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दो सीनियर IAS रैंक के सचिव रहने के बावजूद वित्त विभाग के 39 प्रभार जूनियर रैंक के संयुक्त सचिव को

हाल योजना सह वित्त विभाग का

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Akshay Kumar Jha

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Ranchi: सुखदेव सिंह के योजना सह वित्त विभाग से तबादले के बाद से ही विभाग में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. पहले केके खंडेलवाल को योजना सह वित्त विभाग का प्रभार दिया गया, बाद में उनका तबादला पूर्ण रूप से योजना सह वित्त विभाग में कर दिया गया. ब्यूरोक्रेसी में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि जबसे उनका तबादला योजना सह वित्त विभाग में किया गया, उस वक्त से वो नाराज चल रहे थे. पहले तो कई दिनों तक छुट्टी पर रहे. कोई रास्ता न निकलता देख आखिरकार केके खंडेलवाल ने विभाग ज्वाइन किया. अब ज्वाइन करने के बाद काम के फ्लो में आने से पहले ही उन्होंने सांप भी मर जाये और लाठी भी न टूटे टाइप का तरीका ईजाद किया. उन्होंने अपने विभाग के कुल 39 तरीके के प्रभार को एक जूनियर अधिकारी संयुक्त सचिव को सौंप दिया.

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दो IAS अधिकारी के रहते जूनियर को प्रभार देने की क्या थी मजबूरी

योजना सह वित्त विभाग में पहले से ही दो आइएएस रैंक के अधिकारी सचिव के पद पर हैं. सत्येंद्र सिंह और हिमानी पांडेय. बावजूद इसके विभाग के अपर मुख्य सचिव ने सारे प्रभार संयुक्त सचिव सह उप सचिव जैसे जूनियर अधिकारी को सौंप दिया. इस पद पर विभाग में परमेश्वर भगत हैं. अब परमेश्वर भगत के पास इतने प्रभार हैं, जितना सचिव रैंक के अधिकारी के पास नहीं हैं. वहीं तीन कार्य का प्रभार निदेशक प्रमुख/उप निदेशक सह उप सचिव को सौंपा है. विभाग का हाल अब ऐसा है कि बात चाहे कैरेक्टर सर्टिफिकेट की बात हो या विभाग के सभी अधिकारियों के लिए वाहन की व्यवस्था करने की, तो सभी परमेश्वर भगत के ही जिम्मे है.

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बिना मंत्री की अनुमति के लिया निर्णय, मंत्री हैं सीएम रघुवर दास

इस पूरे प्रकरण में सबसे चौंकानेवाली बात है कि यह आदेश बिना मंत्री के अनुमोदन के ही निकाल दिया गया है. जबकि ऐसे कामों के लिए विभाग के मंत्री का अनुमोदन लेना अनिवार्य माना जाता है. इस विभाग के मंत्री खुद सीएम रघुवर दास हैं. योजना सह वित्त विभाग व्यय और संसाधन दो स्तर पर बंटे हैं. लेकिन विभाग में संसाधन पर विभाग के अधिकारियों का ध्यान ही नहीं है. हिमानी पांडेय को योजना सह वित्त विभाग में संसाधन सचिव का प्रभार दिया गया था. लेकिन वो भी विभाग में व्यय का ही काम देखती हैं. सालों से विभाग में सचिव पद पर पदस्थापित सत्येंद्र सिंह भी विभाग में व्यय का ही काम देखते हैं. संसाधन पर किसी का ध्यान ही नहीं है.

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