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धनबाद नगर निगम: 50-60 लाख रुपये खर्च पर उठ रहे सवाल

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Dhanbad: धनबाद नगर निगम सालाना 50-60 लाख रुपये का खर्च वैसे मद में करता है जिसका शहर की सफाई और इसके विकास से लोगों को सीधा संबंध नहीं दिखता. मसलन चाय-बिस्कुट पर 24 हजार खर्च. होटल के ठहरने खाने-पीने का खर्च. अब इन खर्च पर सवाल उठने लगे हैं. लोगों का कहना है कि नागरिक अपनी गाढ़ी कमाई से निगम को टैक्स के जो पैसे देते हैं उसे सबसे पहले निगम को सफाई पर खर्च करना चाहिए. फिर शहर को सुंदर बनाने पर खर्च करना चाहिए. अभी बहुत से इलाके ऐसे हैं जहां लोग निगम की सुविधाओं से वंचित हैं. ऐसे लोगों को एकाध लाख खर्च से जरूरी सुविधाएं मुहैया की जा सकती है. लोग कहते हैं कि उनकी परवाह नहीं कर निगम सालाना 50-60 लाख रुपये ‘मौज’ करने पर उड़ाये तो खर्च पर सवाल खड़ा होगा ही. इस मामले में ‘न्यूज विंग’ ने तटस्थ रहकर वास्तविकता बताना जरूरी समझा. मामले को तरीके से यहां पेश करने की कोशिश की गयी है.

कुछ ब्‍योरा एक नजर में:

  • 24 सितंबर 2018 को हुई निगम बोर्ड बैठक में मेयर और नगर आयुक्त के 8वीं रीजनल फोरम इन एशिया एंड दी पेसिफिक में भाग लेने और इन्दौर आने-जाने और ठहरने में हुए व्यय का यात्रा भत्ता के रूप में 1,44,668 रुपये का भुगतान सर्वसम्मति से कर दिया गया.
  • नगर आयुक्त के निर्वाचन आयोग की मीटिंग में शामिल होने इन्दौर से दिल्ली आने-जाने में 8,024 रुपये का खर्च हुआ.
  • नगर आयुक्त के एशियन इन्फ्रास्ट्रकचर इनवेस्टमेंट बैंक की वार्षिक कार्यशाला में भाग लेने के लिए अहमदाबाद आने-जाने और ठहरने में 77, 091 रुपए का खर्च हुआ.
  • एनयूएलएम में धनबाद नगर निगम ने ट्रेनर के आवासन और भोजनादि पर 2 लाख रुपये खर्च किये. राशि का भुगतान निगम में सर्वसम्मति से पारित हो चुका है. जबकि यह प्रक्रियाधीन है.
  • धनबाद नगर निगम अंतर्गत बनाये जा रहे सिवरेज ड्रेनेज पर डीपीआर संबंधी कार्यशाला दिनांक 06 अक्‍टूबर 17 को हुई. कुकून होटल से प्राप्त विपत्र की राशि 1 लाख 27 जहार 92 रुपये का चेक से 24 अगस्‍त 2018 को एसबीआई हीरापुर के माध्यम से भुगतान कर दिया गया है.

हर मद का अलग हिसाब होता हैः नगर आयुक्त

निगम के कोष के हर मद की राशि को सफाई के उपयोग में नहीं लाया जा सकता है. धनबाद नगर निगम के नगर आयुक्त चंद्रमोहन प्रसाद ने बताया कि हर मद का खर्च निर्धारित होता है. इसका डायवर्सन नहीं किया जा सकता. जिस मद से जो कार्य करना निर्धारित है सिर्फ वही किया जा सकता है. इस तरह का सवाल उठाने से पहले इस बात की जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए. बताया कि शहर की सफाई के लिए दिन में दो बार झाड़ू लगवायी जाती है. कचरा उठाया जाता है. शहर की पूरी सफाई के लिए लोगों को भी खुद से अपने घर-दुकान के आगे सफाई रखनी चाहिए. उनके सहयोग से ही पूर्ण स्वच्छता संभव है. नहीं तो अरबों-खरबों खर्च करने का भी कोई फायदा नहीं होगा.

क्या कहते हैं धनबाद के लोग

सामाजिक कार्यकर्ता प्रोफेसर कॉलोन के जीपी सिन्हा का कहना है कि जनता निगम को टैक्स उनके भले के लिये और शहर की सफाई के लिए देती है. इसलिए इस राशि पर पहल हक उनका ही है. अगर किसी कार्यक्रम या यात्रा में निगम के लोग आते-जाते हैं तो इसमें बुराई नहीं है. लेकिन उसका फायदा लोगों को कैसे मिल रहा है. यह भी जानना जरूरी है.

सामाजिक कार्यकर्ता सुनील सिंह कहते हैं कि कार्यशाला, डीपीआर, देश-दुनिया के भ्रमण और कार्यक्रमों में आने-जाने का फायदा क्या है? शहर का स्वच्छता में रैंक बढ़ा तो यह एक ट्रिक है. स्वच्छता ऐप्प डाउनलोड करने के मामले में धनबाद अव्वल है. यही रैंक बढ़ने का मुख्य आधार बना. शहर की सफाई में पहले से कोई खास अंतर नहीं है. सार्वजनिक स्थलों पर सिर्फ दिखावे के लिए सफाई हो रही है. मुहल्लों-गलियों का हाल बुरा है. निगम की प्राथमिकता शहर की सफाई होनी चाहिए.

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