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#CAA और #NRC का विरोध : वासेपुर में 10वें दिन भी धरना, लोगों ने कहा- विधायक को समझना चाहिये कि वे सबके विधायक हैं

Dhanbad : सीएए,  एनपीआर और एनआरसी के खिलाफ वासेपुर में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना रविवार को दसवें दिन भी जारी रहा. धरना में कई राजनीतिक दल एवं संगठन के अनेकों दिग्गजों ने अपनी उपस्थित दर्ज करायी.

Jharkhand Rai

और इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया विशेष रूप से महिलाओं की उपस्थित अधिक रही. इस दौरान धनबाद विधायक राज सिन्हा द्वारा दिया गया बयान कि “सीएए का विरोध करने वालों को भारत में रहने का कोई हक नहीं है, इस पर लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी.

उन्होंने राज सिन्हा के इस बयान को शर्मनाक करार दिया.

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Samford

एक बार भी विधायक ने नहीं ली सुध

धरने के दौरान हाथों में विरोधी नारे लिखे तख्तियां लिये लोग.

लोगों ने विधायक के बयान पर आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि मोदी सरकार द्वारा निर्माण किये जा रहे भारत के नये संविधान का विरोध करने वालों को ये भारत से जाने का उपदेश देते हैं, जिसकी जितनी भी आलोचना की जाये, कम है.

वहीं लोगों ने बताया कि राज सिन्हा ने जिस प्रकार से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को नसीहत दी कि वे सिर्फ एक वर्ग के मुख्यमंत्री नहीं हैं. ठीक उसी प्रकार से राज सिन्हा को भी समझना चाहिये की वे भी किसी एक समुदाय के विधायक नहीं हैं, वर्ना पिछले 10 दिनों से धरना पर बैठी जनता की सुध लेने जरूर आते.

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केवल दिखावा और ढोंग करते हैं विधायक

लोगों ने बताया कि विधायक तो केवल चुनाव के समय जल्दबाजी में पुल का शिलान्यास कर लोगों का वोट लेने आते हैं. उन्होंने कहा कि केवल दिखावा और ढोंग करने के लिए पवित्र कुरान की आयत अपने पास रखते हैं और जताते हैं कि वे मुस्लिमों से भी प्यार करते हैं.

जबकि अल्पसंख्यकों से उन्हें हमदर्दी होती तो वे धरना स्थल पर जरूर आते और लोगों की बात सुनते. जबकि वे पूरे धनबाद के विधायक हैं. निश्चित रूप से उनका ये आखिरी कार्यकाल है और जनता उनके घमंड को जल्द ही चकना चूर करेगी.

बता दें कि सीएए, एनपीआर और एनआरसी के विरोध में बिना अनुमति के निकाले गये शांतिपूर्वक जुलूस के कारण अली अकबर, हाजी जमीर आरिफ, शादाब आलम, नौशाद खान,  सैय्यद मोहम्मद शाहबाज, सैय्यद मोहम्मद साजिद,  गुलाम सरवर के रूप में सात लोगों को नामज़द अभियुक्त बनाया गया.

3000 लोगों पर हुआ है मुकदमा

साथ ही 3000 अज्ञात लोगों पर विभिन्न धाराओं के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया है, जिससे जनता में काफी नाराजगी है. हालांकि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए झारखंड सरकार को भी हस्तक्षेप करना पड़ा और राजद्रोह की धारा को हटाने का आदेश दिया गया.

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