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धनबादः सड़क चौड़ीकरण के नाम पर काटे 416 पेड़, अब हो रही खानापूर्ति

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Dhanbad: सिटी सेंटर-बरवाअड्डा सड़क चौड़ीकरण के नाम 416 पेड़ काट दिये गये. ये पेड़ सड़क के दोनों तरफ लगे हुए थे. इन पेड़ों को सड़क चौड़ीकरण में बाधा बता कर काट दिया गया. जबकि ये वृक्ष काफी वर्षों से लगे थे. काफी हरे-भरे और बड़े थे. ये वृक्ष पर्यावरण के संरक्षण के लिए तो उपयोगी थे ही इससे शहर के सड़कों की शोभा भी बढ़ती थी. यहां अक्सर मुसाफिर गर्मी के दिनों में रुक कर छांव का आनन्द लेते थे. 5.5 किलोमीटर लम्बी सिटी सेंटर-बरवाअडडा सड़क के फोर लेन के निर्माण में लगभग 33 करोड़ खर्च किये गये.

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कंक्रीट की सड़क पर कैसे बढ़ेंगे पौधे ?

हरे-भरे पेड़ काटने के बाद अब पर्यावरण संरक्षण के नाम पर लोगों को महंगा धोखा दिया जा रहा है. इस सड़क के बीच में करीब एक करोड़ रुपये खर्च कर सीमेंट का करीब एक फुट ऊंचा और करीब तीन किमी लंबा और चार फुट चौड़ा स्थान बनाया गया है. इसमें ऊपर से थोड़ी मिट्टी भरी गयी है. अंदर रोड का मलबा भर दिया गया है. इसके करीब नौ ईंच नीचे पक्की सड़क है. अब इस स्थान में पर्यावरण संरक्षण के नाम पर आम, अशोक सहित अन्य पेड़ों के पौधे लगाये जा रहे हैं. सवाल उठता है कि क्या नौ ईंच मिट्टी में आम का पेड़ लग जाएगा? अशोक का पेड़ लग जाएगा? यह खानापूर्ति है. इसका प्रमाण यह है कि वहां लगाये गये पौधे मात्र तीन दिनों में ही सूख गये हैं.

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वन विभाग की पहल का लोगों को इंतजार

कोई शक नहीं कि विभाग ने पेड़ लगानेवाले स्थान के नीचे की सड़क हटाने के कार्य को प्राक्कलन में शामिल किया होगा. अगर ऐसा नहीं किया तो यह दिमागी दिवालियापन ही है. इस मामले में वन विभाग की पहल का लोगों को इंतजार है. इसलिए कि पेड़ काटने की अनुमति के साथ वन विभाग उससे अधिक पेड़ लगाने का निर्देश देता है. वैसे धनबाद में पर्यावरण के तथाकथित रक्षक भी सैकड़ों में हैं जो पेड़ लगाते हुए सेल्फी लेकर इसे सोशल मीडिया पर अपलोड करना अपना पुनीत कर्तव्य समझते हैं. ऐसे पर्यावरण के रक्षक ऐन मौके कहां चले गये? प्रशासन क्यों पर्यावरण की रक्षा के प्रति उदासीन है. नाक के नीचे चल रहे इस बड़े घोटाले पर सबकी चुप्पी हैरान करनेवाली है.

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