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धनबाद : विधानसभा चुनाव को लेकर बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी, सिंह मेंशन व रघुकुल की विरासत संभालेंगी बहूएं

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Manoj Mishra

Dhanbad: झारखंड विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी धनबाद जिला के सिंदरी,  निरसा, बाघमारा, झरिया, धनबाद,  टुन्डी समेत सभी छह विधानसभा में बढ़ गयी है. विभिन्न राजनीतिक दलों के टिकट दावेदारी केे बीच अंदर-अंदर शह-मात का खेल भी शुरू हो चुका है.

एक-दूसरे की छवि बिगाड़ने, शिकस्त देने की कोशिश चल रही है. गुटबाजी चरम पर है. निकट भविष्य में नेताओं का अंदरूनी कलह और बढ़ सकती है.

चुनावी सरगर्मी और आरोपों-प्रत्यारोपों से बढ़ने वाली राजनीतिक तपिश से राजनीतिक दलों के दावेदार जहां अपनी गोटी सेट करने में जुट गये हैं. वहीं, सिंह मेंशन और रघुकुल की बहूएं विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा कर झरिया सीट पर मुकाबला अभी से दिलचस्प बना दिया है.

साल 2014 के विधानसभा चुनाव के बाद यह दूसरा मौका होगा जब एक ही परिवार के दो घराने आमने-सामने होंगे. लेकिन इस बार का चुनावी मुकाबला पिछले बार की तुलना में बिलकुल अलग होगा.

साल 2014 में जहां एक ही परिवार के दो घरानों से दो भाई ने चुनाव लड़ा था, वहीं साल 2019 के आसन्न विधानसभा चुनाव में दोनों घराने की दो बहूएंं चुनावी मुकाबले में दिखाई देंगी.

धनबाद का सबसे रसूखदार राजनीतिक घराना सूर्यदेव सिंह घराना के सिंह मेंशन से जहां झरिया विधायक संजीव सिंह की पत्नी रागिनी सिंह ताल ठोक रही हैं. और मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी भाजपा के टिकट पर झरिया से विधानसभा चुनाव लड़ाने के संकेत दिया हैं. वहीं रघुकुल से पूर्व डिप्टी मेयर स्व. नीरज सिंह की पत्नी पूर्णिमा सिंह को मैदान में उतारने की घोषणा कर दी गयी है.

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रघुकुल की बहू पूर्णिमा संभालेंगी नीरज की विरासत

कांग्रेस नेता पूर्व डिप्टी मेयर दिवंगत नीरज सिंह की मौत के करीब ढाई साल बाद उनकी पत्‍नी पूर्णिमा सिंह बीते गुरुवार 7 अगस्त को पहली बार सार्वजनिक रूप से किसी कार्यक्रम में शामिल हुईं. इस दौरान उन्‍होंने झरिया विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा भी कर दी.

हालांकि उनके चुनाव लड़ने की बात तो नीरज सिंह की हत्‍या के बाद से ही की जा रही थी, लेकिन इस बार उन्‍होंने खुद इसका एलान किया है. इससे पहले पूर्णिमा नीरज ने कभी भी चुनाव लड़ने की बात नहीं की.

नीरज सिंह के उत्तराधिकारी के तौर पर नीरज के छोटे भाई अभिषेक सिंह झरिया विधानसभा से चुनाव लड़ने की बात कह रहे थे. हालांकि वे यह भी कहते रहे हैं कि झरिया विधानसभा जीत ही नीरज को सच्ची श्रद्धांजलि होगी.

रघुकुल परिवार हर कीमत पर झरिया विधानसभा चुनाव जीतने की कोशिश करेगा और इसी कड़ी में रघुकुल परिवार ने झरिया विधानसभा से पूर्णिमा नीरज को चुनाव लड़ाने का फैसला किया है.

पूर्णिमा अब खुलकर सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होने लगी है. मंगलवार को भी पूर्णिमा नीरज ने सिंदरी में ब्लड डोनेशन कैंप में शिरकत किया और रक्त दान भी किया.

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सिंह मेंशन की कमान बहू रागिनी के हाथ

झरिया विधानसभा को सिंह मेंशन की विरासत कहा जाये तो अतिशयोक्ति नहीं होगी. सिंह मेंशन के संस्थापक चर्चित सूर्यदेव सिंह झरिया से चार बार विधायक बने. वे वर्ष 1977, 1980, 1985 और 1990 में विधानसभा चुनाव जीते. सिंह की मृत्यु के बाद उनके छोटे भाई बच्चा सिंह ने सिंह मेंशन की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया.

साल 2000 में सूर्यदेव सिंह बड़े बेटे राजीव रंजन के अथक प्रयासों से चुनाव जीते और झारखंड के पहले नगर विकास मंत्री भी बने. बाद में सूर्यदेव सिंह की विरासत को उनकी पत्नी कुंती सिंह ने संभाला. सूर्यदेव सिंह की पत्नी कुंती देवी वर्ष 2005 और वर्ष 2009 में विधायक बनीं.

इसके बाद वर्ष 2014 में सूर्यदेव सिंह के बेटे संजीव सिंह झरिया के विधायक बने. वे भाजपा से चुनाव जीते. उन्होंने अपने ही चचेरे भाई कांग्रेस के उम्मीदवार नीरज सिंह को पराजित किया. नीरज सिंह की 21 मार्च को हत्या हो गयी औरनीरज हत्याकांड में फंसने के बाद संजीव सिंह की राजनीतिक पारी समाप्ति की कगार पर है.

ऐसे में संजीव अपनी पत्नी रागिनी को राजनीति में आगे बढ़ाने की रणनीति पर जेल के अंदर से काम कर रहे हैं. राजनीति प्रेक्षकों के अनुसार विधायक संजीव सिंह की पत्नी रागिनी सिंह ही अब, बहुचर्चित सूर्यदेव सिंह की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाएगी. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी भाजपा के टिकट पर झरिया से विधानसभा चुनाव लड़ाने के संकेत दिए हैं.

फलस्वरूप, विधायक संजीव सिंह की पत्नी रागिनी सिंह आम तौर पर घर से सार्वजनिक और राजनीतिक कार्यक्रमों में नहीं दिखतीं थीं. लेकिन अब हर जगह दिख रही हैं. अपने ससुर दिवंगत सूरजदेव सिंह की 28 वीं पुण्यतिथि के मौके पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में भी रागिनी सक्रिय दिखीं.

उन्होंने अतिथियों और भाजपा कार्यकर्ताओं का स्वागत किया. धनबाद में आरएसएस के अभ्यास वर्ग के समापन समारोह में रागिनी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. नये भाजपा सदस्य बनाने से लेकर भाजपा के सभी कार्यक्रम में रागिनी सिंह की उपस्थिति से समर्थकों को विधायक संजीव सिंह की कमी नहीं खल रही. भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी खुलकर रागिनी का साथ दे रहे हैं.

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रागिनी या पूर्णिमा को लेकर दुविधा में झरिया की जनता

सूर्यदेव सिंह परिवार के दो धराने सिंह मेंशन और रघुकुल की दो बहुएंं रागिनी और पूर्णिमा को लेकर झरिया की जनता दुविधा में है. लोकसभा चुनाव-2019 रागिनी सिंह के लिए एक अवसर के समान आया और देखते ही देखते वह झरिया और धनबाद भाजपा की राजनीति में छा गयी.

रागिनी से झरिया की जनता सीधे- सीधे जुड़ने लगी हैं. वहीं झरिया की जनता पूर्णिमा नीरज के जज्बात को भी नकार नहीं पा रही. पूर्व डिप्टी मेयर और कांग्रेस के नेता नीरज सिंह की पहली बरसी पर नीरज की पत्नी पूर्णिमा सिंह ने पहली बार सोशल मीडिया के सहारे अपने जज्बात बयां किये थे और झरिया की जनता के साथ-साथ धनबाद के लोगों के दिलों को झकझोर दिया था.

नीरज की पत्नी पूर्णिमा सिंह के शब्दों में कुछ इस तरह से जज्बात छलके थे कि इस धारा में झरिया की जनता बह गयी थी. अब, पूर्णिमा सिंह के चुनाव लड़ने से ऊहापोह की स्थिति झरिया विधानसभा में अभी से दिखाई देने लगी है.

पूर्णिमा संभवतः कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लडेंगी. पूर्णिमा नीरज के साथ झरिया विधानसभा के लोगों का संवेदना है. वहीं सिंह मेंशन की बहू झरिया विधायक संजीव सिंह की पत्नी रागिनी सिंह के साथ झरिया के लोगों का अत्यधिक प्रेम और लगाव है.

रागिनी को लोग सिंह मेंशन के बड़े बेटे राजीव रंजन की पत्नी के तौर पर भी देखते हैं. इसलिए रागिनी के साथ लोगों का दोहरा जुड़ाव है. गौरतलब है कि झरिया विधायक संजीव सिंह ने अपने बड़े भाई की विधवा रागिनी से विवाह किया है. राजीव रंजन पुलिस फाइल में साल 2003 से अबतक लापता हैं जबकि कहा जाता है कि डान ब्रजेश सिंह ने कोल किंग सुरेश सिंह के इशारे पर कोलकता के लिलुआ में बुलाकर राजीव रंजन की हत्या की और शव को टुकड़े टुकड़े कर गंगा सागर में बहा दिया.

अगले अंक में पढ़े: सिंदरी विधानसभा में टिकट को लेकर शह और मात का खेल शुरू

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