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मनरेगाकर्मियों की हड़ताल से ठप हुआ विकास कार्य

राज्यभर के 7000 मनरेगाकर्मी हैं हड़ताल पर, 50 विधायकों ने दिया समर्थन

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Ranchi : राज्य की सबसे बड़ी योजना को संचालित करनेवाले मनरेगाकर्मी 16 नवंबर से अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चल गये हैं. इससे राज्यभर में विकास कार्य ठप पड़ गये हैं. पिछले कुछ सालों से लगातार आंदोलनरत मनरेगाकर्मी पिछले दो माह से सरकार से अपनी मांगों को लेकर वार्ता करना चाह रहे थे, लेकिन सरकार की ओर से इनकी मांगों को लेकर किसी तरह की पहल नहीं की गयी. नतीजतन मनरेगाकर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गये. बता दें कि राज्यभर में लगभग 7000 मनरेगाकर्मी हैं. ऐसे में हड़ताल का एक दिन होने पर ही मनरेगा से जुड़े कई कार्य जैसे डोभा निर्माण, सड़क निर्माण समेत अन्य काम ठप पड़ गये हैं.

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एक दिन में 25139 लोगों को नहीं मिला काम

मनरेगा के एमआईएस रिपोर्ट के अनुसार एक दिन की हड़ताल से मानव रोजगार सृजन में काफी कमी आयी है. पहले दिन लगभग 25139 लोगों को राज्य भर में काम नहीं मिला. 15 नवंबर को योजना के तहत राज्य में 118454 लोगों को काम मिला था. वहीं, 16 नवंबर को 93315 लोगों को रोजगार मिला. आंकड़ों के अनुसार एक दिन की हड़ताल से रोजगार सृजन में 25139 की कमी रिकॉर्ड की गयी.

विकास कार्य के साथ लिये जाते हैं अन्य कार्य

मनरेगा श्रमिकों के साथ इससे जुड़े अन्य कर्मचारी भी हड़ताल पर हैं. इनमें बीपीओ, जेई, एई, लेखा सहायक, कंप्यूटर सहायक, रोजगार सेवक शामिल हैं. वर्तमान में बीपीओ को 18,000 रुपये दिये जाते हैं, जबकि यह पद बीडीओ के समान होता है, वहीं इनसे न सिर्फ मनरेगा विकास कार्य, बल्कि ग्रामीण विकास विभाग के कार्य, पीएम आवास योजना के कार्य, फाइनेंस, चुनाव आदि के कार्य भी लिये जाते हैं.

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मनरेगाकर्मियों की मुख्य मांग

मनरेगाकर्मियों की मांग है कि उन्हें वित्त आयोग की ओर से जो राशि दी गयी थी, उसका उपयोग करने दिया जाये. 14 विभागों के अधिकार पंचायतों को दिये गये, 14वें वित्त आयोग की राशि सभी जिलों में आवंटित करायी जाये समेत अन्य मांगों को लेकर राज्यभर के मनरेगाकर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं.

मनरेगाकर्मियों के दम पर पुरस्कृत होती रही सरकार

झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के रांची जिला अध्यक्ष निरोज लकड़ा ने कहा कि मनरेगाकर्मी योजना लागू होने के बाद से देश के विकास में योगदान दे रहे हैं, लेकिन सरकार ने मनरेगाकर्मियों का सिर्फ शोषण किया है. मनरेगाकर्मियों के बूते ही सरकार केंद्र में पुरस्कृत होती रही है, फिर भी मनरेगाकर्मियों की मांग से अंजान बन रही है. ऐसे में जब तक कर्मियों की मांगें पूरी नहीं होती हैं, हड़ताल जारी रहेगी.

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50 विधायकों ने दिया समर्थन

मनरेगाकर्मियों की मांग को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के 50 विधायकों ने अपना समर्थन दिया है. इन विधायकों में ढुल्लू महतो, अनंत कुमार ओझा, अमित मंडल, मेनका सरदार, कुणाल षाड़ंगी, प्रदीप यादव, विमला प्रधान, राज कुमार यादव, नागेंद्र महतो, साईमन मरांडी, कुशवाहा शिवपूजन मेहता, आलोक कुमार चौरसिया, देवेंद्र सिंह, विकास कुमार मुंडा, नवीन जायसवाल, जीतू चरण राम, सीमा देवी, मनोज कुमार यादव, जय प्रकाश भाई पटेल, जानकी यादव, निर्मला देवी, मनीष जायसवाल, जय प्रकाश वर्मा, केदार हाजरा, निर्भय कुमार शाहबादी, हेमंत सोरेन, शिव शंकर उरांव, सत्येंद्र नाथ तिवारी, चंपई सोरेन, चमरा लिंडा, बादल पत्रलेख, स्टीफन मरांडी, जगन्नाथ महतो, नारायण दास, बबीता देवी, राज किशोर महतो, रामचंद्र सहिस, अशोक कुमार शामिल हैं.

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