न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

धनबाद लोकसभा सीट : चंद कांग्रेसी नेताओं ने ही कीर्ति आजाद के रास्ते में बिछा दिये हैं कांटे

कांग्रेस संगठन से जुड़े चंद महत्वाकांक्षी लोगों ने कीर्ति को मजाक बनाने का बीड़ा उठा लिया है.

465

Dhanbad : महागठबंधन से कांग्रेस प्रत्याशी कीर्ति आजाद के सामने सांप-छछुन्दर का हाल है. ना तो निगलते बन रहा और ना ही उगलते. कांग्रेस संगठन से जुड़े चंद महत्वाकांक्षी लोगों ने कीर्ति को मजाक बनाने का बीड़ा उठा लिया है. परिणाम में चाहकर भी कांग्रेस और कीर्ति के चेहते उन्हें अबतक अपमानित होने से बचा नहीं पाये. अगर यही सिलसिला कायम रहा तो कीर्ति की नैया डूबने से कोई नहीं बचा सकता.

इसे भी पढ़ें – पलामू: शिक्षक ने छात्रा को कहा- आइ लव यू…, ऑडियो हो रहा वायरल

चंद कांग्रेसी ही डूबो रहे हैं नैया 

कांग्रेस संगठन से जुड़े चंद कांग्रेसी ही कीर्ति की नैया डूबोने की जुगत में हैं. प्रदेश कांग्रेस की रणनीति से नाराज धनबाद लोकसभा के चंद कांग्रेसी ने कीर्ति के रास्ते में कांटे ही कांटे बिछा दिये हैं . आगमन से लेकर अबतक कीर्ति के समर्थन में ऐसे एक भी कांग्रेसी सामने नहीं आये हैं. कीर्ति के सामने और इर्द-गिर्द वे कांग्रेसी हैं, जिनका न तो कोई वोट बैंक है और न ही पिछले दस सालों में कांग्रेस संगठन के लिए ही कुछ किया है.

परिणाम कांग्रेस धनबाद लोकसभा में संगठन विहिन है. कार्यालय तो है,लेकिन कार्यकर्ता नहीं. समर्थक लाखों में लेकिन नेतृत्वकारी नहीं और विडंबना यह है कि कीर्ति के इर्द-गिर्द घेरे लोग उन्हें उनके चेहते और शुभचिंतकों से दूर कर रखा है. होता यह है कि कीर्ति के स्वागत में समर्थक के पहुंचने के समय से पहले चंद कांग्रेसी उन्हें जिल्लत होने को लेकर इधर-उधर निकल जाते हैं और इससे नाराज समर्थक कीर्ति से दूरी बना ले रहे हैं.

मुसलमानों में भी कीर्ति के विरोध में उठ रहे स्वर से काफी नाराजगी है. कीर्ति के साथ आये सहायक आशुतोष और मिथलेश चंद कांग्रेसी के चाल को तो समझ रहे हैं पर असहाय हैं. कहते हैं कि सांप-छछुन्दर का हाल है. लोकसभा के सभी विधानसभा में कांग्रेस संगठन न के बराबर है. प्रखंड स्तर पर भी कांग्रेस कार्यकर्ता बंटे हुए हैं.

SMILE

चंद कांग्रेसी संगठन पर कब्जा जमाये हर जगह मौजूद है. नये कांग्रेस कार्यकर्ता भटकाव में हैं. बूथ स्तर से तैयारी शुरू कर कीर्ति के लिए माहौल बनाना होगा.

लेकिन सब से बड़ी मुश्किल है जिला, प्रदेश कांग्रेस के बीच कॉर्डिनेशन का. सोशल इंजीनियरिंग कांग्रेस का धनबाद लोकसभा में पूरी तरह से फेल है. कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारियों के बीच तालमेल नहीं है.

कीर्ति के सहायक मिथलेश और आशुतोष के साथ कीर्ति आजाद का मानना है कि हालात कितने बदतर क्यों न हों, उन्हें हर पीच पर बैटिंग करनी आती है. चार लोकसभा चुनाव लड़ने का अनुभव है और तीन जीते हैं. पांचवी बार लोकसभा चुनावी मैदान में हैं. धनबाद के मैदान पर भी जीत की बाजी मारेंगे. कीर्ति के समर्थन में दरभंगा से लगभग छह सौ लोग 30 अप्रैल तक  धनबाद पहुंचने वाले हैं, जो लोकसभा चुनाव में कीर्ति के लिए माहौल बनाएंगे.

इसे भी पढ़ें – पश्चिम बंगाल का अवैध कोयला झारखंड के जामताड़ा से पार कराया जाता है, प्रति ट्रक 20 हजार वसूलती है…

कोयलांचल की मांग – इन मुद्दों पर देना होगा ध्यान 

धनबाद कोयलांचल के व्यवसायी, बिल्डर्स, ब्रिक्स व्यापारी, लघु और कुटिर उद्योग व्यवसायी, मंझोले इंडस्ट्रीलिस्ट, युवा, आधी आबादी की मानें तो धनबाद इन पांच मुख्य कारणों से लगातार पिछड़ रहा है. केन्द्र व राज्य की योजनाएं पूर्ण रूप से धरातल पर नहीं उतरती, युवाओं को रोजगार व व्यापार नहीं मिलता और आम नागरिक हर पल असुरक्षित महसूस करता है. इन पांच कारकों पर केन्द्र व राज्य सरकार को ध्यान दिलाने और सुधार कराने की जबावदेही सांसद और विधायक की है. सांसद को इन पांच मुद्दों पर गहरी चिंतन और मंथन कर निराकरण कराना होगा. तभी धनबाद सबल और झारखंड प्रदेश की आर्थिक राजधानी बन पाएगी.

  1. बीसीसीएल की पॉलिसी के कारण कोयलांचल पिछड़ेपन का शिकार है. धनबाद जिले की आम जनता से लेकर बुद्धिजीवि व्यवसायी, इंडस्ट्रलिस्ट, बिल्डर्स आदि का मानना है कि आउटसोर्सिंग के कारण धनबाद का पैसा बाहर चला जा रहा है. जिससे यहां के स्थानीय स्पलायर, छोटे-छोटे उद्योग बुरी तरह प्रभावित हैं.

  2. पिछड़ेपन की सबसे बड़ी वजह धनबाद की जनता ने गुंडागर्दी को माना है. व्यवसायी से लेकर ग्रामीण किसान तक का मानना है कि धनबाद संसदीय क्षेत्र में दबंगई, गुंडागर्दी के कारण हार्डकोक उद्योग से लेकर सभी छोटे-बड़े उद्योग प्रभावित है. साथ ही छोटे-बड़े ठेकेदारी, इन्फ्रास्ट्रक्चर वर्क, कुटिर उद्योग भी प्रभावित हैं.

  3. नये उद्योग धनबाद को नहीं मिलना पिछड़ेपन का एक बड़ा कारक बताया है. हालांकि सिंदरी एफसीआइ कारखाना के पुनरूद्धार के कार्य की सराहना हो रही है. वहीं धनबाद जिले को कोयला आधारित पावर प्लांट की मांग भी है. तर्क दिया जा रहा है कि धनबाद में प्रचुर कोयला, सस्ता श्रमि, के साथ जमीन उपलब्ध है. बावजूद कोल आधारित पावर प्लांट धनबाद को नहीं मिला और न ही अन्य नये उद्योग लगे. इस दिशा में ठोस पहल जरूरी है.

  4. भ्रष्टाचार, अधिकारियों के बीच तालमेल नहीं होना, विभागीय तालमेल नहीं होना भी धनबाद के पिछड़ने का एक प्रमुख कतारणों में शुमार है. माडा, रेलवे, बीसीसीएल, निगम आदि विभागों का उदाहरण देते हुए धनबाद कोयलांचल ने कहा कि इन विभागों के तालमेल नहीं होने से पानी, बिजली, सड़क, नाली, सिवरेज जैसी मूलभूत सुविधाओं में दिक्कतें आती हैं. अधिकारियों, विभागों और जनप्रतिनिधि साल दर साल तालमेल बैठाने में गुजार देते हैं और विकास कोसों पीछे छूट जाता है.

  5. पर्यटन, खेल, मेडिकल टुरिज्म, स्वरोजगार, स्वव्यापार, के साथ इन्फ्ररास्ट्रकचर क्षेत्र में विकास को समय की मांग बताते हुए हवाईअड्डा, भीड़ वाले इलाकों में जगह-जगह फलाईओवर और प्रदूषण मुक्त धनबाद बनाने की मांग को महत्वपूर्ण बताया.

इसे भी पढ़ें – सिंह मेंशन अपनी राजनीतिक साख बचा रहा या भाजपा की नैया डूबा रहा है

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like
%d bloggers like this: