न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

31 मई को रिटायर होंगे DGP डीके पांडेय, इनके दो बड़े वादे रह गए अधूरे

1,089

Ranchi : झारखंड के डीजीपी डीके पांडेय 31 मई को रिटायर हो रहे हैं. लेकिन उनके द्वारा अपने कार्यकाल में किए गए दो बड़े वादे अधूरे रह गए. जहां डीजीपी डीके पांडेय ने झारखंड को नक्सल मुक्त करने का दावा किया था. सात ही नागरिकों की सुरक्षा को देखते हुए झारखंड पुलिस ने आपके द्वार कार्यक्रम की शुरुआत की थी. लेकिन ये दोनों किए गए दावे अधूरे रह गए.

गौरतलब है कि झारखंड के वर्तमान डीजीपी डीके पांडेय का 31 मई को कार्यकाल खत्म हो रहा है. 25 फरवरी 1984 बैच के आईपीएस डीके पांडेय ने राज्य के 11वें डीजीपी के रूप में पदभार ग्रहण किया था. उन्होंने तत्कालीन डीजीपी राजीव कुमार का स्थान लिया था. डीजीपी डीके पांडेय को तीन महीने का कार्यकाल विस्तार मिलने की भी चर्चा थी लेकिन ऐसा नहीं हो पाया.

इसे भी पढ़ें- स्मृति ईरानी के करीबी सुरेंद्र सिंह की गोली मारकर हत्या, परिवार से मिलने पहुंची

झारखंड पुलिस आपके द्वार कार्यक्रम हुआ फेल

16 जनवरी 2017 को झारखंड के डीजीपी डीके पांडेय ने ‘पुलिस आपके द्वार कार्यक्रम’ की शुरूआत की थी. राजधानी रांची के 20 मोहल्लों से शुरु हुए इस कार्यक्रम को लेकर डीजीपी डीके पांडेय ने कहा था कि आज का दिन रांची और झारखंड की सुरक्षा के लिए मील का पत्थर साबित होने वाला है.

सुरक्षा की दृष्टि से यह पहल की गई है. रांची और राज्य सुरक्षित होगा, तभी झारखंड विकास करेगा. कार्यक्रम की शुरुआत हुई तो लगा कि राजधानी में अपराध पर लगाम लगेगा. लेकिन मौजूदा वक्त में बढ़ते अपराध के आंकड़ें यही दर्शाते हैं कि ‘पुलिस आपके द्वार कार्यक्रम’ विफल हो रहा है. अपराधियों के बढ़ते हौसलों से राजधानी और राज्य वासियों
में असुरक्षा की भावना बढ़ी है.

इसे भी पढ़ें- नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर पूरे भारत को गर्व : रघुवर दास

अफसर के बदलते ही अभियान बंद

पुलिस विभाग में जब भी अधिकारियों का तबादला होता है उसके साथ ही उनके द्वारा चलाए जा रहे सारे कार्यक्रम भी ठप्प हो जाते हैं. पुलिस आपके द्वार कार्यक्रम की शुरुआत इसलिए की थी कि पुलिस और पब्लिक मिलकर समस्याओं का समाधान करेंगे.

इसके लिए शक्ति कमांडो और बीट अफसर को ट्रेनिंग दी गई. पुलिस व मोहल्ला समिति के साथ दोस्त बनकर अपराधियों में खौफ पैदा करने की योजनाएं बनाई गई. लेकिन जैसे ही अधिकारियों की पूरी टीम धीरे-धीरे बदलती गई सारे के सारे कार्यक्रम फेल होते चले गए.

इसे भी पढ़ें- बिहार में सबसे अधिक वोटरों ने दबाया नोटा, जानें कहां कितने लोगों ने चुना नोटा का विकल्प

नक्सल मुक्त झारखंड का दावा हुआ फेल

डीजीपी डीके पांडेय ने 2016 में घोषणा की थी दिसंबर 2017 में पूरे झारखंड राज्य से नक्सलियों का सफाया हो जाएगा. जबकि ये मुमकिन नहीं हो पाया और ये डेडलाइन एक साल बढ़ गयी. इसके बाद साल 2017 में राज्य को उग्रवाद से मुक्त कराने का दावा करने वाले राज्य के पुलिस महानिदेशक डीके पांडेय ने दावा किया कि साल 2018 के अंत तक राज्य को पूरी तरह से नक्सल मुक्त कर दिया जायेगा. लेकिन ये भी दावा फेल हो गया. झारखंड में अभी भी नक्सली संगठन समय-समय पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रहे हैं.

इसे भी पढ़ें- दस सालों में 44 प्रतिशत बढ़ी करोड़पति व आपराधिक पृष्ठभूमि वाले सांसदों की संख्या

31 मई को डीजीपी का कार्यकाल हो रहा समाप्त

झारखंड के वर्तमान डीजीपी डीके पांडेय का कार्यकाल 31 मई को खत्म हो रहा है. ऐसे में डीजीपी के चयन के लिए तीन नामों का पैनल तय हो गया है. जिनमें वीएच देशमुख, केएन चौबे और नीरज सिन्हा शामिल है.

हालांकि सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक डीजीपी बनने की रेस में तीनों में से केएन चौबे और नीरज सिन्हा सबसे आगे चल रहे हैं. नियुक्ति को लेकर 16 मई को यूपीएससी में मुख्य सचिव और डीजीपी के साथ बैठक हुई थी.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like
क्या आपको लगता है हम स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता कर रहे हैं. अगर हां, तो इसे बचाने के लिए हमें आर्थिक मदद करें.
आप अखबारों को हर दिन 5 रूपये देते हैं. टीवी न्यूज के पैसे देते हैं. हमें हर दिन 1 रूपये और महीने में 30 रूपये देकर हमारी मदद करें.
मदद करने के लिए यहां क्लिक करें.-

you're currently offline

%d bloggers like this: