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धनबादः प्रशासन के नाक के नीचे बंद खदानों से रोजाना होती है कोयले की चोरी

Dhanbad: जिले के बंद कोयला खदानों से कोयले की चोरी धड़ल्ले से जारी है. स्थानीय पुलिस की मिली भगत से अवैध कोयले की तस्करी चरम पर है. धनबाद झरिया कोयलांचल में ऐसे कई बंद खदानों से स्थानीय लोग अपनी जान का जोखिम उठाकर कोयला चुराते हैं.

ये मामला अलकडीहा थाना क्षेत्र के एटी देव प्रभा बंद आउट सोर्सिग के पारबाद एवं पहाड़ीगोड़ा के बंद पड़े खदानों का है. जहां धड़ल्ले से कोयले का अवैध खनन किया जा रहा है. इसमें अलकडीहा पुलिस की मिली भगत होने की भी बात कही जा रही है.

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सुनियोजित तरीके से होती है चोरी

इस खदान में लगभग 200 महिला और पुरुष, 50 से 100 मीटर खदान के अंदर घुसकर गैंता, कुल्हाड़ी जैसे समानों से कोयले का खनन करते हैं.

फिर उसे बोरे में भर कर खदान के ऊपर लाते हैं. और फिर यहां से दूसरे गैंग के लोग इस कोयले को साइकिल या स्कूटर में लाद कर बड़े कोयला माफिया के पास ले जाते हैं.

जानकारी के मुताबिक, ये बड़े कोयला माफिया इस अवैध कोयले को प. बंगाल के चिलयामा आदि स्थानों पर ये भेजते हैं. साइकिल और स्कूटर से कोयला ढो रहे लोगों में स्थानीय पुलिस का जरा भी खौफ नहीं दिखता.

आरोप है कि इसके एवज में स्थानीय प्रशासन को मोटी रकम चुकायी जाती है. कोयला चोरी में लगे लोगों की मानें तो रोजाना लगभग 10 से 20 हजार की वसूली निजी लोगों के द्वारा यहां की जाती है. और रात लगभग 2:00 बजे से सुबह के 10:00 बजे तक प्रतिदिन सैकड़ों टन कोयले का अवैध खनन किया जाता है.

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एसएसपी के निर्देश की धज्जियां उड़ाती अलखडीहा पुलिस

आपको बता दें कि एसएसपी ने सभी थानों को कड़े निर्देश दिए थे कि किसी भी थाना क्षेत्र में अवैध उत्खनन नहीं होना चाहिए. और अगर अवैध उत्खनन हुआ तो इसकी जवाब दही उस थाना के प्रभारी की होगी.

लेकिन कोयला चोरी का वीडियो देख आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि किस तरह अलखडीहा पुलिस एसएसपी के निर्देश की धज्जियां उड़ा रही है.

वही इस मामले में अलकडीहा थाना प्रभारी ने कहा कि ये महिलाएं घर के लिए हल्का-फुल्का कोयला ले जाती है. इसके बावजूद पुलिस इन्हें खदेड़ती है, लेकिन पूरी तरह अंकुश नही लगा पाती है. साथ ही प्रभारी ने पैसे लेने की बात को पूरी तरह से गलत बताया.

ना प्रशासन का खौफ, ना जान की परवाह

इन खदानों में अवैध उत्खनन करने वालों को प्रशासन का जरा भी खौफ नहीं है. बड़ी संख्या में अवैध उत्खनन करने वाले खदानों के अंदर जाकर कोयला काटते हैं.

इस दौरान इनकी जान पर भी खतरा बना रहता हैं. ऐसे अवैध खनन के दौरान चाल धंस गयी तो इनकी मौत भी हो सकती है. और ऐसे हादसे होते भी हैं. बावजूद इसके जिला प्रशासन और बीसीसीएल की नींद खुलती हैं.

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