रवाई की गयी.

दूसरा मामला: आठ कराेड़ के ई-गवर्नेस घोटाले में कानूनी कार्रवाई जारी है. घोटाले में शामिल पूर्व अर्बन रिफार्म स्पेशलिस्ट मनीष कुमार के खिलाफ अपर नगर आयुक्त संदीप कुमार ने 24 अप्रैल 2019 काे धनबाद थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी थी.

मनीष कुमार पर आरोप है कि इन्होंने ई-गवर्नेस प्रोजेक्ट का काम करने वाली कंपनी काे आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए 2 कराेड़ 65 लाख रुपए सरकारी राशि गबन किया. यह राशि कंपनी काे वैसे सामानों के लिए दिये गये थे जिसे कंपनी ने दिया ही नहीं था.

मनीष कुमार ने कंपनी द्वारा दिए गए फर्जी बिल काे सत्यापित कर राशि का भुगतान करवा दिया. निगम की ओर से यह प्राथमिकी उपायुक्त ए दाेड्डे के निर्देश पर दर्ज करायी गयी है. इस मामले के एक अन्य आराेपी नगर निगम के पूर्व नगर आयुक्त मनेाज कुमार के खिलाफ प्रपत्र ‘क’ गठित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है.

तीसरा मामला: प्रधानमंत्री आवास याेजना के वैसे लाभुकों के खिलाफ नगर निगम ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है, जाे प्रथम और द्वितीय किस्त लेने के बाद भी अभी तक आवास निर्माण का कार्य शुरू नहीं किए हैं.

पैसा लेकर आवास नहीं बनाने वाले तीन लाभुकों के खिलाफ जून 2019 में एफआइआर दर्ज कराया जा चुका है. पैसा लेकर आवास नहीं बनाने वाले ऐसे लाभुकों की सूची में जिन लाभुकों का नाम है, उनमें चंदन कुमार, तनवीर गद्दी, तौफिक गद्दी, नेपाल गाेप, संजय गाेप, पुष्पा देवी,कल्याणी बाउरी, मीना देवी, किशोर गुप्ता, साेमशंकर शर्मा, बैकुंठ नाथ शर्मा, चंद्रमोहन शर्मा, शंकर मल्लिक, हेमंत धीवर, मनोरंजन महताे और रविशंकर महताे के अलावे चार अन्य लोग शामिल हैं.

सभी 2, 3, 10, 19, 20, 22, 23, 27, 40 और 50 नंबर वार्ड के रहने वाले हैं. इन सभी काे वित्तीय वर्ष 2015-16, 2016-17 और 2017-18 में पैसा दिया गया है. ऐसे लाभुकों के खिलाफ अब सीधे एफआइआर दर्ज करने की तैयारी है. इन सभी के बैंक खाते में दाे से तीन साल पहले आवास निर्माण के लिए पैसा भेजा गया था, लेकिन एक और दाे किस्त मिलने के बाद भी इन लाेगाें ने अभी तक आवास निर्माण का कार्य शुरू नहीं किया है. सभी काे तीन-तीन बार नाेटिस भेजा गया.

चौथा मामला : नगर निगम ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत व्यक्तिगत शौचालय निर्माण के लिए छह-छह हजार रुपए अग्रिम राशि का भुगतान किया है. जांच में 12085 लाभुक ऐसे पाये गये हैं जिन्होंने अग्रिम राशि लेकर भी शौचालय का निर्माण शुरू नहीं किया है.

निगम ने इसपर भी नाराजगी जतायी और लाभुको को पहला नोटिस 13 मार्च को जारी करते हुए 20 मार्च तक शौचालय नहीं बनाने वालों को अग्रिम राशि लौटाने को कहा. तीन नोटिस जारी हो चुके हैं अब शौचालय नहीं बनाने वालों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज करायी जायेगी.

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