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कोर्ट के दखल दिहानी के आदेश के बाद भी आदिवासी जमीन पर दबंगों का कब्जा, दिव्यांग परिवार की हेमंत सोरेन से गुहार

pravin kumar

Ranchi : CNT एक्ट की धज्जियां उड़ा कर एक दिव्यांग परिवार की 12.95 एकड़ भूमि पर कोर्ट के आदेश के बाद भी दबंग कब्जा जमाये हुए हैं. कब्जे के कारण अब तक सोनिया मुंडा की वैध वारिस दिव्यांग मोहरी मुंडा को अपना हक नहीं मिल सका है. जबकी इस मामले में सीएम हेमंत सोरेन डीसी रांची को ट्वीट पर न्याय दिलाने की बात कह चुके है. जान लें कि न्यायालय के आदेश का पालन नहीं होता देख दिव्यांग परिवार सीएम से गुहार लगाने उनके आवास पर पहुंचा. जहां उन्हें जल्द न्याय मिलने की आस बंधी. वर्तमान में मांग कर अपना जीवन गुजर-बसर करने वाला दिव्यांग परिवार रांची ,महेशपुर और अनगड़ा सीओ कार्यालय का चक्कर लगा रहा है.

क्या है दिव्यांग परिवार की व्यथा

रांची जिले के अनगड़ा अंचल के एक दिव्यांग परिवार मोहरी मुंडा, पति संजय मुंडा की 12.95 एकड़ जमीन हड़प ली गयी थी. दिव्यांग परिवार अपनी जमीन पाने के लिए 2016 से सरकारी कार्यालय का चक्कर काट रहा है. न्यायालय, उप समाहर्ता द्वारा भूमि वापसी के दो बार आदेश दिये जाने के बावजूद दिव्यांग परिवार को खुद की जमीन पर कब्जा नहीं मिल सका है.

न्यायालय उप समाहर्ता की ओर से वाद सं -13/2016-2017 सोनिया मुंडा वादी बनाम सुराब खॉ बगैरह प्रतिवाद के मामले में 25-10-2019 को पारित आदेश में कहा गया है कि खतियानी रैयत के वैध वारिसों को दखल कब्जा दिलाने का निर्देश परित हुआ था, लेकिन दो माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी वैध वारिसों को जमीन पर कब्जा नहीं मिल सका.

जबकि इस मामले में हेमंत सोरेन ने रांची डीसी को 23 जनवरी को ट्वीट कर मामले की निष्पक्ष जांच कराते हुए इस दिव्यांग परिवार को उनका हक जल्द से जल्द दिलाने की बात कही थी. जब मामला सीएम हेमंत सोरेन के संज्ञान में आया, इससे एक दिन पहले 22.01.2020 को अंचल कार्यालय अनगड़ा के द्वारा सीओ अनगड़ा के हस्ताक्षर एवं न्यायालय की मोहर से नोटिस जारी किया गया था जिसमें 31.01.2020 तक दखल कब्जा करना था जो अब तक नहीं हो सका.

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दखल कब्जा में हो रही देर पर दिव्यांग परिवार पहुंचा सीएम के पास

दो साल से कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाते सोनिया मुंडा की मौत 26 अक्टूबर 2018 को हो गयी अपनी जमीन पर कब्जा पाने के लिए सोनिया मुंड़ा की दिव्यांग बेटी मोहरी मुंडा अपनी खतियानी पाने के लिए सीएम हेमंत सोरन से मिल कर न्याय की गुहार लगाई. सीएम हेमंत सोरेन ने न्याय दिलाने का भरोसा दिया.

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12.95 एकड़ जमीन के मालिक के पास नहीं है अपना घर

दिव्यांग मोहरी मुंडा अपनी पति और एक 10 साल की बेटी के साथ सुबह सीएम आवास पहुंची. इससे पहले कई बार अंचल कार्यालय जा कर अपनी जमीन पर न्यायालय द्वारा पारित आदेश के आलोक में दखल कब्जा दिलाने की गुहार लगा चुकी है. सीएम आवास में दिव्यांग परिवार को जानकारी मिली कि उसकी जमीन के वापसी की तारीख 17 फरवरी तय की गयी है. इससे पहले कोई समय सीमा की जानकारी दिव्यांग परिवार को नहीं थी.

कब्जाधारियों के पास जमीन के दावे से संबंधित नहीं है पुख्ता कागजात

मोहरी मुंडा की खतियानी जमीन पर सुराब खा, मौजा महेशपुर खाता सं. 36 प्लांट सं-0 रकबा- 9.89 एकड़,राजेश गोयल एवं विरेन्द्र प्रासद पांडेय, मौजा महेशपुर खाता सं.36, प्लॉट सं. 623,626, 687,688, 689, 690, 691 रकबा-1.10 एकड़,राजेश गोयल एवं विरेन्द्र प्रसाद पांडेय खाता सं 36 ,प्लॉट सं. 628, रकबा 0.97 एकड, नन्द लाल साहु, खाता सं.- 37, रकबा-0.42 एकड़, मुरतफ खां, खाता नं.- 37 प्लॉट नं.1517, रकबा-0.42 एकड़, कब्जा कर रखा है. न्यायालय में कब्जाधकरियों के द्वारा वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किये जा सके हैं.

दिव्यांग परिवार की जमीन को लेकर क्या है न्यायालय का आदेश

विवादित भूमि अदिवासी खाते की है एवं इस पर कब्जा धारियों का अवैध रूप से कब्जा है. छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम की धारा 71 के तहत अनगड़ा सीओ को आदेश दिया गया कि जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त करा कर सोनिया मुंडा ,पति लेंगा मुंडा के खतियानी रैयतों के वंशजों को दखल-कब्जा करायें.

रांची में आदिवासी जमीन के अवैध हस्तांतरण और कब्जे के कई मामले आ चुके हैं सामने

कानून को धता बताते हुए रांची शहर में आदिवासी जमीन को हथियाने के अनेक मामले उजागर हो चुके है. लेकिन गरीब आदिवासियों को अपनी ही जमीन पर कब्जा पाने के लिए कोट कचहरी और सरकारी कार्यलय का चक्कर काटते रहना होता है. आदिवासी जमीन का गैरकानूनी तरीके से खरीद विक्री और कब्जे का का दायरा रांची शहर के आसपास के अंचलों में भी बढ़ने लगा है.

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