न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

राज्य के +2 विद्यालयों में कई विषयों के छात्र नहीं होने के बावजूद पदस्थापित हैं शिक्षक

बिना मेहनत के ले रहे हैं वेतन

32

Dhanbad : राज्य के +2 और उच्च विद्यालयों में विषयवार शिक्षकों की पदस्थापन में भारी अनियमितता पायी गयी है. राज्य के कई जिलों के विद्यालयों में कई विषयों के छात्र नहीं होने के बावजूद भी कई शिक्षक पदस्थापित हैं और वो बिना पढ़ाये ही वेतन का भुगतान प्राप्त कर रहे हैं. जबकि इन विद्यालयों में कई विषयों के सैकड़ों छात्र होने के बावजूद भी उस विषय के शिक्षक नहीं हैं. जिससे विद्यार्थियों के पढ़ाई और रिजल्ट पर प्रभाव पड़ रहा है और लगातार रिजल्ट का ग्राफ गिरता जा रहा है.

इसकी शिकायत कई जिलों से लगातार झारखंड सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को प्राप्त हो रही है. प्रधान सचिव अमरेंद्र प्रताप सिंह ने स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के निदेशक को पत्र से जानकारी दी है. पत्र में कहा गया है कि राज्य के विभिन्न जिलों में विद्यालयों में विषयवार छात्र बल नहीं रहने के बावजूद 11 शिक्षकों की स्वीकृति पदबल के विरुद्ध पदस्थापन किया गया है. जबकि कई विद्यालयों में पर्याप्त छात्र बल रहने के बावजूद विषयवार शिक्षक उपलब्ध नहीं है.

+2 विद्यालय मेसरा में बिना कार्य के कई विषयों के शिक्षक ले रहे हैं वेतन

+2 विद्यालय, मेसरा में बिना कार्य के कई विषय के शिक्षक पदस्थापित हैं और बिना कार्य के उनको वेतन भुगतान किये जाने का मामला सामना आया है. इसके अलावा रांची और अन्य शहरी समीपवर्ती क्षेत्र में बिना भवन के उच्च एवं +2 विद्यालय संचालित किये जाने का मामला भी सामने आया है. उक्त मामलों को सामने आने के बाद कई निर्देश दिये गये हैं. जिसमे कहा गया है कि उच्च विद्यालय एवं +2 विद्यालय स्तर पर जिलावार, विद्यालयवार, विषयवार, शिक्षकों के पदस्थापन, कार्यरत बल और विद्यार्थियों की संख्या को तैयार करके जिलों से संबंधित जानकारी प्राप्त किया जाये.

जिला शिक्षा पदाधिकारियों को कोई भी शिक्षक बिना शिक्षण कार्य के वेतन ना मिले इसको देखने का दायित्व दिया गया है. फिजूलखर्ची से बचने के लिए जिले के प्रत्येक विद्यालय में विषयवार शिक्षक की संख्या और स्वीकृत पद की गणना करने का निर्देश है. कक्षा 10 और 12 की जैक से अनुमोदित विषय और गत 5 वर्षों में परीक्षा में नियमित छात्र की विषयवार और जिलवार जानकारी प्राप्त की जाये. विभाग जिलावार ऐसा डाटा तैयार करे जिससे किसी भी विद्यालय में विषयवार शिक्षकों की कमी न हो. क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक, निदेशक माध्यमिक शिक्षा से विचार-विमर्श कर अधीनस्थ जिला शिक्षा पदाधिकारी के सहयोग से विवरणी तैयार करने के भी निर्देश दिये गये हैं. सीबीएसइ, निजी विद्यालयों और केंद्रीय विद्यालयों की व्यवस्था विषयवार शिक्षकबल, विद्यार्थियों की संख्या, विद्यालय भवन और क्लासरुम के साइज, शिक्षक साप्ताहिक कार्य घंटा, प्रतिदिन विषयवार कार्य घंटा का अध्ययन करने को कहा गया है.

क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं में भी नियमित विद्यार्थियों की संख्या और उस विषय के पदस्थापित शिक्षकों की संख्या और शिक्षण कार्य की संख्या का ब्यौरा, उर्दू और संस्कृत के शिक्षक स्वीकृति/ कार्यरत ब्योरा जिलावार जैक से ली जाये. साथ ही विषयवार विद्यार्थियों की संख्या का भी ब्यौरा लेने का निर्देश है. भाषायी और विषय शिक्षक हेतू गठित कमिटी का प्रतिवेदन उच्च न्यायालय को देना है. उक्त निर्देश 01.01.2019 को पत्र के माध्यम से जारी कर वास्तविक आकलन करने की बात कही गयी है. यह पत्र जिला शिक्षा पदाधिकारियों को भी जारी किया गया है.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Comments are closed.

%d bloggers like this: