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धनबाद जेल : जब बॉस ने जेल गेट पर बुलाया, तो पहुंचो, नहीं तो जान से हाथ धो लो…

पुलिस प्रशासन कई बार कर चुकी है छापामारी, मिला सुतली, चीलम, बीड़ी

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Dhanbad : गैंग्स आफ वासेपुर के सरगना फहीम खान के बेटे इकबाल खान ने जेवीएम नेता रंजीत सिंह को रंगदारी की बात के लिए जेल गेट बुलाया, वह आया नहीं, एसएसपी के पास शिकायत लेकर चला गया. इसका अंजाम उसे भुगतना पड़ा. उसकी हत्या हो गयी. बास ने जेल गेट बुलाया है. इस आदेश की अवहेलना कोई नहीं कर सका. बास यानी फहीम खान की रंगदारी की दुकान जेल से ही मजे में चली. अब उसका बेटा इकबाल बाप की भूमिका में है. अपराध के कई मामलों के उद्भेदन के बाद स्पष्ट हो गया है कि धनबाद जेल से अपराध की कई बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया गया. सूरजदेव सिंह के कुछ विरोधियों की हत्या उस समय हुई जब वह जेल में थे. तब भी जेल से अपराध का षड्यंत्र रचे जाने का आरोप लगा था. केस में षड्यंत्रकर्ता के रूप में उनका नाम भी उल्लेखित किया गया. इसके अलावा कई डाका, अपहरण, हत्या आदि अपराध को जेल से साजिश रचकर अंजाम दिया गया.

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दुखद है जेल प्रशासन और पुलिस की विफलता

जेल में छापामारी के लिए प्रशासन की कोई टीम जैसे ही मेन गेट पर पहुंचती है. खबर अंदर चली जाती है. जेल में कई ऐसी जगह है जहां मोबाइल, सिम कार्ड सहित हर आपत्तिजनक सामग्री को छुपा दिया जाता है. इसके लिए दस मिनट काफी है. इतना समय जेल का अंतिम गेट खोलते…खोलते कर्मी ले ही लेते हैं. इसके बाद भी छापे के नाम पर होता क्या है? पांच सौ सिपाहियों को लेकर भी जेल के अस्पताल, रसोई से लेकर हर सेल का कोना..कोना सर्च करना आसान नहीं. जेल के कर्मियों की मिली भगत से यहां हर काम होता है. इसलिए छापे से पहले आपत्तिजनक सामग्रियों को छुपाने में उनका सहयोग रहता है.

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जो चाहिए, कब चाहिए, सब मिलेगा बस पैसा होना चाहिए

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ऐसे कर्मी ही जेल प्रशासन के अधिकारियों के सहयोग से कैदियों की खरीद बिक्री कराते हैं. हर वार्ड का एक ठेकेदार है. उनसे वसूली करते हैं. हर सेवा का शुल्क वसूलते हैं. यहां हर सेवा वैसे ही उपलब्ध है जो बाहर मिलती है. दारू, गांजा, भांग, जो चाहिए, जब चाहिए उपलब्ध है. कई कैदियों की सेवा के लिए भी कैदी उपलब्ध कराए जाते हैं. शौचालय की सफाई से लेकर पानी भरने का काम पैसा नहीं देने वाले कैदियों से कराए जाते हैं. जेल के घटिया खाने की शिकायत बार बार लिखित तौर पर कैदियों ने की, भूख हड़ताल की पर कहीं सुनवाई नहीं हुई. जेल में गलत काम को बढ़ावा देनेवाले अफसर और कर्मियों को कैसे पकड़ा जाए और कैसे उनपर कार्रवाई की जाए इस पर अभी तक गंभीरता से शायद ही विचार किया गया है.

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कितने बार छापे पड़े धनबाद जेल में

धनबाद मंडलकारा में बीते एक साल की अवधि में चार..पांच बार छापे डाले गये. इन छापों में एक ही तरह की सामग्री बार बार मिली. अभी धनबाद जेल में विधायक संजीव सिंह, नीरज सिंह हत्याकांड के आरोपी कई शूटर और साजिश में शामिल लोग बंद हैं तो उनके विरोधी भी. ऐसे में जेल का माहौल अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है. इस दौरान रविवार 7 अक्‍टूबर की देर रात धनबाद के सिटी एसपी पीयूष पांडेय के नेतृत्व में धनबाद जेल में छापेमारी में फिर से बरामदगी हास्यास्पद ही है. अन्य छापों की तरह जेल से सुतली, चीलम, बीड़ी आदि बरामद हुआ. क्या यह प्रशासन की कार्रवाई को हास्यास्पद नहीं सिद्ध करता है.

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