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8 घंटे की ड्यूटी का डीजीपी का आदेश फेल, वर्क लोड और तनाव में परेशान जवान कर रहे आत्महत्या

Saurav Singh

Jharkhand Rai

Ranchi: झारखंड के सिपाहियों से हफ्ते में छह दिन और रोजाना 8 घंटे ड्यूटी लेने से संबंधित डीजीपी का आदेश पूरी तरह फेल नजर आता है.

डीजीपी डीके पांडेय ने 5 फरवरी 2019 को ये आदेश जारी किया था. लेकिन वर्तमान में हालात ये है बढ़ते वर्क लोड और मानसिक दबाव के चलते जवान आत्महत्या कर रहे हैं.

पिछले 4 महीने के दौरान एक प्रशिक्षु दारोगा और 3 जवान ने खुद को गोली मार ली. जिसमें प्रशिक्षु दारोगा और दो जवान की मौत हो गई, वहीं एक घायल हो गए थे.

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जवानों को नहीं मिल रही छुट्टी

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, झारखंड पुलिस के जवानों को पिछले दो महीनों से छुट्टियां नहीं मिल रही है. बताया जा रहा है कि चुनाव को देखते हुए सभी जवानों की छुट्टियां रद्द करने के आदेश संबंधित पत्र तो जारी कर दिया गया था.

लेकिन चुनाव खत्म हो जाने के बाद भी जवानों को छुट्टी नहीं दी जा रही है. ऐसे में लगातार जवानों को काम करना पड़ रहा है, जिसके वजह से जवान मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं.

बेहद विषम परिस्थितियों में ड्यूटी करते हैं जवान

सामने आयी आत्महत्या की घटनाओं पर अगर गौर करे तो पता चलता है कि सभी जवान इस दौरान ड्यूटी पर थे. आत्महत्या का कारण कुछ भी हो, लेकिन यह हैरान करने वाली प्रवृत्ति है.

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परिजनों से दूर रहकर कठोर ड्यूटी करने वाले जवान बेहद विषम परिस्थितियों में रहते हैं. पुलिस के जवान अक्सर तनाव में रहते हैं. इसके पीछे कई कारण गिनाए जा सकते हैं.

पिछले कुछ सालों में आत्महत्या और साथी जवान को गोली मार देने की वारदात भी हुई हैं. लंबे समय तक अपने परिवारों से दूर रहते हैं.

ऐसे में उन पर तनाव हावी हो जाता है. ऐसे हालात में पुलिस विभाग को उन कारणों की पड़ताल करनी चाहिए, जिसकी वजह से जवान हत्या या आत्महत्या जैसे कदम उठाते हैं.

आठ घंटे और सप्ताह में छह दिनों की ड्यूटी वाली बात हवा-हवाई

सिपाही और हवलदार स्तर के पुलिसकर्मियों के लिए रोजाना आठ घंटे और सप्ताह में छह दिनों की ड्यूटी वाली बात हवा-हवाई साबित हो गई. डीजीपी के इस आदेश के चार महीने बीत जाने को हैं,

लेकिन इस आदेश का पालन ग्राउंड स्तर पर नहीं दिखा. इसकी सबसे बड़ी वजह है, पुलिसकर्मियों की कमी. जब एक शिफ्ट में ही पुलिसकर्मी कम पड़ रहे हैं तो तीन शिफ्टों में ड्यूटी कर इस आदेश का पालन करवाया जाना मुमकिन कैसे होगा.

वहीं डीजीपी के इस आदेश के अनुपालन को लेकर सवाल करने पर अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं.

कहां-कितने घंटे ड्यूटी कर रहे जवान

थानों में मुंशी सुबह आठ बजे से लेकर रात के 10 से 11 बजे तक ड्यूटी करते नजर आ रहे हैं. थानेदार के बॉडीगार्ड सुबह आठ बजे या थानेदार के निकलने के अनुसार, रात के दो बजे या पूरी रात तक ड्यूटी कर रहे हैं.

विशेष छापेमारी में निकले पुलिसकर्मी एक से दो दिनों तक बाहर रहते है. वहीं पेट्रोलिंग में लगे जवान 10 से 12 घंटे की ड्यूटी कर रहे हैं.

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पिछले 4 महीने में चार घटनाएं

6 फरवरी 2019- हेरहंज थाना क्षेत्र में स्थापित सीआरपीएफ की 11वीं बटालियन कैंप में तैनात हवलदार वीरेंद्र सिंह रावत ( 50 वर्ष) ने खुद ही गोली मारकर अपनी जान दे दी थी.

सुबह 9:30 बजे अपने बैरक में रखे गए राइफल से गोली मार ली. जिससे तत्काल ही उनकी मौत घटनास्थल पर ही हो गई थी.

14 अप्रैल 2019- सदर थाना गुमला में पदस्थापित प्रशिक्षु दारोगा अनिल सिंह मुंडा ने रविवार की शाम में 5 बजे करीब थाना परिसर स्थित आवास में फांसी लगाकर आत्महत्या कर लिया. प्रशिक्षु दारोगा मूल रूप से सिल्ली का रहने वाला था.

आनन-फानन में पुलिस के जवानों ने अनिल मुंडा को इलाज हेतु सदर अस्पताल लाया, जहां जांच के बाद चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

1 मई 2019- जैप-4 के जवान रोशन भेंगरा ने अपने एक साथी जवान की बंदूक से खुद के पेट में गोली मार ली. जैप-4 स्थित शस्त्रागार में देर रात रोशन ने गोली मारकर आत्महत्या की कोशिश की. जिसके बाद उसे बोकारो जेनरल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था.

26 मई 2019- पालकोट थाना में पदस्थापित जैप हवलदार संतोष कुमार महतो ने खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली. हवलदार ने अपने सर्विस इंसास रायफल से खुद को तीन गोली मारी थी.

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