न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

धनबाद : मकान का नक्शा पास कराने में कितना करप्शन है ? भुक्तभोगी मनोज की जुबानी

दो साल तक लड़े, क्या-क्या पापड़ नहीं बेले, नगर विकास विभाग से लेकर अधिकारियों तक को लिखते रहे, अंतिम में दी करोड़ों का नुकसान कराने का केस करने की धमकी, तब जाकर...

217

Vikash pandey

Dhanbad: यह महज संयोग है कि मनोज कुमार का नक्शा गुरुवार को धनबाद नगर निगम ने पास कर देने संबधी सूचना दी. इनका नक्शा दो साल से पास नहीं हुआ था. इसके लिए मनोज कुमार ने क्या कुछ किया यह जानकारी हैरान करनेवाली है. जानकर सवाल उठना स्वाभाविक है कि सिस्टम को करप्शन से मुक्त करने का जो दावा किया जाता है उसके विपरीत करप्शन का जाल इतना भयावह है कि लोग इसमें फंस कर त्राहि-त्राहि कर रहे हैं.

न्यूज़ विंग से बातचीत में देवघर के व्यापारी मनोज कुमार ने जो जानकारी दी, उसे हू-ब-हू पेश कर रहे हैं.

बैंक मोड़ शास्त्री नगर कच्छ गुर्जर धर्मशाला के पास बिल्डिंग बनाने के लिए नक्शा बनाने का आवेदन झमाडा में दिया था. लेकिन रिश्वत देने में असमर्थ होने की वजह से झमाडा से नक्शा पास नहीं हुआ. उसके बाद मंत्री सीपी सिंह, प्रिन्सिपल सेक्रेटरी अरूण सिंह (पूर्व नगर विकास मंत्री ) को लगभग 50 से ज्यादा ई-मेल के माध्यम से अवगत कराया. अन्त में नगर विकास के सचिव राहुल कुमार ने फोन पर आश्वासन दिया गया कि आपका नक्शा बायलॉज के तहत पास कर दिया जायेगा. लेकिन सभी के कहने पर भी नक्शा पास नहीं हुआ. क्योंकि मैंने रिश्वत नहीं दी थी.

इसे भी पढ़ें: झारखंड में विकास सिर्फ होर्डिंग और भाषण में ही नजर आता है : हेमंत सोरेन

टीवीएस सुज़ुकी की मिल चुकी थी डीलरशिप, लेकिन नक्शा नहीं मिलने से करोड़ों के मुनाफे से हुए वंचित !

 

बैंक मोड़ स्थित उस जमीन पर सुजुकी मोटरसाइकिल की डीलरशिप मिली थी. इसकी छायाप्रति नगर आयुक्त को भी मेल के माध्यम से भेज चुका हूं. लेकिन झमाडा के करप्शन बायलॉज को पूरा नहीं कर पाया, इसलिये नक्शा पास नहीं हुआ. जिससे 2 करोड़ के होनेवाले लाभ का नुकसान हुआ. टीवीएस मोटरसाइकिल की डीलरशिप ली थी. इसमें 25 लोगों को रोजगार देता और सरकार को 10 करोड़ का राजस्व देता, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. बड़े से बड़े अधिकारियों को विभिन्न माध्यमों से अवगत करवाया लेकिन रिश्वत नहीं देने से नक्शा पास नहीं हुआ. सरकार ने झमाडा को तीन बार टाइम एक्सटेंशन भी दिया, पुराने नक्शे के निष्पादन का, लेकिन रिश्वत देने में असमर्थ था. इसलिए अंत में पीजीएमएस कम्प्लेन नम्बर 1258 नगर आयुक्त को भी किया. लोकायुक्त के यहां झमाडा के एमडी शशि मंडल के खिलाफ भी कम्प्लेन लॉज करवाया था, लेकिन कोई भी जवाब नहीं दिया गया. एक्शन का रीएक्शन नहीं होना मतलब अपराध स्वीकारना ही माना जाता है. अत: उनलोगों ने इसको स्वीकार कर लिया.

इसे भी पढ़ें: न्यूज विंग ब्रेकिंग: IAS आलोक गोयल का रुका प्रमोशन- दंड तय, 1990 बैच के हैं अफसर

मंत्री सीपी सिंह को नौ बार रिमाइंडर दिया

झारखंड सरकार के नगर मंत्री सीपी सिंह को भी फोन पर अवगत कराया. उनको भी 9 बार रिमाइंडर करवाया. इसकी छायाप्रति नगर के वरीय प्रबंधक को दे चुका हूं. 4 महीने पहले अपर नगर आयुक्त महेश संथालिया को वस्तुस्थिति से अवगत करवाया फिर भी समस्या का समाधान नहीं हुआ. झारखंड बिल्डिंग बायलॉज अमेन्डमेंट 2017 के तहत यह नक्शा स्वतः ही पास है. क्योंकि उस टाईम कोई ऑब्जेक्शन नहीं किया गया और न ही किसी भी ई-मेल का जवाब दिया गया.

palamu_12

इसे भी पढ़ें: फर्जी सीआइडी बन बेरोजगार युवकों से करते थे ठगी, दो गिरफ्तार

नगर अपर आयुक्त ने उल्टे मनोज पर ही कर दी थाने में शिकायत

अपर नगर आयुक्त महेश संथालिया ने उल्टा मुझ पर ही अवैध निर्माण कराने का बैंक मोड़ थाना में मामला दर्ज करवा दिया. जबकि बिल्डिंग अभी बनी भी नहीं है. अंत में जनसूचना पदाधिकारी से आरटीआई 2005 की धारा 197 के तहत सूचना मांगी कि क्या बिना रिश्वत के नक्शा पास नहीं होगा? जनसूचना पदाधिकारी ने इसी सूचना को माडा के एमडी को ट्रांसर्फर कर दिया. इस पर भी नहीं मानने पर नगर विकास के गंगा राम टाऊन प्लानर ने सब कुछ जांच करने के बाद नक्शा पास करने की स्वीकृति दे दी. फिर भी नक्शा पास नहीं हुआ.

इसे भी पढ़ें:पलामू: एसबीआई में फर्जीवाड़ा, खाते से 98 हजार की अवैध निकासी

दो करोड़ रुपये के हर्जाना का करनेवाला था केस

2 करोड़ के हर्जाने का केस करने की सोच रहा हूं. यह भी कहना चाहूंगा सरकार से कि अगर इसी तरह इलीगल ट्रेड प्रैक्टिस होता रहा तो झारखंड का विकास कभी नहीं हो पाएगा. लोगों को रिश्वत के लिये मजबूर किया जाता रहेगा. इसको सुधारने से राज्य और देश का भला होगा. प्रधानमंत्री की योजनाओं का कोई महत्व नहीं रह जाएगा. मैंने अपनी परेशानी आपसे साथ शेयर की, ताकि सभी को हकीकत पता चले और लोग जागरूक हों.

इसे भी पढ़ें:रांची लोकसभा क्षेत्र का एक टोला, जहां सड़क नहीं, पेयजल नहीं, चुआं और झरने से प्यास बुझाते हैं…

झमाडा और धनबाद नगर निगम से नहीं मिली प्रतिक्रिया

मनोज कुमार ने इस मामले से संबंधित बहुत से दस्तावेज अपने वाट्स एप्प से भेजा है. उन्होंने अपना बयान रिकार्ड करने की अनुमति भी दी. मामले में नगर निगम के संबंधित अधिकारी ने कुछ भी जानकारी होने से इनकार किया. उन्होंने कहा कि मामले में झमाडा ही जानकारी दे सकता है. खबर लिखने तक झमाडा के संबंधित अधिकारी से संपर्क नहीं हो सका. वह अपने दफ्तर में उपलब्ध नहीं थे. बताया गया कि शाम चार से छह बजे तक साहब दफ्तर में मिलेंगे. शाम चार बजे के बाद जाने पर साहब दफ्तर में नहीं मिले. लोगों ने कहा, साहब का जब मूड होता है तो दफ्तर में आते हैं.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

%d bloggers like this: