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Dhanbad: गांजा तस्कर बता जेल भेजने के मामले में CID ने कोयला तस्कर राजीव राय को भेजा जेल

Dhanbad: धनबाद में ईसीएल कर्मी को गांजा तस्कर बताकर जेल भेजने के मामले की जांच लगभग पूरी हो चुकी है. इस मामले में सीआइडी ने पश्चिम बंगाल के कोयला तस्कर राजीव राय को जेल भेज दिया.

सीआइडी के एडीजी अनिल पाल्टा द्वारा दो दिन तक पूछताछ के बाद राजीव राय को रविवार सुबह धनबाद जेल भेज दिया गया.

गौरतलब है कि एडीजी अनिल पाल्टा ने शुक्रवार और शनिवार को इस कांड में शामिल लोगों से पूछताछ की. पाल्टा ने बताया कि इस मामले धनबाद के पूर्व एसएसपी कौशल से पूछताछ की जायेगी.

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कई लोगों से की गयी पूछताछ

निरसा में गांजा तस्करी में निर्दोष को फंसाये जाने का मामले में सीआइडी के एडीजी अनिल पाल्टा शुक्रवार को धनबाद पहुंचे थे.

जेल से नीरज तिवारी, सुनील चौधरी और रवि ठाकुर को रिमांड पर लेकर सर्किट हाउस लाया गया था. मामले का सूत्रधार बताये जा रहे राजीव राय को भी सीआइडी सर्किट हाउस लायी थी.

वहीं एडीजी ने तीनों आरोपियों के साथ निरसा एसडीपीओ व तत्कालीन थानेदार, रेड में शामिल पुलिसकर्मियों से उनकी भूमिका के बारे में पूछताछ की.

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कोयला तस्करी में रुकावट बने ECL कर्मी को फंसाने के लिए रची थी साजिश

गांजा तस्करी के फर्जी मामले में निर्दोष ईसीएल कर्मी चिरंजीत घोष को जेल भेजने के मामले की जांच का प्रभार तत्काल प्रभाव से सीआइडी ने अपने जिम्मे लेने के बाद इसमें तेजी लायी.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जांच में यह खुलासा हुआ है कि जिस कार में 39.300 किलो गांजा रखा गया था वह पलामू के एक कबाड़ी कारोबारी की थी.

पूरी योजना एक पुलिस अधिकारी की देखरेख में बनायी गयी थी ताकि कोयला तस्करी के रास्ते में रुकावट बने चिरंजीत को रास्ते से हटाया जा सके.

सीआइडी जांच में यह खुलासा हुआ कि दो लड़के नीरज तिवारी और रवि ठाकुर ने कार में गांजा रखा था. कार को कबाड़ी वाले के एक चालक ने धनबाद पहुंचाया.

उसके बाद वहां एक पुलिस अधिकारी के कहने पर निरसा में कार को पकड़ा गया था.

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सीआइडी ने अपने जिम्मे ली है जांच

गांजा तस्करी के फर्जी मामले में निर्दोष ईसीएल कर्मी चिरंजीत घोष को धनबाद पुलिस ने जेल भेज दिया था. 20 मई को इस कांड की जांच का प्रभार तत्काल प्रभाव से सीआइडी ने अपने जिम्मे ले लिया था.

मामले में धनबाद के पुलिस अफसरों पर आरोप है कि किसी के कहने पर ईसीएल कर्मी को फर्जी मामले में फंसाया गया था.

सवाल उठ रहा है कि किसके कहने पर? एक सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर गांजा कहां से लाया गया? पुलिस ने खुद रखा या किसी दूसरे तस्कर से मंगाया?

इस कांड के अनुसंधान के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया है जिसका नेतृत्व डीएसपी रैंक के पदाधिकारी कर रहे हैं. इंस्पेक्टर, दारोगा और एएसआइ रैंक के पदाधिकारी इस कांड में सहयोग कर रहे हैं.

क्या है मामला

25 अगस्त, 2019 को धनबाद के निरसा में पुलिस ने एक सेवरले गाड़ी से 39.300 किलो गांजा बरामद किया था. इस मामले में धनबाद पुलिस ने ईसीएल कर्मी चिरंजित घोष को गांजा तस्करी का किंगपिन बताते हुए आरोपी बनाया था.

धनबाद पुलिस ने इस मामले में चिरंजीत को गिरफ्तार कर जेल भी भेज दिया था. चिरंजीत के जेल भेजे जाने के बाद उसकी पत्नी ने तत्कालीन डीजीपी केएन चौबे समेत राज्य पुलिस के अन्य अधिकारियों से मुलाकात कर इंसाफ की गुहार लगायी थी.

चिरंजीत की पत्नी के मुताबिक, उसके पति को बंगाल पुलिस के एक अधिकारी ने साजिश कर फंसाया था. जिसके बाद मुख्यालय स्तर से मामले की जांच करायी गयी.

जांच में यह साबित हुआ था कि चिरंजीत को गलत तरीके से फंसा कर जेल भेजा गया था. पुलिस ने पोल खुलने के बाद कोर्ट में तथ्यों की भूल बताते हुए चिरंजीत को रिहा कराया था.

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