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राजीव गांधी के मना करने के बावजूद संजय गांधी ने उड़ाई थी पिट्स प्लेन, राहुल गांधी ने सुनाया पूरा किस्सा

New Delhi: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को दिल्ली में अपने दिवंगत पिता और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को याद किया. राजीव गांधी की स्मृति में एक वीडियो – “द जॉय ऑफ़ फ़्लाइट” – YouTube पर साझा किया गया है. इस वीडियों में राहुल गांधी को पिता के साथ साझा किए गए विमान उड़ाने के सामान्य जुनून के बारे में बात करते देखा जा सकता है. राहुल गांधी ने डीसी 3 विमान की तस्वीर की ओर इशारा करते हुए कहा, “यह सबसे सुंदर विमान है और यह पहला विमान है जिस पर मेरे पिता ने वाणिज्यिक उड़ान भरी थी.” प्रदर्शनी में विमान और उसके आसपास राजीव गांधी की कई तस्वीरें दिखाई गई हैं.

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राहुल गांधी ने एयरबस A320 की एक तस्वीर को देखते हुए कहा कि राजीव गांधी के “बड़े अफसोस” में से एक यह था कि उन्होंने एयरलाइंस छोड़ दी और बड़े जेट नहीं उड़ा सके. राजीव गांधी राजनीति में आने से पहले एक व्यावसायिक पायलट थे.

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51 वर्षीय राजनेता ने यह भी याद किया कि जब भी वह उनके साथ विमान या हेलीकॉप्टर में होते थे तो उनके पिता उन्हें कॉकपिट में बैठाते थे. “वह मुझसे सभी उपकरणों और अन्य विवरणों के बारे में पूछते थे.” राहुल गांधी ने यह भी याद किया कि राजीव गांधी जब भी फ्लाइट में जाते थे तो उनकी मां (सोनिया गांधी) कितनी चिंतित हो जाती थीं.

राहुल गांधी एक प्रशिक्षित पायलट भी हैं. उन्होंने एक पायलट और एक नेता के बीच तुलना भी की. राहुल गांधी ने कहा, “यदि आप कॉकपिट के भीतर की चीजों पर नजर नहीं रख पाएंगे तो समस्या खड़ी हो जाएगी और अगर आप 30 हजार फीट की ऊंचाई से दिखने वाले दृश्य से नजर हटा लेंगे तब भी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है. इसलिए एक पायलट और मैं एक ही हैं, हम इन दोनों जगहों पर तेजी से नजर रखते हैं.’

‘चाचा के पास नहीं था प्‍लेन उड़ाने का ज्‍यादा अनुभव’

राहुल गांधी ने अपने चाचा संजय गांधी के बारे में भी बताया, जिनकी 23 जून, 1980 को विमान उड़ाते वक्त दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी. उन्होंने याद किया कि उनके पिता ने उनके चाचा को उस विमान को उड़ाने के खिलाफ चेतावनी दी थी. “यह एक पिट्स था. यह एक बहुत ही आक्रामक विमान है. मेरे पिता ने उनसे कहा था, ऐसा मत करो. मेरे चाचा के पास वास्तव में अनुभव नहीं था.” संजय गांधी के पास प्लेन उड़ाने का बस 300 से 350 घंटे का ही अनुभव था. राहुल गांधी ने कहा- ‘उन्हें (संजय गांधी को) वह प्‍लेन नहीं उड़ाना चाहिए था लेकिन उन्होंने उड़ाया. और वही हुआ जो उड़ाने का अनुभव न होने पर होता है. आसानी से खुद की जान ली जा सकती है.’

 

हादसे के एक दिन पहले पत्नी मेनका गांधी को कराया था सफर

हादसे के एक दिन पहले यानी 22 जून को संजय गांधी ने अपनी पत्नी मेनका गांधी को भी प्लेन में सफर कराया था, उस वक्त भी वह खुद ही प्लेन उड़ा रहे थे. दोनों के साथ इंदिरा गांधी के विशेष सहायक आरके धवन और धीरेंद्र ब्रह्मचारी भी मौजूद थे. उस दिन संजय गांधी ने करीब 40 मिनट तक दिल्ली के आसमान में चक्कर लगाए थे. हादसे वाले दिन तो संजय गांधी का प्लान मौजूदा केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिता माधवराव सिंधिया के साथ प्लेन लेकर जाने का था, लेकिन अचानक ही संजय गांधी दिल्ली फ्लाइंग क्लब के पूर्व इंस्ट्रक्टर सुभाष सक्सेना के घर पहुंच गए थे. उसके बाद जो हुआ वो आज भी एक दर्दनाक याद के तौर पर लोगों की जेहन में दर्ज है.

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