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धनबाद: करमाटांड़ वासी आज भी खुले में शौच जाने को मजबूर, मनमाने ढंग से बने टॉयलेट का नहीं हो पा रहा इस्तेमाल

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Ranjit Kumar Singh

Dhanbad : टुंडी थाना के पीछे स्थित है करमाटांड़ गांव. लगभग एक हजार से ज्यादा की आबादी वाले इस गांव में कहने के लिए तो हर घर में शौचालय बना दिया गया है लेकिन लोग आज भी खुले में शौच जाने को मजबूर हैं.

शौचालय के अंदर काफी कम जगह है. यहां लोग ठीक से बैठ भी नहीं पाते. इसी वजह से लोग इसके इस्तेमाल से कतराते हैं.

ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदार ने जैसे-तैसे कर शौचालय का निर्माण कर दिया है. शौचालयों में पानी की व्यवस्था नहीं की गयी है. शौचालय की ऊंचाई इतनी कम है कि लोगों को झुककर अंदर जाना पड़ता है. अंदर जगह इतनी छोटी है कि एक आदमी का बैठना भी मुश्किल होता है. कुछ शौचालय तो ऐसे हैं जो बनने के कुछ दिनों बाद ही जर्जर हालत में पहुंच गये.

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निर्माण के बाद ही जर्जर हालत में पहुंचे शौचालय

शौचालय बनने के कुछ ही महिनों बाद इसकी हालत जर्जर हो गयी है. छत टूट चुके हैं.

करमाटांड़ के लोगों ने बताया कि इस शौचालय का उपयोग करना काफी कष्टकर होता है. इसलिए वे लोग आज भी खुले में ही शौच जाने को मजबूर हैं. इतना ही नहीं, पहले ठेकेदार ने शौचालय बनवाने के लिए पैसे की भी मांग की. जब लोगों ने बताया कि वे पैसे नहीं देंगे तो ठेकेदार ने मनमाने ढंग से शौचालय का निर्माण करवा दिया. जो निर्माण के कुछ दिनों बाद ही जर्जर हालत में पहुंच गया.

करमाटांड के लोगों ने सवाल उठाया कि क्या आज की तारीख में महज 12 हजार रुपये में शौचालय का निर्माण हो सकता है. 12 हजार रुपये तो ईंट और मिस्त्री में ही खर्च हो जाते हैं. ऐसे में शौचालय का निर्माण कैसे होगा?

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शौचालय के नाम पर सरकारी राशि का दुरुपयोग: फूलचंद किस्कू

इस संबंध में करमाटांड़ के ग्रामीण और जेएमएम के प्रखंड अध्यक्ष फूलचंद किस्कू ने कहा कि शौचालय निर्माण के नाम पर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया है. उन्होंने बताया कि आज की तारीख में 12 हजार रुपये में शौचालय बनवाना काफी मुश्किल काम है.

जर्जर शौचालय के दिखाते ग्रामीण.फूलचंद किस्कू कहते हैं कि इस क्षेत्र में जितने भी शौचालय बने हैं, उसकी हाइट कम है. अंदर जगह भी बहुत कम है. शौचालय की टंकी दो फिट की है जिसे शौचालय नहीं कहा जा सकता है. यही कारण है कि करमाटांड़ के लोग आज भी बाहर ही शौच जाना उचित समझते हैं.

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