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धनबाद : कुकुरमुत्तों की तरह उग आये हैं गर्ल्स हॉस्टल, महिला सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरते

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Manoj Mishra

Dhanbad : धनबाद सिटी में कुकुरमुत्तों की तरह उगे गर्ल्स होस्टल के संचालक महिला सुरक्षा पर गंभीरता नहीं दिखाते. गर्ल्स हॉस्टल के मालिक महिला सुरक्षा नियमों को ठेंगा दिखाते नजर आ रहे हैं. हद तो यह है कि समाज कल्याण विभाग, जिला प्रशासन, धनबाद नगर निगम के पास आंकड़े तक नहीं हैं कि धनबाद सिटी में कितनी गर्ल्स हॉस्टल हैं और उनमें कितनी महिलाएं रहती हैं.

नाम गुप्त रखने की शर्त पर एक महिला छात्रावास में रहने वाली एक महिला ने बताया कि अधिकतर हॉस्टलों के मालिक स्थानीय लोग हैं तथा उनमें रह रही महिलाओं को अधिकृत वार्डन का आश्वासन दिया जाता है. लेकिन ज्यादातर मालिकों को उसमें रह रही महिलाओं की सुरक्षा की कोई विशेष चिंता नहीं रहती.

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उसने बताया कि नियम के मुताबिक चरित्र एवं स्वास्थ्य प्रमाण पत्र लेने के बाद ही महिला छात्रावासों में वार्डन की नियुक्ति की जानी चाहिए. इसके अलावा जिला पुलिसकर्मियों को महीने में कम से कम एक बार छात्रावासों का दौरा करने का भी निर्देश है. इसके साथ ही हॉस्टल में काम करने वाले सुरक्षागार्ड से लेकर वार्डन तक सभी के लिए पहचान पत्र अनिवार्य है.

लेकिन धनबाद सिटी के अधिकतर छात्रावास इन नियमों की अनदेखी करते नजर आते हैं. नियमों की इस अनदेखी की बड़ी वजह सरकारी अधिकारियों का ढुलमुल रवैया है.

अधिकतर गर्ल्स हॉस्टल अपंजीकृत, कार्रवाई नहीं

धनबाद : कुकुरमुत्तों की तरह उग आये हैं गर्ल्स हॉस्टल, महिला सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरतेधनबाद सिटी की हाउसिंग कॉलोनी, गोल्फ ग्राउंड के आसपास, लुबी सर्कुलर रोड SSLNT कॉलेज के आसपास, मनोरम नगर, सरायढेला, हीरापुर, कंबाइंड बिल्डिंग के समीप समेत विभिन्न इलाकों में संचालित पचास से अधिक गर्ल्स होस्टल में से अधिकतर अपंजीकृत हैं. लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने इनके खिलाफ कोई कार्रवाई शुरू नहीं की है.

नियम के मुताबिक बिना लाइसेंस के छात्रावास चलाने वालों के लिए दो साल की जेल और 50 हजार रुपये के जुर्माने तक का प्रावधान है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने से हॉस्टल मालिक नियमों का जमकर उल्लंघन कर रहे हैं. सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार महिला छात्रावासों में सीसीटीवी कैमरा, 24 घंटे सुरक्षागार्ड तथा हर हॉस्टल के लिए एक महिला वार्डन की नियुक्ति अनिवार्य है लेकिन अधिकतर छात्रावासों में इनका कोई इंतजाम नहीं है.

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जिला पुलिस एवं डीसी के सहयोग से जल्द ही बिना लाइसेंस के गर्ल्स होस्टल चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने की बात धनबाद नगर निगम कहता तो है, पर कार्रवाई करता नहीं.

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गर्ल्स हॉस्टल में तमाम सुविधाओं का दावा खोखला

धनबाद : कुकुरमुत्तों की तरह उग आये हैं गर्ल्स हॉस्टल, महिला सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरतेमहिला छात्रावासों में तमाम सुविधाओं का दावा तथा विज्ञापन किये जाने के बावजूद वहां कोई सुविधा नहीं रहती. अधिकतर छात्रावासों में मेडिकल किट, लिफ्ट तथा सीसीटीवी कैमरे जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी इंतजाम नहीं है.

हाउसिंग कॉलोनी स्थित एक छात्रावास में रहने वाली एक कामकाजी महिला ने बताया कि उसे तीसरे माले पर कमरा आवंटित किया गया है लेकिन हॉस्टल में लिफ्ट तक नहीं है. इसके अलावा यहां मिलने वाला खाना खाने लायक नहीं रहता.

वहीं लगभग दो साल से एक हाउसिंग कॉलोनी स्थित गर्ल्स हॉस्टल में रह रही एक युवती ने बताया कि अभी तक वह पांच से अधिक छात्रावास बदल चुकी है लेकिन हर जगह उसे सुविधाओं का टोटा ही मिला है. वहीं एक अन्य हॉस्टल में रहने वाली महिलाओं की शिकायत है. कई छात्रावासों के मालिक किराया तो लेते हैं लेकिन रसीद देने से कतराते हैं. इसके अलावा कई अधिक किराया देकर कम की रसीद देते हैं.

हॉस्टल में रह रही कई महिलाओं की शिकायत यह भी है कि मात्र 400 वर्गफुट के कमरे में 6-8 महिलाओं को ठहराया जाता है. मनोरम नगर और हीरापुर तथा कंबाइंड बिल्डिंग के समीप गर्ल्स होस्टल में रहने वाली कामकाजी महिलाओं एवं छात्राओं ने बताया कि हॉस्टल में केवल कमरा ही नहीं, बाथरूम भी शेयर करना पड़ता है. कहा कि 10 लोगों के बीच केवल दो बाथरूम हैं. कमरे की हालत इतनी दयनीय है कि कोई एक कदम भी आराम से नहीं टहल सकता. इसके अलावा सीसीटीवी कैमरे का इंतजाम भी संदेहास्पद है.

घटनाएं हो चुकी हैं फिर भी सजग नहीं

धनबाद : कुकुरमुत्तों की तरह उग आये हैं गर्ल्स हॉस्टल, महिला सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरतेकेस स्टडी 01 : एक महिला कॉलेज में पढ़ने वाली पश्चिम बंगाल की छात्रा ने कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष मनोज सिंह पर छेड़खानी का आरोप लगाया. महिला थाना को दिये गये आवेदन में छात्रा ने कहा है, “मैं बेकारबांध मनोरम नगर में रहती हूं. 20 मार्च 2019 की रात 1:30 बजे मकान मालिक मनोज सिंह ने मेरे कमरे के दरवाजे को खटखटाया और उसके बाद पैसे देकर लुभाने की कोशिश की. मनोज की हरकत देख मैं रोने लगी. मैंने शोर मचाते हुए पास के कमरे में रहने वालों को बुलाया.

आवाज सुनकर हॉस्टल में काम करने वाली सिया और मनोज सिंह की बेटी दौड़कर आयी. घटना के बारे में उन्हें बताया. इसके बाद अपने कमरे से निकलकर पास में रह रही दूसरी छात्राओं के रूम में चली गयी.”

दूसरे दिन छात्र संगठन से जुड़े नेता छात्रा को लेकर महिला थाना पहुंचे. छात्रा ने घटना की लिखित शिकायत की.

केस स्टडी 02 : कंबाइंड बिल्डिंग के समीप एक गर्ल्स हॉस्टल से 11 मार्च 2018 की रात धनबाद के नूतनडीह का बिन्नी नामक 25 वर्षीय युवक पकड़ा गया. धनबाद थाना में फोन कर रात को हॉस्टल में युवक के घुसने की सूचना दी गयी. धनबाद थाना के एसआइ आनंद खंडैत मौके पर पहुंचे व युवक को पकड़ लिया.

युवक ने कहा कि वह संबंधित युवती का भाई है. पुलिस को झांसा देकर वह निकलने की कोशिश कर रहा था. हॉस्टल की अन्य लड़कियों की शिकायत पर धनबाद थाना की पुलिस उसे पकड़ थाना लायी. थाना में बांड भरवाकर निजी मुचलके पर छोड़ दिया. युवक बिन्नी रात हो या दिन हॉस्टल में अपनी प्रेमिका के पास जाकर घंटों बैठा रहता था. शहर में यह मामला चर्चा का विषय बना रहा लेकिन जिला प्रशासन नहीं जगा.

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इन मानकों और नियमों के तहत जांच जरूरी

–  सभी महिला छात्रावासों के मुख्य प्रवेश द्वार के साथ-साथ मुख्य स्थानों पर उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाये गये हैं या नहीं, ताकि रात की रिकॉर्डिंग भी की जा सके.

–  महिला छात्रावासों में अग्निशामक यंत्र की व्यवस्था है या नहीं?

–  महिला छात्रावास एवं परिसर में बिजली सुरक्षा से संबंधित मानकों का अनुपालन किया गया है या नहीं?

–  सभी महिला छात्रावासों में फर्स्ट एड किट की आवश्यक रूप से व्यवस्था है या नहीं?

–  प्रत्येक महिला छात्रावास में पर्याप्त मात्रा में पीने का पानी, पानी की टंकी, स्नानागार, शौचालय की व्यवस्था है या नहीं?

–  छात्रावास के प्रबंधक, वार्डन व छात्रावास में कार्यरत अन्य कर्मियों का पुलिस सत्यापन है या नहीं?

–  सभी महिला छात्रावासों के प्रवेश द्वार पर रजिस्टर है या नहीं. उसका नाम, पता है या नहीं?

–  छात्राओं से मिलने के लिए आने वाले परिजनों के लिए अलग से विजिटिंग रूम है या नहीं?

–  महिला छात्रावास संचालकों के हॉस्टल मैनेजमेंट कमेटी का गठन हुआ है या नहीं?

–  सभी महिला छात्रावासों में कार्यरत सभी कर्मियों (अधीक्षक, वार्डन, संचालक सहित) की सूची प्रशासन को उपलब्ध करायी गयी है या नहीं?

–  सभी महिला छात्रावासों में डिसप्ले बोर्ड है या नहीं. डिसप्ले बोर्ड में थाना, महिला हेल्पलाइन, पुलिस नियंत्रण कक्ष इत्यादि के साथ-साथ छात्रावास अधीक्षक एवं वार्डन, कर्मचारी का नाम एवं मोबाइल नंबर है या नहीं?

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