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धनबाद : PMCH में शव को पोस्टमॉर्टम हाउस ले जाने के लिए नहीं मिला वाहन, स्ट्रेचर पर ले गयीं बेटियां

Dhanbad : सोमवार रात 11 बजे गिरिडीह के मोहनपुर में सड़क हादसे में घायल हुई 60 वर्षीय मोफिदा को इलाज के लिए पीएमसीएच लाया गया था. यहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी. डॉक्टरों ने कहा कि शव का पोस्टमार्टम करना होगा.

मोफीदा के साथ उसकी सिर्फ दो बेटियां आयी हुई थी. डॉक्टरों ने कहा कि मंगलवार की सुबह आठ बजे उसका पोस्टमॉर्टम होगा. लेकिन सुबह आठ बजे शव को पोस्टमॉर्टम हाउस तक ले जाने के लिए कोई वाहन नहीं मिला.

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डॉक्टर से पूछने पर दो बहनों को जवाब दिया गया कि गाड़ी नहीं है, शव को खुद पोस्टमॉर्टम हाउस तक लाना पड़ेगा. मोफिदा की दोनों बेटियां हारकर मां के शव को स्ट्रेचर पर लादकर खुद पोस्टमार्टम हाउस तक ले गयीं.

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उपायुक्त के हाथ में है गाड़ियों की देखरेख : सुपरिटेंडेंट

मामले की जानकारी वासेपुर में रहने वाले समाजसेवी मोहम्मद एजाज अली को मिली. वे मंगलवार की सुबह पीएमसीएच में दोनों बहनों से मिले और मामले की जानकारी ली. मृतका की बेटियों से जानकारी लेने के बाद एजाज ने पीएमसीएच के सुपरिटेंडेंट एचके सिंह से बाते की. उन्हें पूरे मामले से अवगत कराया.

सुपरिटेंडेंट ने समाजसेवी एजाज को बताया कि गाड़ियों की देखरेख उपायुक्त के हाथ मे है. कई बार इसकी लिखित शिकायत की गयी लेकिन कोई फर्क नही पड़ा,  हालात जस की तस है.

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सुपरिटेंडेंट के आश्वासन के बाद भी नहीं आयी गाड़ी

सुपरिटेंडेंट ने एजाज से कहा कि शव को पोस्टमार्टम हाउस भेजवाने के लिए गाड़ी की व्यवस्था करने की कोशिश करता हूं. उन्होंने कहा कि तेल की व्यवस्था खुद करनी पड़ी, जिस पर वे लोग राजी हो गये. लेकिन कई घंटे गुजर जाने के बाद भी गाड़ी नहीं आयी.

डॉक्टर के जाने का वक्त हो गया. अस्पताल के कर्मियों ने दोनों बहनों से कहा कि खुद शव को लाओ तभी इसका पोस्टमार्टम हो पायेगा. आखिरकार दोनों बेटियों ने समाजसेवी के साथ मिलकर शव को स्ट्रेचर पर लादा और उसे पोस्टमार्टम हाउस तक पहुंचाया.

पीएमसीएच में गरीबों के लिए नहीं है कोई व्यवस्था

इस संबंध में मोफीदा की दोनों बेटियों ने कहा कि पोस्टमार्टम कराने के लिए सोमवार की रात से यहां पड़ी हुई हूं. मंगलवार को भी लगभग पूरा दिन गुजर गया लेकिन पोस्टमार्टम हाउस तक पहुंचाने के लिए एक गाड़ी तक नहीं मिली.

उन्होंने बताया कि पीएमसीएच में गरीबों के इलाज के लिए कोई व्यवस्था नहीं है. अस्पताल के कर्मियों का साफ कहना था कि शव को खुद लेकर आओ तभी पोस्टमॉर्टम होगा. उन्होंने कहा कि आज हमारे पास भी पैसे होते, तो शायद आज मेरी मां जिंदा होती.

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