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धनबाद एसडीओ ने पत्रकार के साथ की मारपीट, फिर बोला- सॉरी

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Dhanbad: न्यूज विंग के संवाददाता विकास पांडेय के साथ धनबाद के एसडीओ राज महेश्वरम और उनके साथ मौजूद पुलिस दस्ते ने बुधवार दोपहर को मारपीट की. यह घटना उस समय हुई जब एसडीओ हीरापुर में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर रहे थे. विकास ने यह देखा तो उसका वीडियो बनाने लगा. यह देखकर एसडीओ और उसके साथ के पुलिस दस्ते ने पत्रकार के साथ लप्पड़-थप्पड़ शुरू कर दिया. पत्रकार का फोन भी छीन लिया. इसके बाद उसे अपनी स्कॉर्पियो में बैठाकर अपने सरकारी आवास ले गये. करियर बर्बाद कर देने की धमकी दी. वहां विकास ने जब कहा कि मेरे सीनियर से बात कर लीजिए तो उन्होंने उनकी एक नहीं मानी. उनके मोबाइल से फोटो और वीडियो डिलिट कर दिया. बाद में यह कहते हुए मोबाइल दिया कि सीधे भाग जाओ.

एसडीएम ने कहा सॉरी

मामले में जब एसडीओ से न्यूज विंग ने बात की और कहा कि किसी का वीडियो बनाना अपराध है क्या? पत्रकार के साथ क्यों मारपीट की गयी? इस पर उन्होंने माफी मांगी. सॉरी कहा. मामले की शिकायत धनबाद के डीसी ए दोड्डे से की गयी है. मारपीट के इस मामले को उन्होंने गंभीर बताते हुए आवश्यक कार्रवाई की बात की. भुक्तभोगी पत्रकार ने मामले की डीसी को लिखित सूचना देकर समुचित कार्रवाई की मांग की है.

एसडीएम की दलील कि विकास ने अपना आईकार्ड नहीं दिखाया

न्यूज विंग से बात करते हुए एसडीएम ने कहा कि जहां पर अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया चल रही थी, वहां बिलकुल पास में ही विकास खड़ा था. उससे हटने को कहा गया. लेकिन वो नहीं हटा. ऐसे में मेरे साथ मौजूद पुलिस कर्मियों ने उससे उसकी आईडी मांगी. आईडी नहीं देने पर उसकी डायरी मांगी. एसडीएम ने कहा कि उसके बाद उसे गाड़ी में बैठाकर अपने आवास पर लाया. जो धक्का-मुक्की विकास के साथ हुई उसके लिए मैं सॉरी बोलता हूं.

पत्रकारों पर हाथ छोड़ना कभी बर्दाश्त नहीं: संजीव झा

धनबाद प्रेस क्लब के अध्यक्ष संजीव झा ने न्यूज विंग से बात करते हुए कहा कि पत्रकारों पर हाथ छोड़ना कतई बर्दाश्त नहीं होगा. उन्होंने कहा कि प्रेस क्लब इस बात की घोर निंदा करता है. मामले को लेकर डीसी से मुलाकात की जाएगी. उनसे उचित कार्रवाई करने के लिए कहा जाएगा.

लगातार ऐसी घटना हो रही हैं, लेकिन सरकार संज्ञान नहीं ले रहीः राजेश सिंह

रांची क्लब के अध्यक्ष राजेश सिंह ने कहा कि पत्रकारों को मारना मानो फैशन हो गया है. घटना इस वजह से बढ़ रही है क्योंकि सरकार संज्ञान नहीं ले रही है. अगर रांची की घटना के बाद सरकार संज्ञान लेती तो कभी भी इस तरह की घटना दोबारा नहीं घटती. आखिर किसने अधिकार दिया है, प्रशासन को पत्रकारों पर हाथ उठाने का. कैसे कोई किसी पत्रकार से कैमरा लेकर उससे कुछ डिलिट कर सकता है. रांची प्रेस क्लब इसकी घोर निंदा करता है और मैं पत्रकारों को एकजुट होकर मामले से निबटने का अनुरोध करता हूं.

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