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CM की घोषणा के बावजूद 30 दिनों में बालू घाटों के ऑक्शन का मसला धरातल पर नहीं, 358 घाटों पर CCTV भी नहीं

Ranchi : झारखंड विधानसभा में मंगलवार को बालू घाट की नीलामी का मसला उठा. विधायक बिरंची नारायण इस संबंध में कार्य स्थगन प्रस्ताव भी लाए. उन्होंने कहा कि राज्य में Jharkhand State Stand Mining Polciy 2017 का पालन ही नहीं हो रहा. नतीजा यह है कि बालू की जरूरतों को पूरा करने को लोग बिचौलियों से चार से पांच गुना अधिक कीमतों पर बालू खरीद रहे हैं.

माइनिंग पॉलिसी के तहत कैटेगरी-2 के 358 बालू घाटों को JSMDC के जरिए कॉमर्शियली बेचने का प्रावधान है. 16 मार्च, 2021 को सीएम हेमंत सोरेन ने स्वयं सदन में कहा था कि वित्तीय वर्ष के प्रथम माह में ऑक्शन का काम पूरा कर लिया जाएगा. बावजूद इसके इस पर सरकार अब तक काम नहीं कर सकी है.

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जारी है बालू का अवैध खनन

Sanjeevani
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बिरंची नारायण के मुताबिक माइनिंग पॉलिसी को साकार करने को 358 बालू घाटों पर अब तक सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए गए हैं. ऐसा किए जाने से अवैध रूप से बालू का खनन औऱ परिवहन रोके जाने में मदद मिलती. गाड़ियों में जीपीएस सिस्टम भी नहीं लगाए जाने से बालू का अवैध खनन और कारोबार जारी है.

बोकारो, गढ़वा, पलामू, सिमडेगा सहित दूसरे राज्यों से सटे जिलों में स्थानीय प्रशासन की शह पर अवैध तरीके से बालू की ढुलाई हो रही है.

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ट्रैक्टर जब्त कर रही पुलिस

पिछले वर्ष (वर्ष 2020) मार्च में बजट सत्र के दौरान मंत्री बादल पत्रलेख ने सदन में भरोसा दिलाया था कि जो लोग अपने निजी उपयोग के लिए ट्रैक्टर और छोटी गाड़ियों के जरिए बालू का परिवहन कर रहे हैं, उन्हें पुलिस परेशान नहीं करेगी पकड़ेगी भी नहीं.

यहां तक कि 19 मार्च, 2020 को डीजीपी के स्तर से भी इस संबंध में सूचना जारी की गयी थी. इसके बाद भी पुलिस नाका और गश्ती दलों द्वारा सरकार के इस आदेश का उल्लंघन किया जा रहा है.

मनमाने तरीके से गाड़ियों को पकड़ कर जब्त कर लिया जाता है. थाना में लगा दिया जाता है और भयादोहन किया जाता है.

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