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धनबाद: अपराधियों के वास में अब पर्यटकों का प्रवास, पहाड़ियों पर हरियाली व पानी की कलरव निहारने आ रहे सैलानी

Manoj Mishra

Dhanbad: धनबाद का मतलब कोयला, माफिया और वर्चस्व की लड़ाई है. आजादी से पहले धनबाद वर्चस्व की खूनी लड़ाई रही है लेकिन आजादी के बाद से धनबाद गैंगवार, कोयला खदानों में लगी भूमिगत आग, खून-खराबा, बेबसी, और बॉलीवुड की दी गई नाम गैंग ऑफ वासेपुर जैसे न रुकने वाली आग से झुलसता रहा है.

अब, धनबाद का मतलब कोयला, माफिया और वर्चस्व की लड़ाई नहीं होगा. अब धनबाद का मतलब पहाड़ों की गोद में बसा हरे-भरे जंगलों के बीच जम्मू कश्मीर की वादियों जैसा गांव, चरक खुर्द का गर्मकुंड, पूर्वी टुंडी के कांसजोड़, बाजडीह, पालोबेड़ा में बहते पानी की कलकल धारा, काजू पेड़ के बागान, छोटी-छोटी पहाड़ियों और जंगलों से घिरे धनबाद के पर्यटन स्थल की खूबसूरती होगा.

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धनबाद जिला जनसंपर्क अधिकारी ईशा खंडेलवाल ने एक वीडियो जारी किया है. वीडियो में धनबाद की पर्यटन स्थलों के बारे में जानकारी दी गई है. वीडियो की शुरुआत में आईआईटी धनबाद के एक छात्र की आवाज से की गई है. कहा गया है कि धनबाद जिले में आप अक्सर वासेपुर के नाम सुने होंगे पर धनबाद में एक से एक सुंदर स्थल है, जो मनमोहक हैं. धनबाद की जो कंस्पेट आपके जेहन में है उसके विपरीत यहां है प्राकृतिक खजाना जो कहीं नहीं…

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बातया जाता है कि धनबाद में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए धनबाद जिला जनसंपर्क अधिकारी ईशा खंडेलवाल ने एक कंस्पेट तैयार किया है. और कंस्पेट के आधार पर धनबाद के विभिन्न लोकेशन पर धनबाद की खूबसूरती को कैमरे में कैद किया गया है. कमबैक फाउंडेशन के अभिषेक गुप्ता के निर्देशन में एक वृतचित्र तैयार किया है. शनिवार को ईशा खंडेलवाल मीडिया के लिए टीजर जारी किया और आग्रह किया कि धनबाद की खूबसूरती को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं. जल्द ही अन्य वीडियो जारी की जाएगी.

धनबाद की फिल्मी गैंग ऑफ वासेपुर की छवि को चुनौती देती धनबाद की खूबसूरती जरूर कह रही है कि ‘तेरे चेहरे से नजर नहीं हटती नजारे हम क्या देखें…धनबाद जिला जनसंपर्क विभाग का प्रयास सराहनीय है. धनबाद सही मायने में प्राकृतिक खूबसूरती का एक खजाना है.

यहां हम बता दें कि प्रकृति ने झारखंड के धनबाद जिले को बेपनाह खूबसूरती से संवारा है. छोटी-छोटी पहाड़ियों और जंगलों से घिरे धनबाद के पर्यटन स्थल की खूबसूरती ऐसी है कि दूसरे राज्यों के पर्यटक यहां खींचे चले आते हैं. धनबाद के दो सबसे बड़े पर्यटन स्थल मैथन और तोपचांची की बात ही निराली है. वहीं प्राकृतिक गोद में बसा टुंडी को प्रकृति ने करीने से सजाया है. टुंडी और पूर्वी टुंडी प्रखंड में कई स्थान ऐसे हैं, जिनका जिक्र किए बिना यहां की प्राकृतिक सुंदरता की पूरी तस्वीर नहीं उभर सकती है. टुंडी के सुदूर छोर में बराकर नदी से सटे सिंदवारी घाट, लाहरबाड़ी घाट तथा पूर्वी टुंडी के कांसजोड़, बाजडीह, पालोबेड़ा में बहते पानी की कलकल धारा नदी के बीच में सफेद चट्टानों और पत्थरों से टकराकर आगे बढ़ते देखने का दृश्य बहुत ही मनमोहक है. पहाड़ों की गोद में बसा यहां के गांव हरे-भरे जंगलों के बीच जम्मू कश्मीर की वादियों से कम नहीं लगता. प्रकृति प्रेमियों के लिए ये एक खूबसूरत जगह है.

पश्चिमी क्षेत्र में स्थित चरक खुर्द का गर्मकुंड तो जिलेभर में प्रसिद्ध है. जहां ठंड में लोग गर्मी का आनंद लेने के लिए नहाने पहुंचते हैं. बराकर नदी के तट पर बसा सिंदवारीटांड़ में नदी किनारे लगे लंबे-लंबे पेड़ों से भरा हुआ जंगल किसी हसीन वादियों से कम नहीं. पूर्वी टुंडी का बेजड़ा और करमदाहा घाट का भी नजारा लोगों को लुभाने के लिए काफी है. पहाड़ी के ऊपर बसी रुपन पंचायत के रुपन में स्थित हाथियों की गतिविधियों को देखने के लिए बनाए गए वॉच टावर पर चढ़कर आदिवासी गांवों को देखने का भी अलग रोमांच है.

टुंडी मुख्यालय से करीब 5 किमी पश्चिम में कोल्हर पंचायत के अन्तर्गत भगुडीह डैम तथा ऋषिभीठा के राजदहा जोड़िया पर बना चैकडैम, वहीं दक्षिणी टुंडी के बेगनरिया पंचायत अन्तर्गत गुवाकोला डैम पर बरसात के दिनों में पहाड़ से उतरकर पानी जमा होता है. उस पानी पर पहाड़ की परछाइयां लोगों का मन मोह लेती हैं.

 

पांच एकड़ में फैले काजू पेड़ के बागान का नजारा भी काफी दिलचस्प है. बारकेतनी गांव से सटा हुआ एक बेचिरागी स्थल है सोनापानी, जहां पहाड़ी के ऊपर स्थित है बूढ़ा शिव महादेव का मंदिर. यहां सिर्फ महाशिवरात्रि के दिन ही मेला जैसा नजारा होता है और कई किमी तक लम्बी लाइन लग जाती है.

धनबाद में घूमने की जगह

भटिंडा फॉल्स, मैथन डैम, दर्शनीय स्थल तोपचांची झील, बिरसा मुंडा पार्क, पंचेत बांध, शक्ति मंदिर, दर्शनीय स्थल लिलोरी चरण मंदिर, पर्यटन स्थल पंर्रा गांव, धार्मिक स्थान कल्याणेश्वरी मंदिर, प्रसिद्ध, हीरापुर दुर्गा मंदिर समेत अनेकों स्थान हैं.

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